GIFT Nifty ने बनाया नया रिकॉर्ड, Open Interest 21.56 अरब डॉलर के पार; भारतीय बाजार में बढ़ा विदेशी निवेशकों का भरोसा

GIFT Nifty में बना नया रिकॉर्ड, विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजार पर बढ़ा भरोसा।

Dev
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GIFT Nifty ने 21.56 अरब डॉलर के रिकॉर्ड Open Interest के साथ भारतीय ऑफशोर डेरिवेटिव मार्केट में नया इतिहास बनाया।GIFT Nifty ने 21.56 अरब डॉलर के रिकॉर्ड Open Interest के साथ भारतीय ऑफशोर डेरिवेटिव बाजार में नया कीर्तिमान स्थापित किया।

भारतीय शेयर बाजार से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। GIFT Nifty ने अपने इतिहास का सबसे बड़ा रिकॉर्ड बनाते हुए 21.56 अरब डॉलर (लगभग 2.04 लाख करोड़ रुपये) का Open Interest दर्ज किया है। यह उपलब्धि केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि वैश्विक निवेशकों का भारत के वित्तीय बाजार और GIFT City पर भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है।

25 जून 2026 को GIFT Nifty में 4,46,150 कॉन्ट्रैक्ट्स का Open Interest दर्ज किया गया, जो अब तक का सर्वाधिक स्तर है। इससे पहले अक्टूबर 2025 में 4,10,100 कॉन्ट्रैक्ट्स के साथ 21.23 अरब डॉलर का रिकॉर्ड बना था। अब नया रिकॉर्ड उस आंकड़े को भी पीछे छोड़ चुका है।

क्या होता है Open Interest?

शेयर बाजार में Open Interest का मतलब उन कुल फ्यूचर्स और ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स से होता है जो अभी तक समाप्त या सेटल नहीं हुए हैं। जब Open Interest बढ़ता है तो इसका अर्थ होता है कि बाजार में नए निवेशक आ रहे हैं और ट्रेडिंग गतिविधियां बढ़ रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि Open Interest में लगातार वृद्धि बाजार में निवेशकों के मजबूत विश्वास और बेहतर लिक्विडिटी का संकेत देती है।

विदेशी निवेशकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही

GIFT Nifty का यह नया रिकॉर्ड दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय निवेशक अब भारतीय इक्विटी डेरिवेटिव्स में पहले से कहीं अधिक रुचि दिखा रहे हैं।

GIFT Nifty के जरिए विदेशी निवेशकों को भारतीय बाजार में निवेश करने का एक आधुनिक और पारदर्शी प्लेटफॉर्म मिलता है। यही कारण है कि पिछले कुछ वर्षों में इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है।

विश्लेषकों का कहना है कि भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, स्थिर नीतियां और कॉर्पोरेट आय में सुधार विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं।

जुलाई 2023 से लगातार बढ़ रहा कारोबार

3 जुलाई 2023 को GIFT Nifty के पूर्ण संचालन शुरू होने के बाद से इसमें रिकॉर्ड वृद्धि देखने को मिली है।

अब तक:

  • 6.95 करोड़ से अधिक कॉन्ट्रैक्ट्स में ट्रेडिंग
  • 3.21 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का कुल कारोबार
  • लगातार बढ़ती वैश्विक भागीदारी

ये आंकड़े बताते हैं कि GIFT Nifty बहुत कम समय में दुनिया के प्रमुख ऑफशोर डेरिवेटिव प्लेटफॉर्म में अपनी पहचान बनाने में सफल रहा है।

NSE IX ने जताई खुशी

रिकॉर्ड Open Interest बनने के बाद NSE International Exchange (NSE IX) ने सभी निवेशकों और ट्रेडिंग प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

एक आधिकारिक बयान में एक्सचेंज ने कहा कि GIFT Nifty की सफलता निवेशकों के भरोसे और लगातार मिल रहे समर्थन का परिणाम है। आने वाले समय में प्लेटफॉर्म को और मजबूत बनाने की दिशा में काम जारी रहेगा।

