नई दिल्ली: शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद अक्सर कंपनियों का सबसे बड़ा लक्ष्य अपने शेयर की कीमत बढ़ाना माना जाता है। हालांकि, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (MD & CEO) आशीष चौहान का मानना है कि किसी भी कंपनी की वास्तविक सफलता उसकी शेयर कीमत नहीं, बल्कि उसका मजबूत बिजनेस मॉडल, लगातार बढ़ता मुनाफा और दीर्घकालिक मूल्य निर्माण होता है।
उन्होंने शुक्रवार को आयोजित 9वें JITO Incubation & Innovation Foundation (JIIF) Day कार्यक्रम में कहा कि उद्यमियों को बाजार के उतार-चढ़ाव या शेयर प्राइस की चिंता करने के बजाय अपने व्यवसाय को मजबूत बनाने पर ध्यान देना चाहिए।
शेयर कीमत नहीं, बिजनेस की मजबूती है असली पहचान
आशीष चौहान ने अपने संबोधन में कहा कि किसी कंपनी का मार्केट वैल्यूएशन उसकी वास्तविक व्यावसायिक क्षमता को दर्शाना चाहिए। यदि कंपनी का कारोबार बढ़ता है, मुनाफा लगातार बेहतर होता है और ग्राहक आधार मजबूत बनता है, तो शेयर की कीमत भी स्वाभाविक रूप से बढ़ती है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केवल शेयर की कीमत बढ़ाने की कोशिश करना टिकाऊ रणनीति नहीं हो सकती। बाजार अंततः उसी कंपनी को महत्व देता है जिसकी बुनियाद मजबूत हो।
कंपनियों को लॉन्ग टर्म सोच अपनानी होगी
उन्होंने कहा कि कई बार कंपनियां अल्पकालिक लाभ या बाजार में तेजी का फायदा उठाने की कोशिश करती हैं, लेकिन इससे स्थायी सफलता नहीं मिलती।
उनके अनुसार सफल कंपनियां वही होती हैं जो लगातार अपने उत्पादों, सेवाओं और ग्राहकों पर काम करती हैं। ऐसी कंपनियों को समय के साथ निवेशकों का भरोसा मिलता है और उनका बाजार मूल्य भी बढ़ता है।
शेयर बाजार में लिस्टिंग से मिलते हैं कई फायदे
आशीष चौहान ने कहा कि शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद कंपनियों के लिए पूंजी जुटाने के नए अवसर खुल जाते हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई कंपनी सालाना केवल 2 करोड़ रुपये का मुनाफा भी कमाती है तो सूचीबद्ध होने के बाद उसका मार्केट कैपिटलाइजेशन 40 से 50 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
इससे प्रमोटरों को विस्तार करने, नए निवेशकों को जोड़ने और बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम करने का अवसर मिलता है।
लिस्टेड कंपनी का शेयर बन जाता है नई ताकत
उन्होंने कहा कि किसी सूचीबद्ध कंपनी के पास उसका खुद का “करेंसी” यानी शेयर होता है।
कंपनी अपने शेयरों का उपयोग करके दूसरी कंपनियों का अधिग्रहण कर सकती है, रणनीतिक साझेदार जोड़ सकती है और कर्मचारियों को ESOP (Employee Stock Option Plan) के माध्यम से आकर्षित कर सकती है।
उन्होंने इस संदर्भ में इन्फोसिस का उदाहरण दिया, जहां शुरुआती दौर में एन.आर. नारायण मूर्ति और नंदन नीलेकणी ने ESOP मॉडल अपनाकर बेहतरीन प्रतिभाओं को कंपनी से जोड़ा।
इनोवेशन केवल नई तकनीक नहीं
