Thaai Kizhavi Movie Review: राधिका सरथकुमार की दमदार मौजूदगी से सजी हंसी और भावना से भरपूर ग्रामीण ड्रामा

हंसी के बीच छिपा मां और परिवार का असली अर्थ

Dev
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Thaai Kizhavi में पवुनुथायी के किरदार में राधिका सरथकुमार का प्रभावशाली अभिनयThaai Kizhavi Review

तमिल सिनेमा में बुजुर्ग महिलाओं को अक्सर दो चरम सीमाओं में दिखाया जाता है—या तो त्याग और सहनशीलता की मूर्ति मां, जो चुपचाप सब सहती रहती है, या फिर चालाक सास, जो परिवार में तनाव पैदा करती है। इन दोनों छवियों में एक बात समान है: वे महिलाओं को केवल कहानी का एक औजार बनाकर रख देती हैं।

लेकिन निर्देशक Sivakumar Murugesan की डेब्यू फिल्म Thaai Kizhavi इस परंपरा को चुनौती देती है। यह फिल्म शुरुआत में ही इन रूढ़ छवियों को पहचानती है और फिर उनसे अलग रास्ता चुनती है।

फिल्म में Radikaa Sarathkumar मुख्य भूमिका में हैं, और उनका अभिनय इस कहानी की सबसे बड़ी ताकत है।

कहानी: एक बिस्तर पर पड़ी महिला, लेकिन सबसे मजबूत

फिल्म की नायिका पवुनुथायी (राधिका सरथकुमार) सत्तर पार की महिला हैं, जो लकवाग्रस्त होकर बिस्तर पर हैं। लेकिन शारीरिक रूप से कमजोर दिखने के बावजूद वह घर की सबसे ताकतवर शख्सियत हैं।

वह गांव की एक सख्त और आत्मनिर्भर सूदखोर रही हैं, जिसने अपने नियमों पर जिंदगी जी है। अपने तीन बेटों से उनका रिश्ता लगभग टूट चुका है। गांव के लोग उनसे डरते भी हैं और सम्मान भी करते हैं।

कहानी में मोड़ तब आता है जब उनकी तबीयत गंभीर हो जाती है। यह खबर सुनकर उनके बेटे अचानक लौट आते हैं—ममता के कारण नहीं, बल्कि इसलिए कि अफवाह है कि मां के पास सोने का बड़ा खजाना छिपा है।

यहीं से फिल्म पारिवारिक ड्रामा और डार्क कॉमेडी का रोचक मिश्रण बन जाती है।

हंसी में लिपटा कड़वा सच

फिल्म की सबसे खास बात यह है कि यह गंभीर विषय को हल्के अंदाज में पेश करती है। बेटों की लालच भरी बातचीत, गांव की राजनीति और रिश्तों की खटास को निर्देशक ने व्यंग्यात्मक ढंग से दिखाया है।

कई दृश्य ऐसे हैं जहां आप हंसते हैं, लेकिन तुरंत बाद सोचने पर मजबूर भी हो जाते हैं। यह हंसी बनावटी नहीं, बल्कि परिस्थितियों से उपजी है।

फिल्म यह सवाल उठाती है—क्या हम अपने माता-पिता को उनके जीवित रहते हुए महत्व देते हैं, या सिर्फ उनकी संपत्ति के कारण उन्हें याद करते हैं?

राधिका सरथकुमार का प्रभाव

राधिका सरथकुमार का अभिनय फिल्म का दिल है। बिस्तर पर लेटी हुई, सीमित शारीरिक गतिविधि के बावजूद वह अपनी आंखों और आवाज के जरिए पूरी कहानी को नियंत्रित करती हैं।

उनका किरदार न तो दयनीय है और न ही खलनायिका। वह जटिल है—कभी कठोर, कभी संवेदनशील, कभी व्यंग्यात्मक। यही जटिलता फिल्म को वास्तविक बनाती है।

उनकी मौजूदगी हर दृश्य में एक अलग ऊर्जा लेकर आती है।

ग्रामीण परिवेश की सादगी

फिल्म का ग्रामीण बैकड्रॉप कहानी को प्रामाणिकता देता है। गांव का माहौल, घर की बनावट, स्थानीय बोली—सब कुछ वास्तविक लगता है।

निर्देशक ने ग्रामीण जीवन को ग्लैमराइज करने के बजाय उसकी सादगी और कठोरता दोनों को संतुलित ढंग से दिखाया है।

सिनेमैटोग्राफी साधारण लेकिन प्रभावी है। यह कहानी से ध्यान नहीं हटाती, बल्कि उसे मजबूती देती है।

सामाजिक संदेश

Thaai Kizhavi केवल मनोरंजन नहीं है। यह एक सामाजिक टिप्पणी भी है।

  • बुजुर्ग महिलाओं की पहचान

  • संपत्ति और रिश्तों का टकराव

  • परिवार में जिम्मेदारी का सवाल

  • आत्मनिर्भरता और सम्मान

फिल्म यह दर्शाती है कि जिन महिलाओं ने परिवार की नींव रखी, उन्हें अक्सर अंत में अकेला छोड़ दिया जाता है।

फिल्म की कमियां

फिल्म की गति कुछ जगह धीमी महसूस हो सकती है, खासकर उन दर्शकों के लिए जो तेज रफ्तार कहानी पसंद करते हैं।

कुछ उपकथाएं थोड़ी लंबी लगती हैं, लेकिन वे मुख्य विषय को मजबूत करने का काम करती हैं।

क्यों देखें Thaai Kizhavi?

  1. बुजुर्ग महिला का सशक्त चित्रण

  2. हंसी और भावना का संतुलन

  3. मजबूत अभिनय

  4. पारिवारिक रिश्तों पर गहरी टिप्पणी

यह फिल्म उन दर्शकों के लिए है जो पारिवारिक ड्रामा में वास्तविकता और व्यंग्य दोनों देखना चाहते हैं।

निष्कर्ष

Thaai Kizhavi एक ऐसी फिल्म है जो हंसाते-हंसाते दिल को छू जाती है। निर्देशक शिवकुमार मुरुगेशन ने अपने पहले ही प्रयास में एक अलग पहचान बनाई है।

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