भारतीय शेयर बाजार में बीते कुछ समय से उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। खासतौर पर स्मॉल-कैप सेगमेंट में आई हालिया गिरावट ने निवेशकों को असमंजस में डाल दिया है। लेकिन इसी गिरावट के बीच एक बड़ा निवेश अवसर भी छिपा हो सकता है।
एक हालिया अध्ययन के अनुसार, स्मॉल-कैप शेयरों का बड़ा हिस्सा अपने रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे ट्रेड कर रहा है। Abakkus Mutual Fund की रिसर्च रिपोर्ट बताती है कि लगभग 50% स्मॉल-कैप स्टॉक्स अपने ऑल-टाइम हाई से करीब 40% नीचे हैं।
स्मॉल-कैप शेयरों में इतनी गिरावट क्यों?
मार्केट करेक्शन, ग्लोबल अनिश्चितता, ब्याज दरों की चिंता और मुनाफावसूली जैसे कारणों से स्मॉल-कैप शेयरों पर दबाव देखने को मिला है। साल 2026 की शुरुआत से अब तक Nifty Smallcap Index में 3% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि इसी अवधि में Nifty 50 करीब 1.4% फिसला है।
हालांकि, यह गिरावट केवल शॉर्ट-टर्म तस्वीर दिखाती है। लंबी अवधि के आंकड़े स्मॉल-कैप्स की मजबूती की कहानी कहते हैं।
लंबी अवधि में स्मॉल-कैप्स का दमदार प्रदर्शन
पिछले तीन और पांच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्मॉल-कैप इंडेक्स ने शानदार प्रदर्शन किया है।
3 साल में: लगभग 21% CAGR
5 साल में: करीब 22% CAGR
वहीं, इसी अवधि में निफ्टी 50 का रिटर्न लगभग 13% CAGR रहा। यह साफ संकेत देता है कि जो निवेशक धैर्य के साथ बाजार में बने रहे, उन्हें बेहतर रिटर्न मिला।
फंड हाउस की राय
Vaibhav Chugh, सीईओ, Abakkus Mutual Fund का मानना है कि मौजूदा स्थिति निवेशकों के लिए अहम हो सकती है।
उनके अनुसार,
“जब स्मॉल-कैप यूनिवर्स के करीब आधे स्टॉक्स अपने पीक से 40% नीचे हों, तब मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में निवेश का अवसर मिलता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि कई कंपनियां अब बेहतर रिस्क-रिवॉर्ड लेवल पर उपलब्ध हैं, जो अगले ग्रोथ साइकल में फायदा दे सकती हैं।
स्मॉल-कैप्स की बढ़ती अहमियत
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि भारत के इक्विटी मार्केट में स्मॉल-कैप शेयरों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है।
2019 में स्मॉल-कैप मार्केट कैप: ₹16 लाख करोड़
2025 में: ₹83 लाख करोड़
यानी करीब 5.3 गुना की बढ़ोतरी।
तुलना करें तो इसी अवधि में
लार्ज-कैप: 2.55 गुना
मिड-कैप: 3.89 गुना बढ़े
इससे साफ है कि उभरते बिजनेस और नए सेक्टर स्मॉल-कैप सेगमेंट को मजबूत बना रहे हैं।
किन सेक्टर्स में है ज्यादा संभावना?
Abakkus Mutual Fund के मुताबिक स्मॉल-कैप शेयर निवेशकों को कई Sunrise Sectors में एक्सपोजर देते हैं, जैसे:
एयरोस्पेस और डिफेंस
फार्मा और बायोटेक
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग
EV और बैटरी
AI आधारित सर्विसेज
रिन्यूएबल एनर्जी
मेडिकल डिवाइसेज
ट्रैवल और टूरिज्म
ऑटो कंपोनेंट्स
ये सेक्टर्स अभी बड़े इंडेक्स में पूरी तरह शामिल नहीं हैं, लेकिन भविष्य में भारत की ग्रोथ स्टोरी का अहम हिस्सा बन सकते हैं।
SIP निवेशकों के लिए क्या कहता है डेटा?
लंबी अवधि के SIP निवेशकों के लिए भी स्मॉल-कैप्स ने बेहतर नतीजे दिए हैं।
सितंबर 2016 से अगर किसी ने Nifty Smallcap 250 में SIP किया होता, तो उसे करीब 17% CAGR का रिटर्न मिला, जबकि निफ्टी 50 में यही रिटर्न लगभग 12% रहा।
यह साबित करता है कि बाजार की अस्थिरता के बावजूद नियमित और अनुशासित निवेश फायदेमंद हो सकता है।
निवेश से पहले किन बातों का रखें ध्यान?
हालांकि स्मॉल-कैप शेयरों में बड़ा अवसर दिखता है, लेकिन जोखिम भी कम नहीं है।
ज्यादा वोलैटिलिटी
कमजोर बैलेंस शीट वाली कंपनियां
लिक्विडिटी रिस्क
इसलिए निवेश करते समय फंडामेंटल एनालिसिस, सही एसेट एलोकेशन और लंबी अवधि का नजरिया जरूरी है।
निष्कर्ष
करीब 40% की गिरावट झेल रहे स्मॉल-कैप शेयर पहली नजर में डरावने लग सकते हैं, लेकिन इतिहास बताता है कि यही दौर भविष्य के बड़े रिटर्न की नींव रखता है। सही स्टॉक्स का चुनाव और धैर्य रखने वाले निवेशकों के लिए यह समय मौका साबित हो सकता है।


