भारतीय शेयर बाजार में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए पिछले कुछ वर्षों में भू-राजनीतिक तनाव, युद्ध और वैश्विक आर्थिक घटनाएं चिंता का विषय बनी रही हैं। लेकिन First Global की संस्थापक और चेयरपर्सन देविना मेहरा का मानना है कि भारतीय बाजार की दिशा तय करने में अब केवल अंतरराष्ट्रीय घटनाओं की भूमिका नहीं होगी। उनका कहना है कि आने वाले समय में बाजार की असली चाल कंपनियों की कमाई, लिक्विडिटी और निवेशकों की रणनीति से तय होगी।
ET Now के साथ बातचीत में देविना मेहरा ने कहा कि संभावित ईरान-अमेरिका समझौता निश्चित रूप से वैश्विक बाजारों के ऊपर बने दबाव को कम कर सकता है, लेकिन भारतीय शेयर बाजार की तेजी या गिरावट का मुख्य कारण यह नहीं होगा।
भू-राजनीतिक समझौतों पर निर्भर नहीं रहेगा बाजार
देविना मेहरा ने कहा कि यदि ईरान और अमेरिका के बीच कोई सकारात्मक समझौता होता है तो इससे वैश्विक निवेशकों का भरोसा मजबूत हो सकता है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय बाजार को ऊपर ले जाने वाली असली ताकत घरेलू कारक होंगे।
उन्होंने कहा कि मार्च में ही उन्होंने संकेत दिया था कि भारतीय बाजार अपने निचले स्तर के आसपास दिखाई दे रहा है। यह बताना मुश्किल था कि बाजार दो सप्ताह में ऊपर जाएगा या दो महीने में, लेकिन लगभग सभी संकेतक सकारात्मक थे।
उनके अनुसार आज की स्थिति पिछले वर्ष से बिल्कुल अलग है। पहले ऐसा समय था जब प्रमुख इंडेक्स ऊपर थे लेकिन अधिकांश शेयर गिरावट में थे। अब तस्वीर बदल चुकी है और बड़ी संख्या में कंपनियों के शेयर इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
कमाई और लिक्विडिटी होगी सबसे बड़ी ताकत
देविना मेहरा का मानना है कि बाजार में कॉर्पोरेट अर्निंग यानी कंपनियों की कमाई सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि कंपनियों का प्रदर्शन मजबूत रहेगा और बाजार में पर्याप्त लिक्विडिटी बनी रहेगी तो भारतीय बाजार आगे भी अच्छा प्रदर्शन कर सकता है।
उन्होंने निवेशकों को सलाह देते हुए कहा कि पूरी पूंजी इक्विटी में लगाने के बजाय अपने जोखिम प्रोफाइल के अनुसार निवेश करना चाहिए। लेकिन यदि आपने पहले से इक्विटी का उचित आवंटन किया हुआ है तो घबराकर बाजार से बाहर निकलना सही रणनीति नहीं होगी।
भू-राजनीतिक घटनाओं पर जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया न दें
देविना मेहरा ने कहा कि निवेशकों की सबसे बड़ी गलती यह होती है कि वे हर वैश्विक घटना पर भावनात्मक प्रतिक्रिया देने लगते हैं।
उन्होंने बताया कि पिछले 125 वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि दो विश्व युद्ध, खाड़ी युद्ध, 9/11 जैसे बड़े घटनाक्रमों के बावजूद बाजारों ने अंततः वापसी की है। रूस-यूक्रेन संघर्ष के दौरान भी बाजारों ने समय के साथ संतुलन बना लिया।
हालांकि भारत जैसे देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों का महत्व जरूर है क्योंकि इसका असर कंपनियों की कमाई और महंगाई पर पड़ता है। लेकिन केवल भू-राजनीतिक घटनाओं के आधार पर निवेश संबंधी बड़े फैसले लेना समझदारी नहीं है।
भावनात्मक निवेश सबसे खतरनाक
देविना मेहरा ने निवेशकों के व्यवहार पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अक्सर निवेशक बाजार की तेजी में सबसे ज्यादा पैसा लगाते हैं और गिरावट के समय घबराकर बाहर निकल जाते हैं।
उनके मुताबिक हाल के महीनों में एसआईपी खातों की संख्या और निवेश प्रवाह में गिरावट देखने को मिली है। इसका कारण निवेशकों की घबराहट है।
उन्होंने कहा कि जब आपका मन आपको बाजार छोड़ने के लिए कहे, उसी समय धैर्य बनाए रखना सबसे बड़ी ताकत होती है। सफल निवेशक वही होते हैं जो कठिन समय में भी अपनी रणनीति पर टिके रहते हैं।
नकारात्मक माहौल में अवसर छिपे होते हैं
देविना मेहरा ने कहा कि निवेशकों का मूड अक्सर भविष्य के रिटर्न का संकेत देता है। जब हर कोई अत्यधिक उत्साहित होता है तो सावधान रहने की जरूरत होती है और जब हर तरफ डर का माहौल हो तो अच्छे अवसर पैदा होते हैं।
उन्होंने बताया कि डेढ़ साल पहले हर कोई भारत की विकास कहानी की चर्चा कर रहा था, जबकि अब लोग केवल जोखिमों की बात कर रहे हैं। इतिहास बताता है कि अत्यधिक नकारात्मक भावना के बाद बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
वैश्विक विविधीकरण जरूरी
उन्होंने निवेशकों को केवल भारतीय बाजार या अमेरिकी बाजार तक सीमित नहीं रहने की सलाह दी।
देविना मेहरा के अनुसार कई निवेशक मानते हैं कि अमेरिका के कुछ बड़े टेक शेयर खरीद लेना ही वैश्विक निवेश है, जबकि वास्तविक विविधीकरण इससे कहीं व्यापक होता है।
उन्होंने बताया कि उनकी निवेश रणनीति में अमेरिका का वेटेज पहले ही कम किया जा चुका है और यूरोप, चीन, मलेशिया तथा मेक्सिको जैसे बाजारों में अवसर तलाशे जा रहे हैं।
आसान रास्तों से बचें
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि वैश्विक निवेश में कोई आसान फॉर्मूला नहीं होता। कई निवेश योजनाएं पुराने विजेताओं के पीछे भागती रहती हैं जबकि बाजार की नेतृत्व क्षमता समय-समय पर बदलती रहती है।
उनके मुताबिक निवेशकों को विशेषज्ञता, रिसर्च और अनुशासन के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
निष्कर्ष
देविना मेहरा का संदेश बिल्कुल स्पष्ट है। भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में कंपनियों की कमाई, लिक्विडिटी और निवेशकों का धैर्य सबसे अहम भूमिका निभाएगा। भू-राजनीतिक घटनाएं अस्थायी उतार-चढ़ाव जरूर ला सकती हैं, लेकिन लंबी अवधि के निवेशक यदि भावनाओं से दूर रहकर रणनीतिक तरीके से निवेश करें तो बेहतर परिणाम हासिल कर सकते हैं।
ऐसे समय में जब बाजार हर दिन नई सुर्खियां बना रहा है, निवेशकों के लिए सबसे जरूरी है कि वे शोर से दूर रहकर अपने वित्तीय लक्ष्यों और अनुशासित निवेश रणनीति पर ध्यान केंद्रित करें।
