Nifty ने रचा 10 साल का ऐतिहासिक रिकॉर्ड: 2025 में 10% रिटर्न, 2026 के लिए क्या हैं संकेत?

लगातार 10 साल मुनाफा, भारतीय शेयर बाजार की नई पहचान

Dev
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Nifty का 10 साल का रिकॉर्ड भारतीय शेयर बाजार की मजबूती को दर्शाता हैNifty 10 year record

भारतीय शेयर बाजार ने 2025 का समापन एक ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ किया है। देश का प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स Nifty 50 ने करीब 10.5% की बढ़त के साथ साल खत्म किया और इसके साथ ही उसने लगातार 10वां साल पॉजिटिव रिटर्न देने का दुर्लभ रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।

यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि 2025 ऐसा साल रहा, जिसमें वैश्विक और घरेलू स्तर पर कई ऐसे झटके आए, जिन्होंने आमतौर पर बाजारों की कमर तोड़ दी होती।

चुनौतियों से भरा रहा 2025

2025 में भारतीय बाजारों के सामने कई बड़े जोखिम मौजूद थे, जैसे:

  • भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ा तनाव

  • अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप से जुड़ी टैरिफ अनिश्चितता

  • रुपये का डॉलर के मुकाबले 91 के पार जाना

  • शेयरों के ऊंचे वैल्यूएशन और कमाई की रफ्तार में असंतुलन

  • विदेशी निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली

इन तमाम दबावों के बावजूद Nifty का हरे निशान में बंद होना यह दिखाता है कि भारतीय बाजार अब सिर्फ भावनाओं से नहीं, बल्कि मजबूत बुनियादी ढांचे से चल रहे हैं

आखिरी बार कब टूटा था यह सिलसिला?

Nifty ने आखिरी बार 2015 में निगेटिव रिटर्न दिया था, जब इंडेक्स करीब 4% गिरा था। इसके बाद:

  • हर एक कैलेंडर ईयर पॉजिटिव रहा

  • 2017 में सबसे ज्यादा 28.7% का रिटर्न मिला

  • कोविड जैसे बड़े संकट के दौरान भी बाजार ने मजबूती दिखाई

मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आमतौर पर हर 3–4 साल में एक नेगेटिव साल आना सामान्य होता है, लेकिन भारत ने इस धारणा को ही तोड़ दिया।

एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?

सुनील शर्मा, चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट, Ambit Global के मुताबिक:

“इतिहास में यह बेहद दुर्लभ है कि कोई बाजार लगातार 10 साल पॉजिटिव रिटर्न दे। यह भारत की स्ट्रक्चरल ग्रोथ, सरकार के रिफॉर्म एजेंडा, मजबूत डेमोग्राफी और SIP कल्चर को दर्शाता है।”

वहीं धीरज रेल्ली, MD & CEO, HDFC Securities कहते हैं:

“भारतीय बाजारों का यह दशक किसी सपने से कम नहीं है। इसने S&P 500 के 2009-2017 के बुल रन को भी पीछे छोड़ दिया, जहां 9 में से 8 साल पॉजिटिव थे।”

FII बिकवाली बनाम घरेलू निवेशक

2025 में एक तरफ जहां FII ने करीब 18 अरब डॉलर की बिकवाली की, वहीं दूसरी ओर घरेलू निवेशकों ने बाजार को संभाले रखा।

  • SIP के जरिए ₹3.2 लाख करोड़ का निवेश

  • म्यूचुअल फंड्स और रिटेल इन्वेस्टर्स का भरोसा

  • LIC, EPFO जैसे संस्थानों की मजबूत भागीदारी

यही वजह रही कि विदेशी निवेश निकलने के बावजूद बाजार बड़े पैमाने पर नहीं टूटा।

ब्रॉडर मार्केट क्यों कमजोर रहा?

जहां Nifty और Sensex ने स्थिरता दिखाई, वहीं:

  • मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में करेक्शन

  • IPO और प्रमोटर सेल्स से सप्लाई बढ़ी

  • निवेश का बड़ा हिस्सा लार्जकैप में सिमट गया

इससे यह साफ है कि बाजार में पैसा है, लेकिन वह अब ज्यादा चुनिंदा और सतर्क तरीके से लगाया जा रहा है।

Nifty का 10 साल का ऐतिहासिक प्रदर्शन

सालरिटर्न
20163%
201728.7%
20183.2%
201912%
202014.9%
202124.1%
20224.3%
202320%
20248.8%
202510.5%

यह डेटा बताता है कि भारत का बाजार धीमी लेकिन स्थिर ग्रोथ का उदाहरण बन चुका है।

2026 में निवेशकों के लिए क्या मायने?

अब सबसे बड़ा सवाल — क्या 2026 में भी यह रफ्तार जारी रहेगी?

पॉजिटिव फैक्टर्स:

  • मजबूत GDP ग्रोथ आउटलुक

  • इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस

  • घरेलू निवेश का बढ़ता आधार

  • डिजिटलीकरण और फाइनेंशियलाइजेशन

रिस्क फैक्टर्स:

  • ऊंचे वैल्यूएशन

  • ग्लोबल जियोपॉलिटिकल टेंशन

  • ब्याज दरों में अनिश्चितता

SamaypeNews निवेश सलाह

2026 में:

  • अंधाधुंध खरीद से बचें

  • क्वालिटी लार्जकैप और मजबूत बैलेंस शीट वाली कंपनियों पर फोकस रखें

  • SIP और लॉन्ग-टर्म अप्रोच जारी रखें

  • मिडकैप-स्मॉलकैप में चयनात्मक निवेश करें

SamaypeNews Verdict

Nifty का 10 साल तक लगातार पॉजिटिव रहना यह साबित करता है कि भारतीय शेयर बाजार अब मैच्योर हो चुका है। 2026 में मौके जरूर मिलेंगे, लेकिन वही निवेशक सफल होंगे जो अनुशासन, धैर्य और सही चयन के साथ आगे बढ़ेंगे।

बाजार ने भरोसा जीता है, अब बारी है समझदारी से निवेश करने की।

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