United States के बॉन्ड में भारी गिरावट: तेल की कीमतों में उछाल से बढ़ी महंगाई की चिंता

तेल की कीमतों में तेजी और जियोपॉलिटिकल तनाव से वैश्विक बाजारों में नई हलचल।

Dev
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तेल की कीमतों में उछाल के बाद अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड में गिरावट से निवेशकों की चिंता बढ़ी।ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट ग्राफ जिसमें अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी दिखाई दे रही है।

तेल की कीमतों के उछाल से अमेरिकी बॉन्ड मार्केट में हलचल

वैश्विक वित्तीय बाजारों में एक बार फिर हलचल देखने को मिल रही है। तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण United States के सरकारी बॉन्ड यानी US Treasury bonds में लगातार चौथे दिन गिरावट दर्ज की गई।

निवेशकों को डर है कि ऊर्जा की बढ़ती कीमतें महंगाई को फिर से बढ़ा सकती हैं, जिससे Federal Reserve की ब्याज दरों को कम करने की योजना प्रभावित हो सकती है।

10-साल की ट्रेजरी यील्ड तीन हफ्ते के उच्च स्तर पर

बॉन्ड बाजार में बिकवाली के चलते 10-साल की ट्रेजरी यील्ड में तेज बढ़ोतरी देखी गई।

  • 10-साल की यील्ड एशियाई ट्रेडिंग के दौरान 4.131% तक पहुंच गई, जो तीन हफ्तों का उच्चतम स्तर है।

  • दिन के अंत तक यह लगभग 3 बेसिस पॉइंट ऊपर रही।

  • इस सप्ताह कुल मिलाकर इसमें करीब 15 बेसिस पॉइंट की वृद्धि देखने को मिल रही है, जो अप्रैल 2025 के बाद सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़ोतरी हो सकती है।

इसी तरह 2-साल की ट्रेजरी यील्ड भी लगभग 3.566% तक पहुंच गई, जो इस सप्ताह अब तक करीब 18 बेसिस पॉइंट बढ़ चुकी है।

बाजार के नियम के अनुसार बॉन्ड की कीमत और यील्ड एक-दूसरे के विपरीत दिशा में चलती हैं, यानी जब बॉन्ड बिकते हैं तो उनकी यील्ड बढ़ जाती है।

मिडिल ईस्ट तनाव का बाजार पर असर

बॉन्ड बाजार में यह हलचल मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध तनाव के कारण देखने को मिल रही है।

Iran और Israel के बीच चल रहा संघर्ष अब छठे दिन में प्रवेश कर चुका है। इस दौरान ईरान द्वारा दागी गई मिसाइलों के कारण इजराइल में लाखों लोगों को बंकरों में शरण लेनी पड़ी।

इस संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है, खासकर जब प्रमुख तेल मार्ग Strait of Hormuz से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है।

तेल की कीमतें पहुंचीं कई महीनों के उच्च स्तर पर

मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने के साथ ही वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में भी तेजी आई है।

  • बेंचमार्क अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत 78.09 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।

  • यह जून के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।

  • बाद में यह लगभग 76.33 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था, जो दिन में करीब 2.3% की बढ़ोतरी दर्शाता है।

ऊर्जा की कीमतों में तेजी का सीधा असर महंगाई पर पड़ता है, क्योंकि परिवहन, उत्पादन और अन्य कई सेक्टरों की लागत बढ़ जाती है।

महंगाई को लेकर बढ़ी चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें जल्द कम नहीं हुईं, तो महंगाई दोबारा बढ़ सकती है।

Jose Torres, जो Interactive Brokers में वरिष्ठ अर्थशास्त्री हैं, ने कहा कि अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) फिर से 2% से ऊपर जा सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि महंगाई में फिर से तेजी आती है, तो इससे बॉन्ड और शेयर बाजार दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

फेडरल रिजर्व की नीति पर असर

महंगाई बढ़ने की आशंका के कारण निवेशकों ने इस साल ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद को भी कम कर दिया है।

डेटा के अनुसार:

  • जून में ब्याज दर कटौती की संभावना अब लगभग 30% रह गई है।

  • एक सप्ताह पहले यह संभावना 40% से अधिक थी।

यह आंकड़े CME FedWatch Tool के अनुमान पर आधारित हैं।

वहीं फेड फंड फ्यूचर्स के अनुसार साल के अंत तक कुल मिलाकर लगभग 40 बेसिस पॉइंट की दर कटौती की संभावना जताई जा रही है।

मजबूत अमेरिकी आर्थिक आंकड़े भी बने कारण

बाजार की धारणा बदलने के पीछे एक और कारण हाल ही में जारी अमेरिकी आर्थिक आंकड़े भी हैं।

ताजा डेटा के अनुसार फरवरी में अमेरिका के सेवा क्षेत्र की गतिविधियां साढ़े तीन साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं।

इससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत मांग के साथ आगे बढ़ रही है।

हालांकि मजबूत आर्थिक डेटा का मतलब यह भी हो सकता है कि महंगाई का दबाव बना रहे, जिससे फेडरल रिजर्व को ब्याज दरों में कटौती करने में सावधानी बरतनी पड़ सकती है।

निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब?

तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, युद्ध तनाव और बदलती मौद्रिक नीति की उम्मीदों ने वैश्विक निवेशकों के लिए अनिश्चितता बढ़ा दी है।

विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले हफ्तों में बाजार की दिशा मुख्य रूप से तीन चीजों पर निर्भर करेगी:

  1. मिडिल ईस्ट का भू-राजनीतिक माहौल

  2. तेल की कीमतों का ट्रेंड

  3. अमेरिकी महंगाई और रोजगार के आंकड़े

यदि तेल की कीमतें लगातार ऊंची रहती हैं, तो इससे महंगाई फिर से बढ़ सकती है और वैश्विक वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

निष्कर्ष

तेल की कीमतों में उछाल और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ा दी है।

United States के बॉन्ड बाजार में जारी गिरावट इस बात का संकेत है कि निवेशक अब महंगाई और ब्याज दरों के भविष्य को लेकर ज्यादा सतर्क हो गए हैं।

अब पूरी दुनिया की नजर Federal Reserve की अगली नीति बैठक और आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर टिकी है, जो बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।

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