Stock Market Crash: 6 दिनों में निवेशकों को ₹18.5 लाख करोड़ का झटका, Sensex 2,900 अंक टूटा, Nifty 3% फिसला

वैश्विक अनिश्चितता और US टैरिफ डर ने बढ़ाया बाजार का दबाव

Dev
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लगातार बिकवाली से भारतीय शेयर बाजार में मचा हड़कंपशेयर बाजार क्रैश

दिनों में बाजार का बड़ा नुकसान, निवेशकों में घबराहट

भारतीय शेयर बाजार में जारी भारी बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। बीते 6 कारोबारी सत्रों में ही निवेशकों को करीब ₹18.5 लाख करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा है। सोमवार को भी बाजार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई और दिन चढ़ने के साथ दबाव और गहराता चला गया।

BSE Sensex दिन के निचले स्तर पर 700 अंकों से ज्यादा फिसलकर 82,864 तक आ गया, जबकि NSE Nifty 50 करीब 150 अंक टूटकर 25,500 के अहम स्तर से नीचे चला गया। इस गिरावट के साथ ही निवेशकों की संपत्ति तेजी से घटती दिखी।

क्यों जारी है बाजार में बिकवाली?

विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा गिरावट के पीछे सिर्फ एक कारण नहीं बल्कि कई घरेलू और वैश्विक फैक्टर जिम्मेदार हैं।

1. अमेरिकी टैरिफ नीति को लेकर अनिश्चितता

निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता अमेरिका की संभावित टैरिफ पॉलिसी को लेकर है। अमेरिकी प्रशासन के रुख को लेकर स्पष्टता नहीं होने से:

  • ग्लोबल ट्रेड पर असर की आशंका

  • उभरते बाजारों से पूंजी निकासी

  • जोखिम भरी संपत्तियों से दूरी

जैसे हालात बन रहे हैं।

2. वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव

मिडिल ईस्ट और यूरोप से जुड़ी खबरों ने भी बाजार की धारणा कमजोर की है। भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से:

  • कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता

  • महंगाई का डर

  • ग्लोबल इकॉनमी पर दबाव

जैसे जोखिम बढ़ गए हैं।

3. India VIX में उछाल

बाजार की अस्थिरता को दर्शाने वाला India VIX तेजी से ऊपर गया है, जो यह संकेत देता है कि:

  • निवेशक आने वाले दिनों को लेकर आशंकित हैं

  • शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है

4. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली

Foreign Institutional Investors (FIIs) बीते कई सत्रों से भारतीय बाजार में बिकवाली कर रहे हैं। कमजोर ग्लोबल संकेतों के बीच:

  • डॉलर मजबूत हुआ

  • बॉन्ड यील्ड्स में उछाल

  • भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकला

आंकड़ों में समझें बाजार की गिरावट

  • Sensex: 6 दिनों में करीब 2,900 अंक की गिरावट

  • Nifty 50: लगभग 3% की कमजोरी

  • Market Cap Loss: ₹18.5 लाख करोड़ से ज्यादा

लगातार गिरावट ने शॉर्ट टर्म निवेशकों को खासा नुकसान पहुंचाया है।

किन सेक्टर्स पर सबसे ज्यादा मार?

IT और मेटल शेयर

  • वैश्विक मंदी की आशंका

  • डॉलर और कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव

बैंकिंग और फाइनेंशियल्स

  • मुनाफावसूली

  • ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता

ऑटो और FMCG

  • कंज्यूमर डिमांड पर दबाव

  • मार्जिन को लेकर चिंता

विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिलहाल बाजार कंसोलिडेशन फेज में है।

एक मार्केट एनालिस्ट के अनुसार:

“ग्लोबल पॉलिसी ओवरहैंग और US इकोनॉमिक डेटा को लेकर अनिश्चितता बाजार को दबाव में रखे हुए है। जब तक स्पष्ट संकेत नहीं मिलते, तब तक वोलैटिलिटी बनी रह सकती है।”

हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स यह भी मानते हैं कि:

  • भारत की GDP ग्रोथ मजबूत बनी हुई है

  • Q3 और Q4 के नतीजे बाजार को सपोर्ट दे सकते हैं

  • लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए यह मौका हो सकता है

क्या आगे और गिरावट संभव है?

शॉर्ट टर्म में बाजार में:

  • उतार-चढ़ाव

  • ग्लोबल संकेतों पर निर्भरता

  • US जॉब्स डेटा और फेड पॉलिसी

पर नजर बनी रहेगी।

हालांकि, जब तक:

  • वैश्विक अनिश्चितता कम नहीं होती

  • FII फ्लो स्थिर नहीं होते

तब तक बाजार में तेजी की वापसी सीमित रह सकती है।

निवेशकों के लिए क्या रणनीति हो?

घबराकर बिकवाली से बचें

मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ध्यान दें

SIP और लॉन्ग टर्म निवेश जारी रखें

ज्यादा लीवरेज से बचें

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे समय में धैर्य और अनुशासन ही सबसे बड़ा हथियार है।

SamayPenews निष्कर्ष

भारतीय शेयर बाजार में आई मौजूदा गिरावट ने निवेशकों को बड़ा झटका जरूर दिया है, लेकिन यह पूरी तरह से वैश्विक अनिश्चितताओं से प्रेरित है। भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है और लंबी अवधि में बाजार फिर से संभल सकता है।

फिलहाल निवेशकों को सतर्क रहकर, सोच-समझकर फैसले लेने की जरूरत है।

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