पिछले दो हफ्तों में भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और मध्य पूर्व में युद्ध जैसी परिस्थितियों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
ताजा आंकड़ों के अनुसार भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक Nifty 50 और BSE Sensex में तेज गिरावट दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के कारण बाजार पर दबाव बना हुआ है।
दो हफ्तों में भारी गिरावट
आंकड़ों के अनुसार पिछले दो हफ्तों में भारतीय शेयर बाजार में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है।
Nifty 50 इंडेक्स 25,496 से गिरकर 23,151 पर आ गया
यानी करीब 9.20% की गिरावट दर्ज हुई
इसी तरह:
Sensex 82,248 से गिरकर 74,563 पर पहुंच गया
यानी लगभग 7,685 अंकों की गिरावट दर्ज हुई
यह गिरावट हाल के महीनों में सबसे बड़ी गिरावटों में से एक मानी जा रही है।
बाजार में गिरावट के प्रमुख कारण
विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय शेयर बाजार में गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं।
1. मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव
मध्य पूर्व क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक बाजारों को प्रभावित किया है।
जब भी दुनिया के किसी बड़े क्षेत्र में युद्ध या संघर्ष की स्थिति बनती है, तो निवेशकों में डर का माहौल बन जाता है।
इसका सीधा असर शेयर बाजारों पर पड़ता है।
2. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें
मध्य पूर्व दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक क्षेत्रों में से एक है।
अगर वहां उत्पादन या सप्लाई प्रभावित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ने लगती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि Brent Crude Oil की कीमत जल्द ही 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है।
अगर यह स्तर पार होता है तो कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक भी जा सकती है।
3. विदेशी निवेशकों की बिकवाली
पिछले कुछ दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारतीय बाजार से पैसा निकालना शुरू कर दिया है।
जब विदेशी निवेशक बाजार से पैसा निकालते हैं तो शेयरों में बिकवाली बढ़ जाती है और बाजार गिरने लगता है।
4. वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता
महंगाई, धीमी आर्थिक वृद्धि और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी जैसी समस्याओं ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
इन कारणों से निवेशक जोखिम भरे निवेश से दूर रहना पसंद कर रहे हैं।
Nifty 50 के तकनीकी संकेत
मार्केट विशेषज्ञों के अनुसार हाल की गिरावट के बावजूद बाजार की दीर्घकालिक संरचना अभी भी पूरी तरह से कमजोर नहीं हुई है।
विश्लेषकों का मानना है कि:
23,500 के ऊपर टिकना बाजार के लिए सकारात्मक संकेत हो सकता है
जबकि 22,900 का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है
अगर यह स्तर टूटता है तो बाजार में और गिरावट देखने को मिल सकती है।
Sensex के लिए अहम स्तर
विशेषज्ञों के अनुसार Sensex के लिए फिलहाल कुछ महत्वपूर्ण स्तर तय हो चुके हैं।
74,000 के आसपास मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है
अगर यह स्तर टूटता है तो बाजार 73,000 तक गिर सकता है
वहीं ऊपर की ओर:
75,500 को पहला रेजिस्टेंस माना जा रहा है
जबकि 76,000 के पास भारी बिकवाली देखने को मिल सकती है
इसलिए निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
तेल उत्पादन में कटौती का असर
कुछ तेल उत्पादक देशों ने तेल और गैस उत्पादन में आंशिक कटौती की घोषणा की है।
इन देशों में शामिल हैं:
कुवैत
संयुक्त अरब अमीरात
सऊदी अरब
इराक
कतर
इन देशों द्वारा उत्पादन बंद करने या कम करने से वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि उत्पादन बंद होने के बाद इसे दोबारा शुरू करने में 15 से 30 दिन तक का समय लग सकता है।
LNG सप्लाई पर भी असर
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार अगर कतर में उत्पादन प्रभावित होता है तो इसका असर वैश्विक LNG सप्लाई पर पड़ सकता है।
कतर दुनिया की LNG सप्लाई का लगभग 20% हिस्सा उपलब्ध कराता है।
ऐसे में उत्पादन में रुकावट आने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है।
क्या बाजार में रिकवरी संभव है
कई विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट एक करेक्शन फेज हो सकती है, न कि दीर्घकालिक गिरावट।
अगर वैश्विक तनाव कम होता है और तेल की कीमतें स्थिर होती हैं तो बाजार में सुधार देखने को मिल सकता है।
हालांकि फिलहाल निवेशकों को सतर्क रहकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है।
निवेशकों के लिए सलाह
विशेषज्ञों के अनुसार इस समय निवेशकों को कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए:
जल्दबाजी में निवेश करने से बचें
लंबी अवधि की रणनीति अपनाएं
मजबूत कंपनियों में ही निवेश करें
विशेषज्ञों की सलाह के बिना बड़े फैसले न लें
निष्कर्ष
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है।
पिछले दो हफ्तों में Nifty और Sensex में आई तेज गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक परिस्थितियां स्थिर होती हैं तो बाजार में सुधार भी संभव है।
फिलहाल निवेशकों को सतर्क रहने और बाजार के अगले संकेतों का इंतजार करने की सलाह दी जा रही है।
Disclaimer:
यह लेख केवल जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श लेना चाहिए।


