Sensex 479 अंक टूटा, Nifty 23,914 पर बंद: मिड और स्मॉलकैप शेयरों ने दिखाई मजबूती

कमजोर ग्लोबल संकेतों और बढ़ते कच्चे तेल के दामों ने बाजार पर डाला दबाव, फिर भी मिडकैप शेयरों ने दिखाई ताकत।

Dev
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Sensex और Nifty में गिरावट के बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने निवेशकों को राहत दी।शेयर बाजार गिरावट के दौरान Sensex और Nifty लाल निशान में ट्रेड करते हुए


भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। दो दिनों की लगातार तेजी के बाद बाजार में मुनाफावसूली हावी रही, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। कमजोर वैश्विक संकेत, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिका-ईरान तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। हालांकि बड़ी गिरावट के बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने मजबूती दिखाई, जिसने बाजार को पूरी तरह टूटने से बचाया।

बीएसई सेंसेक्स 479 अंक यानी 0.63 प्रतिशत गिरकर 76,009.70 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 50 इंडेक्स 118 अंक यानी 0.49 प्रतिशत टूटकर 23,913.70 पर बंद हुआ। दिनभर बाजार में बिकवाली का दबाव बना रहा, खासकर आईटी, बैंकिंग और कंज्यूमर ड्यूरेबल सेक्टर में कमजोरी देखने को मिली।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने बचाई बाजार की इज्जत

जहां एक तरफ बड़े शेयरों में बिकवाली हावी रही, वहीं दूसरी तरफ मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में मजबूती बनी रही। बीएसई मिडकैप इंडेक्स 0.33 प्रतिशत चढ़ा जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स 0.21 प्रतिशत ऊपर बंद हुआ। यह संकेत देता है कि घरेलू निवेशकों का भरोसा अभी भी मजबूत बना हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII की लगातार खरीदारी बाजार को सपोर्ट दे रही है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद मिडकैप शेयरों में खरीदारी बनी हुई है, जो बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

बाजार गिरने की बड़ी वजह क्या रही?

मंगलवार को बाजार पर कई नकारात्मक फैक्टर्स का असर देखने को मिला। सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव रहा। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने दक्षिणी ईरान में सैन्य कार्रवाई की, जिसके बाद मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया। इसके जवाब में इजरायल ने भी लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमला शुरू कर दिया।

इन घटनाओं के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। ब्रेंट क्रूड 3 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 99 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए यह चिंता की बात है क्योंकि इससे महंगाई बढ़ सकती है और रुपये पर दबाव बनता है।

भारतीय रुपया भी कमजोर होकर डॉलर के मुकाबले 95.73 पर बंद हुआ। रुपये में कमजोरी विदेशी निवेशकों की चिंता को और बढ़ाती है, जिसका असर सीधे शेयर बाजार पर पड़ता है।

किन शेयरों में रही सबसे ज्यादा गिरावट?

निफ्टी 50 इंडेक्स में कुल 32 शेयर लाल निशान में बंद हुए। सबसे ज्यादा नुकसान Apollo Hospitals Enterprise, Wipro, Bharti Airtel, Trent, TCS और Titan Company को हुआ। आईटी सेक्टर में भारी बिकवाली देखने को मिली क्योंकि वैश्विक बाजारों से कमजोर संकेत मिल रहे थे।

वहीं दूसरी तरफ Adani Enterprises, Tata Motors Passenger Vehicles, Tech Mahindra और Eternal जैसे शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। खासतौर पर मेटल सेक्टर में मजबूती रही और Nifty Metal इंडेक्स 1.10 प्रतिशत चढ़कर बंद हुआ।

बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों पर दबाव

बैंकिंग सेक्टर भी दबाव में रहा। Bank Nifty 0.36 प्रतिशत गिरा जबकि Private Bank Index और PSU Bank Index में क्रमशः 0.62 प्रतिशत और 0.46 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

विशेषज्ञों के अनुसार ऊंचे कच्चे तेल के दाम और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के कारण निवेशक फिलहाल बैंकिंग शेयरों में सतर्क नजर आ रहे हैं। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बैंकिंग शेयरों को प्रभावित कर रही है।


एक्सपर्ट्स की राय: आगे क्या होगा?

HDFC Securities के सीनियर टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट नागराज शेट्टी के मुताबिक निफ्टी के लिए 24,100 का स्तर फिलहाल बड़ी बाधा बना हुआ है। हालांकि उन्होंने कहा कि मौजूदा गिरावट से बाजार की शॉर्ट टर्म तेजी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

उनके अनुसार अगर निफ्टी 23,800 के ऊपर बना रहता है तो आने वाले दिनों में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं Bajaj Broking के विश्लेषकों ने कहा कि निफ्टी फिलहाल 50-Day EMA के नीचे बंद हुआ है, जो थोड़ी कमजोरी का संकेत देता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर निफ्टी 23,600 के नीचे जाता है तो गिरावट और बढ़ सकती है। नीचे की तरफ 23,200 से 23,000 का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है।

क्या निवेशकों को घबराने की जरूरत है?

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा गिरावट को पूरी तरह नकारात्मक नहीं माना जाना चाहिए। वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से बाजार में अस्थायी दबाव बना है। लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद और घरेलू निवेशकों की भागीदारी बाजार को लंबे समय में मजबूती दे सकती है।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का मजबूत प्रदर्शन यह दिखाता है कि निवेशकों का भरोसा अभी कायम है। हालांकि शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, इसलिए निवेशकों को सतर्क रहकर निवेश रणनीति बनानी चाहिए।

आगे किन बातों पर रहेगी नजर?

आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रहेगी। इसके अलावा F&O एक्सपायरी और वैश्विक बाजारों का रुख भी भारतीय बाजार की दिशा तय करेगा।

अगर अंतरराष्ट्रीय तनाव कम होता है और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है तो भारतीय शेयर बाजार में फिर से तेजी लौट सकती है। फिलहाल बाजार में अस्थिरता बनी रहने की संभावना है।


निष्कर्ष

मंगलवार का कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजार के लिए उतार-चढ़ाव भरा रहा। Sensex और Nifty में गिरावट जरूर आई, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों की मजबूती ने निवेशकों को राहत दी। वैश्विक तनाव और महंगे कच्चे तेल ने बाजार की चिंता बढ़ाई है, लेकिन घरेलू निवेशकों का भरोसा अभी भी मजबूत दिखाई दे रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर भी बन सकती है। ऐसे में निवेशकों को घबराने की बजाय सही रणनीति और मजबूत कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए।

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