2026 में भारत की दमदार वापसी संभव, विदेशी निवेश लौट सकता है: Goldman Sachs के टिमोथी मो

कमज़ोर 2025 के बाद भारत के शेयर बाज़ार के लिए 2026 बन सकता है ‘कमबैक ईयर’

Dev
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Goldman Sachs का मानना है कि 2026 में भारतीय शेयर बाज़ार फिर से तेज़ी की राह पर लौट सकता हैIndian Stock Market

2026 में भारत की दमदार वापसी की उम्मीद

2025 भारतीय शेयर बाज़ार के लिए उम्मीदों से कमजोर साबित हुआ। लेकिन अब दुनिया की दिग्गज इन्वेस्टमेंट बैंक Goldman Sachs भारत को लेकर एक बार फिर आशावादी नजर आ रहा है।

Goldman Sachs के Chief Asia Pacific Equity Strategist Timothy Moe का मानना है कि 2026 में भारत अर्निंग्स-ड्रिवन रिकवरी के जरिए एक मजबूत वापसी कर सकता है और इसके साथ ही विदेशी निवेशकों का भरोसा भी लौट सकता है।

उन्होंने यह बात ET Now को दिए गए इंटरव्यू में कही।

2025 में भारत क्यों पिछड़ा?

Timothy Moe के मुताबिक, 2025 में भारत एशिया और उभरते बाज़ारों (Emerging Markets) में सबसे ज्यादा निराश करने वाला बाजार रहा।

उन्होंने कहा कि:

“भारत ने 2025 में MSCI Emerging Market Index के मुकाबले करीब तीन दशकों में सबसे खराब अंडरपरफॉर्मेंस दर्ज की।”

इसका मतलब यह है कि भारत, जो पिछले कुछ वर्षों में निवेशकों का फेवरेट बना हुआ था, 2025 में ग्लोबल फंड मैनेजर्स के लिए आकर्षक नहीं रह पाया।

अर्निंग्स रिकवरी बनेगी गेम-चेंजर

Goldman Sachs का सबसे बड़ा दांव कॉरपोरेट अर्निंग्स की वापसी पर है।

बैंक के मुताबिक:

MSCI India की अर्निंग्स ग्रोथ 2026 में करीब 15% रह सकती है।

यह ग्रोथ शेयर बाजार के लिए बहुत अहम होती है क्योंकि:

  • जब कंपनियों का मुनाफा बढ़ता है

  • शेयरों की कीमतें टिकाऊ तरीके से ऊपर जाती हैं

  • विदेशी निवेशकों को भरोसा मिलता है

Timothy Moe का कहना है कि भारत की असली ताकत वैल्यूएशन नहीं बल्कि कमाई की क्षमता (Earnings Power) है।

Valuation महंगी, लेकिन जायज़

हालांकि Goldman Sachs यह भी मानता है कि फिलहाल भारतीय शेयर बाज़ार के वैल्यूएशन काफी ऊंचे हैं।

Timothy Moe के अनुसार:

“भारतीय शेयर महंगे ज़रूर हैं, लेकिन उन्हें पूरी तरह ओवरवैल्यूड भी नहीं कहा जा सकता। ये डिफेन्सिबल हैं।”

इसका मतलब यह है कि:

  • भारत में बहुत ज्यादा री-रेटिंग की गुंजाइश नहीं है

  • लेकिन अर्निंग्स ग्रोथ शेयरों को सपोर्ट दे सकती है

यानी शेयर की कीमतें बढ़ेंगी, पर वह कमाई के दम पर होंगी, न कि सिर्फ उत्साह के दम पर।

किन सेक्टर्स से आएगी मजबूती?

Goldman Sachs भारत की वापसी को कुछ खास सेक्टर्स से जोड़कर देख रहा है:

1. डोमेस्टिक कंजम्प्शन

भारत की अर्थव्यवस्था खपत पर आधारित है।
जैसे-जैसे:

  • आम लोगों की आय बढ़ेगी

  • महंगाई नियंत्रण में आएगी

  • गांवों और शहरों में मांग बढ़ेगी

तो FMCG, ऑटो, रिटेल और कंज्यूमर सेक्टर को फायदा होगा।

2. फाइनेंशियल सेक्टर

बैंकों और NBFCs की बैलेंस शीट मजबूत बनी हुई है।
क्रेडिट ग्रोथ तेज है और NPA नियंत्रण में हैं।

इससे:

  • लोन

  • हाउसिंग

  • MSME

  • क्रेडिट कार्ड

जैसे सेगमेंट में ग्रोथ देखने को मिल सकती है।

3. नीतिगत सपोर्ट

सरकार की ओर से:

  • इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च

  • मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा

  • Make in India

  • और PLI स्कीम

इन सबका असर 2026 में ज्यादा साफ दिखाई देगा।

विदेशी निवेशकों की वापसी कब?

Timothy Moe के मुताबिक, विदेशी निवेशक तुरंत नहीं बल्कि 2026 के दूसरे हिस्से में भारत की ओर लौट सकते हैं।

कारण:

  • पहले वे यह देखना चाहेंगे कि

    • अर्निंग्स सच में बढ़ रही हैं या नहीं

    • ग्लोबल ब्याज दरें कैसी रहती हैं

    • डॉलर और बॉन्ड यील्ड का ट्रेंड क्या है

लेकिन जैसे ही भारत की ग्रोथ स्टोरी फिर से मजबूत दिखेगी, Foreign Institutional Investors (FIIs) की वापसी संभव है।

2026 क्यों बन सकता है टर्निंग पॉइंट?

Goldman Sachs का मानना है कि 2026 में तीन चीज़ें एक साथ मिल सकती हैं:

  1. बेहतर कॉरपोरेट रिज़ल्ट

  2. घरेलू खपत में सुधार

  3. नीतिगत समर्थन और स्थिरता

जब ये तीनों मिलते हैं, तब शेयर बाज़ार में असली बुल रन शुरू होता है।

SamaypeNews विश्लेषण

2025 भले ही भारतीय बाजार के लिए निराशाजनक रहा हो, लेकिन Goldman Sachs जैसी बड़ी संस्था का भरोसा दिखाता है कि भारत की लॉन्ग-टर्म स्टोरी अभी खत्म नहीं हुई है।

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