विश्व युद्ध जैसे संकट में भी शेयर क्यों खरीदने चाहिए? वॉरेन बफेट की निवेश सलाह

डर के माहौल में भी निवेश का मौका छिपा होता है — वॉरेन बफेट

Dev
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वैश्विक संकट के दौरान भी शेयर बाजार में निवेश करने की सलाह देते वॉरेन बफेट।World War के दौरान भी शेयर खरीदने की सलाह देते Warren Buffett

वैश्विक राजनीति में तनाव बढ़ने के साथ ही दुनिया भर के वित्तीय बाजारों में अस्थिरता देखी जा रही है। हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इस तरह की परिस्थितियों में अक्सर निवेशक शेयर बाजार से दूरी बनाने लगते हैं और सुरक्षित विकल्पों जैसे सोना, नकद या सरकारी बॉन्ड की ओर रुख करते हैं।

लेकिन दुनिया के सबसे सफल निवेशकों में से एक Warren Buffett का मानना है कि डर और अनिश्चितता के समय भी शेयर बाजार से दूर नहीं जाना चाहिए। बल्कि ऐसे समय में भी निवेश जारी रखना चाहिए क्योंकि लंबे समय में उत्पादक संपत्तियां ही असली संपत्ति बनाती हैं।

वैश्विक तनाव का बाजार पर असर

मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में हाल के दिनों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। अमेरिका का प्रमुख शेयर सूचकांक Dow Jones Industrial Average मार्च 2026 में अब तक 4 प्रतिशत से अधिक गिर चुका है।

इसी तरह भारत का प्रमुख सूचकांक Nifty 50 भी लगभग 4 प्रतिशत तक फिसल गया है। कच्चे तेल की कीमतों में संभावित उछाल और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के कारण निवेशकों में चिंता बढ़ी है।

इतिहास बताता है कि जब भी दुनिया में युद्ध या बड़ा संकट आता है, निवेशकों का भरोसा डगमगा जाता है। लोग जोखिम भरे निवेश से दूरी बनाकर नकद, सोना या सुरक्षित संपत्तियों में पैसा लगाना पसंद करते हैं।

फिर भी शेयर क्यों खरीदने चाहिए?

एक पुराने इंटरव्यू में वॉरेन बफेट से पूछा गया था कि यदि भविष्य में तीसरा विश्व युद्ध हो जाए या दुनिया फिर से शीत युद्ध जैसी स्थिति में पहुंच जाए तो क्या वह शेयर खरीदना जारी रखेंगे।

इस सवाल पर उनका जवाब बिल्कुल साफ था — हां, मैं तब भी शेयर खरीदूंगा।

बफेट के अनुसार निवेशकों को अपने पैसे को किसी न किसी जगह निवेश करना ही पड़ता है। अगर आप सिर्फ नकद रखते हैं, तो समय के साथ उसकी खरीद शक्ति कम होती जाती है।

युद्ध के समय पैसे की कीमत क्यों घटती है

बफेट का कहना है कि बड़े युद्धों के दौरान सरकारें भारी खर्च करती हैं। इसके कारण अक्सर महंगाई बढ़ती है और मुद्रा की वास्तविक कीमत घट जाती है।

उनका कहना है कि इतिहास में लगभग हर बड़े युद्ध के दौरान यही पैटर्न देखने को मिला है। जब महंगाई बढ़ती है तो नकद पैसा धीरे-धीरे अपनी वास्तविक कीमत खो देता है।

यही वजह है कि बफेट नकद रखने के बजाय उत्पादक संपत्तियों (Productive Assets) में निवेश करने की सलाह देते हैं।

उत्पादक संपत्तियां क्या होती हैं

उत्पादक संपत्तियां ऐसी संपत्तियां होती हैं जो समय के साथ आय या मूल्य पैदा करती हैं। उदाहरण के लिए:

  • कंपनियों के शेयर

  • बिजनेस

  • कृषि भूमि

  • रियल एस्टेट

  • किराये वाली संपत्तियां

बफेट के अनुसार यदि युद्ध जैसी स्थिति भी बन जाए तो इन संपत्तियों का वास्तविक मूल्य लंबे समय में बना रहता है या बढ़ता है।

उनका कहना है कि युद्ध के दौरान नकद पैसा रखना सबसे खराब विकल्प हो सकता है। इसके बजाय लोगों को ऐसी संपत्तियां रखनी चाहिए जो भविष्य में आय उत्पन्न कर सकें।

इतिहास भी देता है इसका उदाहरण

बफेट ने इतिहास का उदाहरण देते हुए कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भी दुनिया भर में भारी विनाश हुआ था। लेकिन युद्ध खत्म होने के बाद अर्थव्यवस्थाएं धीरे-धीरे फिर से खड़ी हुईं और कंपनियों ने विकास करना शुरू किया।

समय के साथ शेयर बाजार भी ऊपर की ओर बढ़ा। इसका मतलब है कि अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बावजूद लंबी अवधि में बाजार का रुझान सकारात्मक रहता है।

अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनना जरूरी

बफेट की निवेश रणनीति का मूल सिद्धांत है कि निवेशक को अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनना चाहिए।

जब आप किसी कंपनी के शेयर खरीदते हैं तो आप उस कंपनी के मालिकाना हक का छोटा हिस्सा खरीदते हैं। इसका मतलब है कि कंपनी की वृद्धि के साथ आपकी संपत्ति भी बढ़ सकती है।

इसके विपरीत यदि आप केवल नकद पैसा रखते हैं तो वह समय के साथ महंगाई के कारण कमजोर होता जाता है।

लंबी अवधि का नजरिया जरूरी

बफेट हमेशा लंबी अवधि के निवेश पर जोर देते हैं। उनका मानना है कि शेयर बाजार में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से डरना नहीं चाहिए।

भू-राजनीतिक संकट, युद्ध, मंदी या आर्थिक अस्थिरता जैसी घटनाएं अस्थायी होती हैं। लेकिन लंबे समय में कंपनियां नई तकनीक अपनाती हैं, नए बाजारों में विस्तार करती हैं और अपनी कमाई बढ़ाती हैं।

यही कारण है कि दशकों के समय में शेयर बाजार लगातार नई ऊंचाइयों तक पहुंचता रहा है।

निवेशकों के लिए क्या है सीख

वॉरेन बफेट की सलाह निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश देती है — डर के कारण निवेश से दूर नहीं जाना चाहिए।

इसके बजाय निवेशकों को चाहिए कि वे मजबूत कंपनियों में लंबी अवधि के लिए निवेश करें।

बाजार में गिरावट अक्सर नए निवेश के अवसर भी पैदा करती है। जो निवेशक धैर्य और अनुशासन के साथ निवेश करते हैं, वे समय के साथ बेहतर रिटर्न हासिल कर सकते हैं।

निष्कर्ष

वैश्विक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता के समय बाजार में घबराहट होना स्वाभाविक है। लेकिन इतिहास और अनुभवी निवेशकों की सलाह बताती है कि लंबी अवधि में उत्पादक संपत्तियां ही वास्तविक संपत्ति बनती हैं।

वॉरेन बफेट का मानना है कि चाहे युद्ध हो या आर्थिक संकट, निवेशकों को अर्थव्यवस्था के विकास में भागीदार बने रहना चाहिए।

डर के माहौल में भी अगर निवेशक सही रणनीति और लंबी अवधि की सोच के साथ निवेश करते हैं, तो वे भविष्य में बेहतर संपत्ति बना सकते हैं।

Disclaimer:
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। निवेश से पहले किसी प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर लें।

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