आशीष चौहान ने कहा कि इनोवेशन का मतलब केवल नई तकनीक या बड़े आविष्कार करना नहीं होता।
उन्होंने कहा कि यदि कोई उद्यमी रोजमर्रा के काम को पहले से बेहतर, तेज या अधिक प्रभावी तरीके से करता है तो वह भी इनोवेशन की श्रेणी में आता है।
छोटे-छोटे सुधार भी लंबे समय में किसी कंपनी को प्रतिस्पर्धियों से आगे ले जा सकते हैं।
सफल बिजनेस के लिए धैर्य जरूरी
उन्होंने स्टार्टअप और नए उद्यमियों को संदेश देते हुए कहा कि बिजनेस में सफलता रातोंरात नहीं मिलती।
कई सफल कंपनियों ने वर्षों तक संघर्ष किया, चुनौतियों का सामना किया और लगातार मेहनत के बाद सफलता हासिल की।
उन्होंने कहा कि कठिन समय में धैर्य बनाए रखना ही एक सफल उद्यमी की सबसे बड़ी पहचान होती है।
लिस्टिंग से पहले और बाद की जिम्मेदारियां
आशीष चौहान ने कहा कि बहुत से लोग मानते हैं कि स्टॉक एक्सचेंज में कंपनी को सूचीबद्ध कराना बेहद कठिन प्रक्रिया है, जबकि वास्तविक चुनौती लिस्टिंग के बाद शुरू होती है।
उन्होंने कहा कि सूचीबद्ध होने के बाद कंपनियों को पारदर्शिता, कॉरपोरेट गवर्नेंस और नियामकीय नियमों का पूरी तरह पालन करना चाहिए।
निवेशकों का विश्वास बनाए रखने के लिए समय-समय पर सही जानकारी उपलब्ध कराना भी बेहद जरूरी है।
मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों को मिलता है बाजार का भरोसा
उन्होंने कहा कि बाजार हमेशा उन कंपनियों को पुरस्कृत करता है जो लगातार अच्छा प्रदर्शन करती हैं।
यदि कंपनी का कारोबार बढ़ता है, मुनाफा सुधरता है और भविष्य की रणनीति स्पष्ट होती है तो निवेशक स्वतः आकर्षित होते हैं।
उन्होंने उद्यमियों को सलाह दी कि वे शेयर की दैनिक कीमत पर नजर रखने के बजाय कंपनी की आय, ग्राहक संतुष्टि और संचालन क्षमता को बेहतर बनाने पर ध्यान दें।
निवेशकों के लिए भी अहम संदेश
आशीष चौहान के बयान का संदेश केवल कंपनियों के लिए ही नहीं बल्कि निवेशकों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
निवेशकों को भी केवल तेजी से बढ़ते शेयरों के पीछे भागने के बजाय उन कंपनियों में निवेश करना चाहिए जिनके फंडामेंटल मजबूत हों, जिनका बिजनेस मॉडल टिकाऊ हो और जिनके पास भविष्य की स्पष्ट विकास रणनीति हो।
लंबी अवधि में ऐसे निवेश बेहतर रिटर्न देने की संभावना रखते हैं।
निष्कर्ष
NSE प्रमुख आशीष चौहान का यह संदेश ऐसे समय आया है जब भारतीय शेयर बाजार में बड़ी संख्या में नई कंपनियां लिस्ट हो रही हैं और निवेशकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी कंपनी की वास्तविक सफलता उसके शेयर की कीमत से नहीं, बल्कि उसके मजबूत बिजनेस मॉडल, लगातार बढ़ते मुनाफे, पारदर्शी कार्यप्रणाली और नवाचार से तय होती है।
ऐसे में यदि कंपनियां केवल बाजार की चाल देखने के बजाय अपने कारोबार को मजबूत बनाने पर ध्यान दें, तो उन्हें न केवल निवेशकों का भरोसा मिलेगा बल्कि लंबे समय में बेहतर वैल्यूएशन और स्थायी विकास भी हासिल होगा। यही किसी भी सफल व्यवसाय की सबसे बड़ी पहचान होती है।


