करीब आधी सदी बाद इंसान एक बार फिर चाँद की ओर लंबी यात्रा पर निकलने की तैयारी में है। NASA ने घोषणा की है कि उसका बहुप्रतीक्षित आर्टेमिस II मिशन मार्च की शुरुआत में लॉन्च हो सकता है। यह मिशन 50 से अधिक वर्षों में पहली बार इंसानों को चाँद की परिक्रमा पर ले जाएगा — और यह भविष्य में चंद्रमा पर मानव लैंडिंग की दिशा में एक निर्णायक कदम होगा।
NASA ने 6 मार्च (ब्रिटेन में 7 मार्च तड़के) को संभावित लॉन्च तिथि के रूप में चिन्हित किया है। इससे पहले फ्लोरिडा स्थित Kennedy Space Center में “वेट ड्रेस रिहर्सल” नामक महत्वपूर्ण परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया गया। इस परीक्षण में रॉकेट को ईंधन से भरा गया और पूरी काउंटडाउन प्रक्रिया का अभ्यास किया गया।
क्या है आर्टेमिस II मिशन?
Artemis II चार अंतरिक्ष यात्रियों को 10 दिन की यात्रा पर चाँद के दूरस्थ हिस्से (फार साइड) तक ले जाएगा। यह वह हिस्सा है जिसे पृथ्वी से कभी सीधे नहीं देखा जा सकता। मिशन का उद्देश्य चंद्रमा की सतह से 6,500 से 9,500 किलोमीटर ऊपर से उड़ान भरना और विस्तृत अध्ययन करना है।
यह मिशन भविष्य के Artemis III के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा, जिसमें अंतरिक्ष यात्री चाँद की सतह पर कदम रखेंगे।
कौन हैं आर्टेमिस II के अंतरिक्ष यात्री?
इस ऐतिहासिक मिशन में तीन अमेरिकी और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं:
Reid Wiseman
Victor Glover
Christina Koch
Jeremy Hansen
मिशन से पहले सभी अंतरिक्ष यात्रियों को क्वारंटीन में रखा जाएगा ताकि स्वास्थ्य संबंधी कोई जोखिम न हो। NASA अधिकारियों के अनुसार, सफल रिहर्सल के बाद क्रू का उत्साह चरम पर है।
किस रॉकेट से होगी उड़ान?
इस मिशन में 98 मीटर ऊँचा Space Launch System (SLS) इस्तेमाल किया जाएगा। यह अब तक का सबसे शक्तिशाली रॉकेटों में से एक है। इसके शीर्ष पर स्थित Orion कैप्सूल में चारों अंतरिक्ष यात्री सवार होंगे।
Orion कैप्सूल का आंतरिक हिस्सा एक मिनीबस जितना है, जहाँ अंतरिक्ष यात्री 10 दिनों तक रहेंगे, काम करेंगे और विश्राम करेंगे।
मिशन की रूपरेखा इस प्रकार होगी:
पहला दिन पृथ्वी की कक्षा में परीक्षण
चार दिन की यात्रा कर चाँद की ओर प्रस्थान
चाँद के दूरस्थ हिस्से की परिक्रमा
चार दिन में पृथ्वी वापसी
प्रशांत महासागर में स्प्लैशडाउन
पिछली बार इंसान कब गया था चाँद पर?
आखिरी बार 1972 में Apollo 17 के दौरान इंसानों ने चाँद की यात्रा की थी। उसके बाद से कोई मानव मिशन चंद्रमा की ओर नहीं गया। ऐसे में आर्टेमिस II न केवल तकनीकी उपलब्धि है, बल्कि ऐतिहासिक वापसी भी है।
आर्टेमिस III और निजी कंपनियों की भूमिका
NASA की योजना है कि 2028 तक आर्टेमिस III के तहत चाँद पर लैंडिंग कराई जाए। इसके लिए SpaceX को लूनर लैंडर विकसित करने का अनुबंध दिया गया है। कंपनी का Starship रॉकेट इस मिशन में अहम भूमिका निभाएगा।
हालांकि, Starship कार्यक्रम में देरी के चलते NASA ने Blue Origin से भी वैकल्पिक तेज योजना प्रस्तुत करने को कहा है।
यह प्रतिस्पर्धा केवल निजी कंपनियों तक सीमित नहीं है। China भी 2030 तक चाँद पर मानव लैंडिंग का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। अमेरिका और चीन दोनों की नजर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर है, जहाँ भविष्य में स्थायी बेस बनाने की संभावनाएँ हैं।
क्यों अहम है यह मिशन?
आर्टेमिस II केवल एक प्रतीकात्मक उड़ान नहीं है। इसके कई रणनीतिक और वैज्ञानिक महत्व हैं:
गहरे अंतरिक्ष में मानव जीवन समर्थन प्रणाली का परीक्षण
लंबी दूरी की संचार तकनीक की जांच
भविष्य के मंगल मिशन की तैयारी
अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना
इसके साथ ही, यह मिशन यह भी दर्शाता है कि अंतरिक्ष अब केवल सरकारी एजेंसियों तक सीमित नहीं रहा — निजी कंपनियाँ और वैश्विक प्रतिस्पर्धा इसे नई दिशा दे रही हैं।
क्या चुनौतियाँ बाकी हैं?
हालाँकि “वेट ड्रेस रिहर्सल” सफल रही, लेकिन इससे पहले हाइड्रोजन ईंधन रिसाव जैसी समस्याएँ सामने आई थीं। NASA का कहना है कि तकनीकी खामियों को दूर कर लिया गया है, लेकिन इतने जटिल मिशन में हर चरण चुनौतीपूर्ण होता है।
2028 तक चंद्रमा पर मानव लैंडिंग का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है। बजट, तकनीकी अड़चनें और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा इस समयरेखा को प्रभावित कर सकती हैं।
निष्कर्ष
आर्टेमिस II मानव अंतरिक्ष इतिहास का नया अध्याय लिखने जा रहा है। 50 साल बाद इंसान फिर चाँद की परिक्रमा करेगा — और यह केवल शुरुआत है। आने वाले वर्षों में चाँद पर स्थायी बेस, संसाधन खोज और गहरे अंतरिक्ष मिशनों की राह यहीं से खुलेगी।
जब रॉकेट लॉन्च पैड से उठेगा, तो वह केवल चार अंतरिक्ष यात्रियों को नहीं, बल्कि मानवता के नए सपनों को लेकर उड़ान भरेगा।


