भारतीय शेयर बाजार में साल के अंतिम सप्ताह की सुस्ती सोमवार को भी साफ नजर आई। सीमित कारोबार, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच Sensex और Nifty दोनों लाल निशान में बंद हुए। शुरुआती कारोबार में हल्की मजबूती दिखाने के बाद बाजार दबाव में आ गया और निवेशकों ने जोखिम लेने से परहेज किया।
- Market Wrap: Sensex और Nifty का हाल
- गिरावट के मुख्य कारण
- साल के अंत की ट्रेडिंग सुस्ती
- विदेशी निवेशकों की बिकवाली
- वैश्विक व्यापार चिंताएं
- आईटी और एनर्जी शेयरों में कमजोरी
- सेक्टर प्रदर्शन (Sector Performance)
- Sensex के टॉप लूजर्स
- बाजार में क्यों बनी हुई है सतर्कता?
- एक्सपर्ट की राय
- आगे का बाजार आउटलुक
- SamaypeNews Verdict
Market Wrap: Sensex और Nifty का हाल
सोमवार को
BSE Sensex 346.00 अंक या 0.41% गिरकर 84,695.54 पर बंद हुआ।
वहीं NSE Nifty 50 100 अंक या 0.38% फिसलकर 25,942.10 के स्तर पर बंद हुआ, जो मनोवैज्ञानिक 26,000 के स्तर से नीचे है।
यह लगातार गिरावट इस बात का संकेत है कि बाजार में फिलहाल सावधानी का माहौल बना हुआ है।
गिरावट के मुख्य कारण
साल के अंत की ट्रेडिंग सुस्ती
दिसंबर के अंतिम दिनों में ट्रेडिंग वॉल्यूम आमतौर पर कम रहता है। कई बड़े संस्थागत निवेशक नई पोजीशन लेने से बचते हैं, जिससे बाजार में दिशा की कमी नजर आती है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली
Foreign Institutional Investors (FII) की ओर से लगातार बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाए रखा। कमजोर रुपया और अमेरिका से जुड़े व्यापारिक घटनाक्रम विदेशी निवेशकों को सतर्क बना रहे हैं।
वैश्विक व्यापार चिंताएं
अमेरिका से जुड़े ट्रेड डेवलपमेंट, जियोपॉलिटिकल टेंशन और ग्लोबल इकॉनमी को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को सीमित किया।
आईटी और एनर्जी शेयरों में कमजोरी
आईटी और एनर्जी सेक्टर में बिकवाली देखने को मिली, जिसने इंडेक्स पर नकारात्मक असर डाला।
सेक्टर प्रदर्शन (Sector Performance)
सोमवार के कारोबार में सेक्टरों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा:
आईटी सेक्टर: कमजोर रुपया होने के बावजूद आईटी शेयरों में मुनाफावसूली देखने को मिली।
एनर्जी और ऑयल & गैस: कच्चे तेल की कीमतों और ग्लोबल संकेतों के चलते दबाव में रहे।
लार्जकैप स्टॉक्स: प्रमुख हैवीवेट शेयरों में बिकवाली से बाजार नीचे खिसका।
मिडकैप और स्मॉलकैप: कुछ चुनिंदा शेयरों में हल्की मजबूती दिखी, लेकिन कुल मिलाकर रुझान कमजोर रहा।
Sensex के टॉप लूजर्स
Sensex पैक में कई दिग्गज शेयर दबाव में रहे, जिनमें शामिल हैं:
IT सेक्टर के प्रमुख स्टॉक्स
एनर्जी से जुड़े बड़े शेयर
चुनिंदा बैंकिंग और ऑटो शेयर
इन शेयरों में 1% से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली, जिसने इंडेक्स को नीचे खींचा।
बाजार में क्यों बनी हुई है सतर्कता?
विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार फिलहाल तीन बड़े फैक्टर्स पर नजर बनाए हुए है:
Q3 नतीजे (Quarterly Results) – जनवरी से कंपनियों के तिमाही नतीजे आने शुरू होंगे।
अमेरिका से ट्रेड संकेत – US ट्रेड पॉलिसी और ब्याज दरों से जुड़े संकेत।
रुपये की चाल – डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी विदेशी निवेश को प्रभावित कर रही है।
जब तक इन मोर्चों पर स्पष्टता नहीं आती, तब तक बाजार में कंसोलिडेशन और उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
एक्सपर्ट की राय
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि मौजूदा गिरावट बड़ी चिंता का विषय नहीं है, बल्कि यह एक नेचुरल कंसोलिडेशन फेज है।
Nifty के लिए सपोर्ट: 25,850–25,900
रेजिस्टेंस: 26,100–26,200
अगर विदेशी बिकवाली थमती है और Q3 नतीजे उम्मीद से बेहतर रहते हैं, तो बाजार में नई तेजी देखने को मिल सकती है।
आगे का बाजार आउटलुक
आने वाले दिनों में बाजार की दिशा इन बातों पर निर्भर करेगी:
Q3 Earnings Season
FII की ट्रेडिंग रणनीति
वैश्विक संकेत और अमेरिकी बाजार
रुपये की स्थिरता
निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे शॉर्ट टर्म उतार-चढ़ाव से घबराने के बजाय मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर नजर रखें।
SamaypeNews Verdict
साल के अंत में शेयर बाजार में दिख रही कमजोरी प्रॉफिट बुकिंग और सतर्कता का नतीजा है। Sensex और Nifty पर दबाव जरूर है, लेकिन लंबी अवधि के नजरिए से बाजार की बुनियाद अब भी मजबूत दिखाई देती है।
लॉन्ग टर्म निवेशक इस गिरावट को मौके के तौर पर देख सकते हैं, जबकि
ट्रेडर्स को फिलहाल सावधानी के साथ सीमित दायरे में ट्रेड करने की सलाह है।


