European Stocks में बड़ी गिरावट: तेल की कीमतों और बढ़ती बॉन्ड यील्ड ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता

तेल की कीमतों में उछाल और बढ़ती महंगाई की आशंका से यूरोपीय बाजारों में भारी बिकवाली।

Dev
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यूरोप के शेयर बाजारों में मार्च के बाद सबसे बड़ी गिरावट, निवेशकों में बढ़ी महंगाई और तेल संकट की चिंता।European stock market गिरावट दिखाता ग्राफ और बढ़ती तेल कीमतों का प्रतीकात्मक चित्र


वैश्विक बाजारों में एक बार फिर भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। शुक्रवार को यूरोपीय शेयर बाजारों में मार्च के बाद सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई। बढ़ती तेल कीमतों, महंगाई की आशंका और बॉन्ड यील्ड में तेजी ने निवेशकों की चिंता को और बढ़ा दिया है।

यूरोप का प्रमुख इंडेक्स Stoxx 600 लगभग 1.5% तक गिर गया। यह गिरावट ऐसे समय आई है जब वैश्विक बाजार पहले से ही भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं से जूझ रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतों में आई अचानक तेजी और ब्याज दरों को लेकर बढ़ती आशंकाओं ने बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया है।

तेल की कीमतों ने बढ़ाई टेंशन

अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude की कीमत 109 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई। तेल की कीमतों में यह तेजी उस बयान के बाद देखने को मिली जिसमें Donald Trump ने कहा कि अमेरिका को Strait of Hormuz खुले रहने की जरूरत नहीं है।

Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक तेल सप्लाई को प्रभावित कर सकता है। यही वजह है कि बाजार में तुरंत घबराहट बढ़ गई।

इसके साथ ही अमेरिका और चीन के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक से भी निवेशकों को कोई बड़ा सकारात्मक संकेत नहीं मिला। रिपोर्ट्स के अनुसार ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping की बातचीत में ईरान युद्ध को खत्म करने को लेकर कोई ठोस प्रतिबद्धता सामने नहीं आई।

बॉन्ड यील्ड में उछाल से बाजार पर दबाव

यूरोप में बॉन्ड मार्केट में भी भारी हलचल देखने को मिली। सरकारी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से निवेशकों ने इक्विटी बाजार से दूरी बनानी शुरू कर दी।

बॉन्ड यील्ड बढ़ने का सीधा असर उन सेक्टर्स पर पड़ा जो ब्याज दरों के प्रति ज्यादा संवेदनशील माने जाते हैं। इनमें:

  • बैंकिंग सेक्टर
  • रियल एस्टेट
  • यूटिलिटी कंपनियां

सबसे ज्यादा प्रभावित रहे।

निवेशक अब यह मानकर चल रहे हैं कि यूरोप में केंद्रीय बैंक आने वाले महीनों में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी कर सकते हैं। यही कारण है कि बाजार में बिकवाली तेज हो गई।

माइनिंग शेयरों में भी गिरावट

इस सप्ताह सोना और तांबा जैसी धातुओं में भी कमजोरी देखने को मिली, जिसका असर माइनिंग कंपनियों के शेयरों पर पड़ा।

हालांकि सप्ताह की शुरुआत में मेटल शेयरों में अच्छी तेजी थी, लेकिन शुक्रवार को अचानक आई गिरावट ने निवेशकों का मुनाफा कम कर दिया। कई बड़ी माइनिंग कंपनियों के शेयर लाल निशान में बंद हुए।

इसके विपरीत ऊर्जा सेक्टर ने मजबूती दिखाई क्योंकि तेल की कीमतों में तेजी का फायदा ऊर्जा कंपनियों को मिला। वहीं हेल्थकेयर और कंज्यूमर स्टेपल्स सेक्टर भी अपेाकृत मजबूत रहे क्योंकि निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ते नजर आए।


निवेशकों को क्यों सता रही है महंगाई की चिंता?

तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से दुनिया भर में महंगाई बढ़ने का खतरा फिर से गहरा गया है। यदि ऊर्जा कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो इसका असर परिवहन, उत्पादन और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है।

European Central Bank के गवर्निंग काउंसिल सदस्य Yannis Stournaras ने चेतावनी दी कि यदि तेल की कीमतें मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं तो उधारी की लागत और बढ़ सकती है।

वहीं Bank of England के मुख्य अर्थशास्त्री Huw Pill ने भी संकेत दिए कि ब्रिटेन में महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।

इन बयानों ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी क्योंकि ऊंची ब्याज दरें आमतौर पर शेयर बाजार के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं।

यूरोपीय बाजार क्यों ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं?

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान युद्ध और तेल संकट का असर यूरोप पर अमेरिका और एशिया की तुलना में ज्यादा पड़ सकता है।

यूरोप की अर्थव्यवस्था ऊर्जा आयात पर काफी निर्भर है। यदि तेल और गैस की कीमतें बढ़ती हैं तो इसका सीधा असर उद्योगों और उपभोक्ताओं पर पड़ता है।

इसी वजह से ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से यूरोपीय शेयर बाजार, अमेरिकी और एशियाई बाजारों की तुलना में कमजोर प्रदर्शन कर रहे हैं।

मनी मार्केट्स अब यह अनुमान लगा रहे हैं कि इस साल European Central Bank और Bank of England दोनों लगभग तीन बार ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं।

इन कंपनियों के शेयरों में आई बड़ी गिरावट

शुक्रवार को कई बड़ी यूरोपीय कंपनियों के शेयरों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई।

लक्जरी फैशन ब्रांड Salvatore Ferragamo के शेयर लगभग 18% तक टूट गए। कंपनी के कमजोर पहली तिमाही बिक्री आंकड़ों ने निवेशकों को निराश कर दिया।

इसके अलावा LVMH के शेयरों में भी गिरावट आई। कंपनी ने अपने लोकप्रिय ब्रांड Marc Jacobs को बेचने की योजना का ऐलान किया है, जिसके बाद बाजार में नकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली।

क्या आगे और बढ़ सकती है बाजार में गिरावट?

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार में और ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। यदि तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं और वैश्विक तनाव कम नहीं हुआ, तो निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता और घट सकती है।

Wellington Management के इन्वेस्टमेंट डायरेक्टर Paul Skinner ने कहा कि:

“बॉन्ड मार्केट पहले से अस्थिर है, महंगाई का दबाव बना हुआ है और Strait of Hormuz संकट का कोई समाधान नजर नहीं आ रहा। ऐसे में बाजार में और वोलैटिलिटी आ सकती है।”


निष्कर्ष

यूरोपीय शेयर बाजारों में आई यह गिरावट सिर्फ एक दिन की कमजोरी नहीं मानी जा रही, बल्कि यह वैश्विक आर्थिक चिंताओं का संकेत भी है।

तेल की कीमतों में तेजी, बढ़ती महंगाई, बॉन्ड यील्ड और केंद्रीय बैंकों की सख्त नीतियां आने वाले महीनों में बाजार की दिशा तय कर सकती हैं। फिलहाल निवेशक बेहद सतर्क नजर आ रहे हैं और सुरक्षित सेक्टर्स की ओर रुख कर रहे हैं।

अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या वैश्विक तनाव कम होगा या आने वाले दिनों में बाजार में और बड़ी गिरावट देखने को मिलेगी।


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