GIFT IFSC में NSE IX की मजबूत पकड़

वर्तमान समय में GIFT IFSC के भीतर NSE International Exchange की बाजार हिस्सेदारी 99.6 प्रतिशत से अधिक है।

यह दर्शाता है कि भारत का यह अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंज विदेशी निवेशकों की पहली पसंद बन चुका है।

यहां केवल GIFT Nifty ही नहीं बल्कि कई अन्य वित्तीय उत्पादों में भी ट्रेडिंग की सुविधा उपलब्ध है।

इनमें शामिल हैं:

  • इंडियन सिंगल स्टॉक डेरिवेटिव्स
  • इंडेक्स डेरिवेटिव्स
  • करेंसी डेरिवेटिव्स
  • ग्लोबल स्टॉक्स
  • डिपॉजिटरी रिसीट्स
  • REITs
  • InvITs
  • ESG आधारित बॉन्ड

अमेरिकी निवेशकों के लिए भी खुला रास्ता

NSE IX को अमेरिकी नियामक संस्थाओं से भी महत्वपूर्ण मंजूरी मिली है।

अमेरिका की Commodity Futures Trading Commission (CFTC) तथा Securities and Exchange Commission (SEC) की नियामकीय छूट के बाद योग्य अमेरिकी निवेशक भी GIFT Nifty में ट्रेडिंग कर सकते हैं।

इससे भविष्य में विदेशी निवेश और अधिक बढ़ने की संभावना है।

भारतीय बाजार के लिए क्यों अहम है यह रिकॉर्ड?

GIFT Nifty का मजबूत प्रदर्शन केवल GIFT City तक सीमित नहीं है।

इसका सीधा सकारात्मक प्रभाव भारतीय पूंजी बाजार पर भी पड़ सकता है।

इसके प्रमुख कारण हैं—

  • विदेशी निवेशकों का भरोसा मजबूत होना
  • बेहतर वैश्विक लिक्विडिटी
  • भारतीय बाजार की अंतरराष्ट्रीय पहचान बढ़ना
  • ऑफशोर ट्रेडिंग में भारत की हिस्सेदारी मजबूत होना
  • GIFT City को वैश्विक वित्तीय केंद्र बनाने की दिशा में बड़ी सफलता

निवेशकों के लिए क्या संकेत?

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि Open Interest का रिकॉर्ड स्तर बताता है कि आने वाले समय में भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की भागीदारी और बढ़ सकती है।

हालांकि निवेशकों को केवल रिकॉर्ड आंकड़ों के आधार पर निवेश निर्णय नहीं लेना चाहिए। निवेश से पहले कंपनी के फंडामेंटल, सेक्टर की स्थिति, वैल्यूएशन और अपने जोखिम प्रोफाइल का मूल्यांकन करना जरूरी है।

आगे क्या रहेगा फोकस?

बाजार की नजर अब कई महत्वपूर्ण घटनाओं पर रहेगी—

  • विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की खरीदारी
  • अमेरिकी ब्याज दरों में बदलाव
  • भारतीय कंपनियों के तिमाही नतीजे
  • वैश्विक आर्थिक संकेतक
  • डॉलर इंडेक्स और कच्चे तेल की कीमतें

यदि वैश्विक माहौल सकारात्मक बना रहता है तो GIFT Nifty आने वाले महीनों में नए रिकॉर्ड भी बना सकता है।

निष्कर्ष

GIFT Nifty द्वारा 21.56 अरब डॉलर का रिकॉर्ड Open Interest हासिल करना भारतीय वित्तीय बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह केवल एक सांख्यिकीय रिकॉर्ड नहीं बल्कि वैश्विक निवेशकों के बढ़ते विश्वास, भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति और GIFT City के तेजी से उभरते अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्र बनने का संकेत है।

आने वाले वर्षों में यदि इसी तरह विदेशी भागीदारी बढ़ती रही तो GIFT Nifty भारत को वैश्विक वित्तीय मानचित्र पर और मजबूत पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह अवश्य लें।

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