बढ़ते प्रदूषण के दौर में ग्रीन रियल एस्टेट: निवेश या सिर्फ़ ट्रेंड?
दिल्ली-NCR आज देश के सबसे बड़े रियल एस्टेट बाजारों में से एक है, लेकिन इसके साथ जुड़ी एक कड़वी सच्चाई भी है—लगातार बिगड़ती हवा की गुणवत्ता। हर साल सर्दियों के आते ही AQI खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है, जिससे न सिर्फ़ बच्चों और बुज़ुर्गों बल्कि हर उम्र के लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ता है।
ऐसे माहौल में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या ग्रीन और सस्टेनेबल रियल एस्टेट में निवेश करना एक समझदारी भरा फैसला हो सकता है? खासतौर पर तब, जब ज्यादातर खरीदार अब भी कीमत, लोकेशन और रिटर्न को प्राथमिकता देते हैं, न कि पर्यावरण को।
ग्रीन रियल एस्टेट आखिर है क्या?
ग्रीन रियल एस्टेट से तात्पर्य उन प्रॉपर्टी प्रोजेक्ट्स से है, जिन्हें
पर्यावरण के अनुकूल डिजाइन
ऊर्जा की कम खपत
बेहतर हवा और रोशनी
पानी संरक्षण
और कम कार्बन फुटप्रिंट
को ध्यान में रखकर बनाया जाता है।
इन प्रोजेक्ट्स में आमतौर पर शामिल होते हैं:
इनडोर एयर प्यूरीफिकेशन सिस्टम
बड़े ग्रीन एरिया और पेड़-पौधे
सोलर पैनल और एनर्जी-एफिशिएंट लाइटिंग
रेन वॉटर हार्वेस्टिंग
वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम
दिल्ली-NCR में ग्रीन हाउसिंग क्यों जरूरी हो गई है?
दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण अब मौसमी समस्या नहीं, बल्कि सालभर की चुनौती बन चुका है। ऐसे में घर सिर्फ़ रहने की जगह नहीं, बल्कि सुरक्षित शरणस्थली बन जाता है।
ग्रीन हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में मिलने वाली बेहतर हवा, कम धूल और नियंत्रित वातावरण—
अस्थमा
एलर्जी
हार्ट और फेफड़ों की बीमारियों
के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकते हैं। 55 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों के लिए यह पहलू और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
क्या अभी बाजार ग्रीन प्रॉपर्टी को महत्व देता है?
सच यह है कि आज भी अधिकतर खरीदार सस्टेनेबिलिटी को प्राथमिक मानदंड नहीं मानते।
लेकिन बाजार धीरे-धीरे बदल रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में:
हेल्थ-फोकस्ड लिविंग
वर्क फ्रॉम होम
और कोविड के बाद बढ़ी जागरूकता
ने लोगों को अपने रहने के माहौल पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर किया है।
आज भले ही ग्रीन रियल एस्टेट एक निच सेगमेंट हो, लेकिन आने वाले समय में यह मेनस्ट्रीम बनने की पूरी संभावना रखता है।
निवेश के नजरिए से ग्रीन रियल एस्टेट कितना मजबूत है?
सिर्फ़ स्वास्थ्य ही नहीं, निवेश के लिहाज से भी ग्रीन रियल एस्टेट कई फायदे देता है।
भविष्य के नियमों के लिए तैयार
सरकार और रेगुलेटरी बॉडीज लगातार
एनर्जी एफिशिएंसी
पर्यावरणीय मानक
और ग्रीन कंस्ट्रक्शन
को बढ़ावा दे रही हैं। जो प्रोजेक्ट्स पहले से इन मानकों पर खरे उतरते हैं, उन्हें भविष्य में
अतिरिक्त खर्च
अचानक बदलाव
या जुर्माने
का सामना कम करना पड़ता है।
लॉन्ग-टर्म वैल्यू और रीसेल
जैसे-जैसे पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, वैसे-वैसे
ग्रीन सुविधाओं वाली प्रॉपर्टी
बेहतर एयर क्वालिटी
और लो मेंटेनेंस कॉस्ट
रीसेल के समय बड़ा प्लस बन सकती है।
संभावना है कि आने वाले वर्षों में प्रॉपर्टी वैल्यू का आकलन सिर्फ़
लोकेशन
साइज
पर नहीं, बल्कि
सस्टेनेबल फीचर्स
पर भी आधारित होगा।
ऑपरेशनल कॉस्ट में बचत
सोलर एनर्जी, वॉटर रीसाइक्लिंग और एनर्जी-एफिशिएंट सिस्टम्स के चलते
बिजली बिल
पानी की लागत
मेंटेनेंस खर्च
लंबे समय में कम हो सकता है, जो अप्रत्यक्ष रूप से निवेश पर बेहतर रिटर्न देता है।
जोखिम भी समझना जरूरी है
हालांकि ग्रीन रियल एस्टेट के फायदे हैं, लेकिन कुछ बातों पर सतर्क रहना जरूरी है:
हर “ग्रीन” टैग वाला प्रोजेक्ट वास्तव में सस्टेनेबल हो, यह जरूरी नहीं
सर्टिफिकेशन (IGBC, GRIHA आदि) की जांच जरूरी
लोकेशन और बिल्डर की साख अब भी उतनी ही अहम
ग्रीन होने के नाम पर ओवरप्राइसिंग से बचना भी जरूरी है।
क्या निवेश करना चाहिए? अंतिम राय
दिल्ली-NCR जैसे प्रदूषण-प्रभावित क्षेत्र में ग्रीन रियल एस्टेट में निवेश करना
स्वास्थ्य
भविष्य की जरूरत
और लॉन्ग-टर्म वैल्यू
तीनों दृष्टियों से एक समझदारी भरा और दूरदर्शी फैसला साबित हो सकता है।
भले ही आज यह ट्रेंड हर खरीदार की प्राथमिकता न हो, लेकिन आने वाले समय में यही फैसले आपको
बेहतर जीवन
सुरक्षित निवेश
और स्थिर रिटर्न
दे सकते हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
जहां आज अधिकतर निवेशक सिर्फ़ मुनाफे पर ध्यान देते हैं, वहीं ग्रीन रियल एस्टेट उन लोगों के लिए है जो
पर्यावरण
स्वास्थ्य
और भविष्य
तीनों के बीच संतुलन चाहते हैं।
SamaypeNews की राय में, यदि आप दिल्ली-NCR में प्रॉपर्टी खरीदने की सोच रही हैं, तो ग्रीन और सस्टेनेबल हाउसिंग को नजरअंदाज करना भविष्य में महंगा साबित हो सकता है।


