Sensex Crash: निवेशकों के ₹6 लाख करोड़ स्वाहा, बाजार क्यों टूटा?
भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 को निवेशकों को बड़ा झटका दिया। दो दिन की रिकवरी के बाद अचानक बाजार में तेज बिकवाली देखी गई और Sensex 770 अंकों की गिरावट के साथ 81,537 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 करीब 241 अंक टूटकर 25,048 के स्तर पर आ गया।
सिर्फ बड़ी कंपनियां ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई। BSE Midcap इंडेक्स 1.6% और Smallcap इंडेक्स 2.2% तक टूट गया।
इस एक दिन की गिरावट में निवेशकों की संपत्ति करीब ₹6 लाख करोड़ घट गई, जिससे कुल मार्केट कैप ₹458.5 लाख करोड़ से गिरकर ₹452 लाख करोड़ से नीचे आ गई।
तो आखिर भारतीय शेयर बाजार इतना क्यों गिरा? SamaypeNews आपको इसके पीछे की 5 बड़ी वजहें विस्तार से बता रहा है।
1. वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension)
दुनियाभर के निवेशकों के लिए इस समय सबसे बड़ी चिंता अमेरिका और यूरोप के बीच बढ़ता तनाव है। खासतौर पर Greenland को लेकर अमेरिका और NATO के बीच हुए कथित समझौते ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है।
हालांकि अमेरिका के राष्ट्रपति ने दावा किया कि उन्हें Greenland पर स्थायी पहुंच मिल गई है, लेकिन Greenland के प्रधानमंत्री ने खुद कहा कि उन्हें इस समझौते की पूरी जानकारी नहीं है।
ऐसी स्थिति में:
विदेशी निवेशक रिस्क लेने से बच रहे हैं
उभरते बाजारों (जैसे भारत) से पैसा निकाला जा रहा है
जिसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ रहा है।
2. रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड कमजोर
शुक्रवार को भारतीय रुपया 91.99 प्रति डॉलर तक गिर गया, जो अब तक का सबसे कमजोर स्तर है।
कमजोर रुपया:
आयात को महंगा बनाता है
महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा करता है
विदेशी निवेशकों को डरा देता है
पिछले साल रुपया करीब 5% टूटा था और इस साल अब तक इसमें 2% से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है। यह ट्रेंड शेयर बाजार के लिए बेहद नकारात्मक माना जाता है।
3. FII की जबरदस्त बिकवाली
भारतीय बाजार में इस समय सबसे बड़ा दबाव Foreign Institutional Investors (FII) की ओर से आ रहा है।
जनवरी 2026 में अब तक:
FIIs ने ₹36,500 करोड़ से ज्यादा के शेयर बेच दिए हैं
Geojit Investments के VK Vijayakumar के मुताबिक,
“जब तक अर्निंग ग्रोथ नहीं आती, FII हर उछाल पर बाजार बेचते रहेंगे।”
इसका मतलब यह है कि:
हर तेजी पर बिकवाली हो रही है
बाजार में भरोसा कमजोर है
4. बजट 2026 से पहले डर और अनिश्चितता
सरकार 1 फरवरी को Union Budget 2026 पेश करने वाली है। बाजार को उम्मीद है कि सरकार:
इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाए
रोजगार के लिए योजनाएं लाए
LTCG टैक्स में राहत दे
लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि:
सरकार के पास खर्च बढ़ाने की ज्यादा गुंजाइश नहीं है
फोकस फिस्कल कंट्रोल पर रह सकता है
ICICI Securities के पंकज पांडे के मुताबिक,
“कैपेक्स पहले से ही बहुत ऊंचे स्तर पर है, इसलिए बड़ी बढ़ोतरी की संभावना कम है।”
इस अनिश्चितता ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है।
5. कमजोर Q3 Earnings
कंपनियों के Q3 रिजल्ट उम्मीद से बेहतर नहीं रहे।
हालांकि बिक्री में कुछ सुधार दिखा, लेकिन:
मुनाफे में खास बढ़त नहीं
लेबर कोड का एक बार का असर
कॉस्ट प्रेशर बना हुआ
Mint की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियों की मुनाफा वृद्धि पिछले तीन साल में सबसे कमजोर रही है।
जब कमाई नहीं बढ़ती, तो शेयरों की कीमत भी टिक नहीं पाती।
SamaypeNews निष्कर्ष
Sensex की 750 अंकों की गिरावट सिर्फ एक दिन की घटना नहीं, बल्कि यह संकेत है कि बाजार:
ग्लोबल तनाव
कमजोर रुपया
विदेशी निवेशकों की बिकवाली
बजट की अनिश्चितता
और कमजोर कमाई
से दबाव में है।
हालांकि लंबे समय के निवेशकों के लिए ऐसे समय में मौके भी बनते हैं, लेकिन शॉर्ट टर्म में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।


