दुनियाभर के वित्तीय बाजारों में सोमवार को उतार-चढ़ाव का माहौल देखने को मिला। एक ओर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े टेक्नोलॉजी शेयरों में भारी बिकवाली ने एशियाई बाजारों को झकझोर दिया, वहीं दूसरी ओर ईरान और इजरायल के बीच बढ़े तनाव में नरमी के संकेतों ने निवेशकों को कुछ राहत पहुंचाई। पिछले कुछ महीनों से AI कंपनियों और चिप निर्माताओं के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही थी, लेकिन अब निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार लंबे समय से बिना किसी बड़े सुधार (Correction) के लगातार ऊपर जा रहा था। ऐसे में मौजूदा गिरावट को कई निवेशक एक स्वाभाविक और स्वस्थ सुधार के रूप में देख रहे हैं।
एशियाई बाजारों में सबसे बड़ी गिरावट
सोमवार को एशियाई शेयर बाजारों में भारी दबाव देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का KOSPI इंडेक्स, जो इस वर्ष दुनिया के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले बाजारों में शामिल रहा है, लगभग 8% से अधिक टूट गया। इस गिरावट का मुख्य कारण सेमीकंडक्टर और AI चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में तेज बिकवाली रही।
जापान का निक्केई इंडेक्स भी लगभग 4% तक लुढ़क गया। निवेशकों को डर है कि AI सेक्टर में आई हालिया तेजी शायद जरूरत से ज्यादा हो गई थी और अब बाजार खुद को संतुलित करने की कोशिश कर रहा है।
वॉल स्ट्रीट में भी पिछले सप्ताह तेज गिरावट दर्ज की गई थी। विशेष रूप से Nasdaq इंडेक्स में 4% से अधिक की गिरावट ने वैश्विक निवेशकों को चिंतित कर दिया। हालांकि सोमवार को अमेरिकी फ्यूचर्स में सुधार के संकेत देखने को मिले और Nasdaq Futures करीब 1% से अधिक बढ़त में कारोबार करते दिखाई दिए।
क्यों टूट रहे हैं AI शेयर?
पिछले डेढ़ साल में AI तकनीक ने निवेशकों का ध्यान पूरी तरह अपनी ओर खींचा है। बड़ी टेक कंपनियों और चिप निर्माताओं के शेयरों में रिकॉर्ड तेजी देखने को मिली थी। लेकिन अब कई विश्लेषकों का मानना है कि इन कंपनियों के वैल्यूएशन वास्तविक कमाई की तुलना में काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं।
इसके अलावा अमेरिका के मजबूत रोजगार आंकड़ों ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। मजबूत जॉब मार्केट का मतलब है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अभी भी गर्म बनी हुई है, जिससे महंगाई दबाव में रह सकती है। यही कारण है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कमजोर पड़ रही हैं।
जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तब टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों पर दबाव बढ़ जाता है क्योंकि उनके भविष्य के मुनाफे का वर्तमान मूल्य कम हो जाता है। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल टेक शेयरों से दूरी बनाते नजर आ रहे हैं।
ईरान-इजरायल तनाव में नरमी से राहत
मध्य पूर्व में हाल के दिनों में बढ़ते तनाव ने भी वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ा दी थी। सप्ताहांत में हुए हवाई हमलों के बाद निवेशकों को डर था कि क्षेत्र में संघर्ष और बढ़ सकता है, जिससे तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
हालांकि ईरान की ओर से सैन्य अभियान समाप्त करने के संकेत मिलने के बाद बाजारों में राहत का माहौल बना। इसका असर तेल की कीमतों पर भी देखने को मिला। दिन की शुरुआत में ब्रेंट क्रूड ऑयल लगभग 5% तक उछल गया था, लेकिन बाद में बढ़त घटकर करीब 1.5% रह गई।
तेल की कीमतों में स्थिरता आने से यूरोपीय बाजारों को भी कुछ सहारा मिला। जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन के प्रमुख शेयर सूचकांकों ने शुरुआती नुकसान की भरपाई करते हुए अपेक्षाकृत स्थिर कारोबार किया।
फेडरल रिजर्व की नीति पर टिकी निगाहें
निवेशकों की नजर अब इस सप्ताह आने वाले अमेरिकी महंगाई आंकड़ों पर है। बुधवार को जारी होने वाले उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) डेटा से यह तय होगा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व आगे ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाता है।
यदि महंगाई उम्मीद से ज्यादा रहती है तो फेड ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है। इसका असर शेयर बाजार, बॉन्ड यील्ड और डॉलर पर देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल बाजार का मूड “रेट कट” से बदलकर “उच्च ब्याज दरों की लंबी अवधि” की ओर जाता दिखाई दे रहा है। यही बदलाव निवेशकों को सतर्क बना रहा है।
SpaceX IPO और नई टेक लिस्टिंग्स पर नजर
बाजार में इस सप्ताह एक और बड़ी घटना पर नजर बनी हुई है। दुनिया की चर्चित अंतरिक्ष कंपनी SpaceX की संभावित लिस्टिंग को लेकर निवेशकों में उत्साह है। माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में AI क्षेत्र की कई बड़ी कंपनियां भी बाजार में उतर सकती हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि SpaceX, Anthropic और OpenAI जैसी कंपनियां बड़े पैमाने पर पूंजी जुटाती हैं तो निवेशकों का पैसा अन्य परिसंपत्तियों से निकलकर इन नई लिस्टिंग्स की ओर जा सकता है। इससे मौजूदा शेयर बाजारों में अस्थायी दबाव देखने को मिल सकता है।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार भी दबाव में
AI और टेक शेयरों की कमजोरी का असर क्रिप्टो बाजार पर भी दिखाई दिया। बिटकॉइन ने पिछले सप्ताह 2022 में FTX संकट के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट दर्ज की। हालांकि सोमवार को इसमें मामूली सुधार देखने को मिला और इसकी कीमत 63,000 डॉलर के ऊपर बनी रही।
क्रिप्टो निवेशक भी अब अमेरिकी ब्याज दरों और वैश्विक जोखिम भावना पर नजर बनाए हुए हैं।
निष्कर्ष
वैश्विक वित्तीय बाजार इस समय दो बड़े कारकों के बीच फंसे हुए हैं। एक तरफ AI सेक्टर में आई तेज गिरावट और ब्याज दरों को लेकर बढ़ती चिंताएं हैं, जबकि दूसरी तरफ ईरान-इजरायल तनाव कम होने के संकेत निवेशकों को राहत दे रहे हैं। आने वाले दिनों में अमेरिकी महंगाई आंकड़े, फेडरल रिजर्व की नीति और बड़ी टेक कंपनियों की गतिविधियां तय करेंगी कि बाजार की अगली दिशा क्या होगी।
फिलहाल निवेशकों के लिए सतर्क रहने और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाने का समय है, क्योंकि वैश्विक बाजारों में अस्थिरता अभी कुछ समय तक बनी रह सकती है।


