भारत-ओमान CEPA: रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को नई रफ्तार
वैश्विक स्तर पर बढ़ते टैरिफ वॉर और व्यापार अनिश्चितताओं के बीच भारत ने अपने निर्यात को सुरक्षित और विविध बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। गुरुवार को भारत और ओमान के बीच Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता न केवल व्यापारिक दृष्टि से अहम है, बल्कि खाड़ी क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी को भी मजबूत करता है।
- भारत-ओमान CEPA: रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को नई रफ्तार
- खाड़ी देशों में भारत का दूसरा बड़ा ट्रेड पैक्ट
- ड्यूटी-फ्री एक्सेस से भारतीय निर्यात को बढ़त
- भारत ने भी संतुलित रुख अपनाया
- किन सेक्टर्स को होगा सबसे ज्यादा फायदा?
- सर्विस सेक्टर में ऐतिहासिक ओपनिंग
- AYUSH और फार्मा सेक्टर को नई उड़ान
- FDI और निवेश सहयोग भी मजबूत
यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय ओमान यात्रा के दौरान मस्कट में संपन्न हुआ, जहां केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और ओमान के वाणिज्य मंत्री क़ैस अल यूसुफ़ ने इस ऐतिहासिक करार पर दस्तखत किए।
खाड़ी देशों में भारत का दूसरा बड़ा ट्रेड पैक्ट
भारत-ओमान CEPA, खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के किसी देश के साथ भारत का दूसरा गहरा व्यापार समझौता है। इससे पहले भारत ने फरवरी 2022 में UAE के साथ CEPA साइन किया था। वहीं, ओमान के लिए यह अमेरिका (2006) के बाद दूसरा द्विपक्षीय व्यापार समझौता है।
सरकार का मानना है कि यह करार केवल लेन-देन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मार्केट एक्सेस, सर्विस मोबिलिटी और निवेश के नए रास्ते खोलेगा।
ड्यूटी-फ्री एक्सेस से भारतीय निर्यात को बढ़त
समझौते के तहत ओमान ने भारत को बड़ा टैरिफ लाभ दिया है:
98.08% टैरिफ लाइनों पर जीरो ड्यूटी एक्सेस
भारत के 99% से अधिक निर्यात मूल्य को कवर
लगभग 98% उत्पादों पर तत्काल टैरिफ खत्म
वर्तमान में ओमान में आयात शुल्क 0 से 100% तक है, लेकिन CEPA के बाद भारतीय उत्पादों को वहां प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी।
भारत ने भी संतुलित रुख अपनाया
इसके बदले भारत ने:
77.79% टैरिफ लाइनों पर रियायत
ओमान से आने वाले 94.81% आयात मूल्य को कवर
हालांकि, भारत ने डेयरी, चाय, कॉफी, रबर, तंबाकू, ज्वेलरी, फुटवियर और स्पोर्ट्स गुड्स जैसे संवेदनशील सेक्टर्स को बाहर रखा है।
किन सेक्टर्स को होगा सबसे ज्यादा फायदा?
इस CEPA से खासतौर पर लेबर-इंटेंसिव और MSME सेक्टर्स को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है:
टेक्सटाइल
लेदर और फुटवियर
जेम्स एंड ज्वेलरी
इंजीनियरिंग गुड्स
प्लास्टिक और फर्नीचर
फार्मा और मेडिकल डिवाइसेज
ऑटोमोबाइल और एग्री प्रोडक्ट्स
पेट्रोलियम उत्पाद पहले से ही ज्यादातर ड्यूटी-फ्री हैं, लेकिन इंजीनियरिंग, केमिकल्स और मिनरल्स जैसे सेक्टर्स को अब अतिरिक्त लाभ मिलेगा।
सर्विस सेक्टर में ऐतिहासिक ओपनिंग
CEPA की सबसे बड़ी खासियत है सर्विस सेक्टर में ओमान की अब तक की सबसे उदार पेशकश:
127 सर्विस सब-सेक्टर्स में मार्केट एक्सेस
IT, प्रोफेशनल सर्विस, एजुकेशन, हेल्थ, R&D
ओमान का $12.5 बिलियन का सर्विस इंपोर्ट मार्केट
इसके अलावा भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए मोबिलिटी नियम आसान किए गए हैं, जिसमें ज्यादा कोटा और लंबी स्टे अवधि शामिल है।
AYUSH और फार्मा सेक्टर को नई उड़ान
पहली बार किसी वैश्विक ट्रेड डील में:
पारंपरिक चिकित्सा (AYUSH) को व्यापक मान्यता
फार्मा प्रोडक्ट्स के लिए फास्ट-ट्रैक अप्रूवल
US FDA, EMA और UK रेगुलेटर की मंजूरी को मान्यता
इससे भारतीय फार्मा और वेलनेस इंडस्ट्री को बड़ा फायदा मिलेगा।
FDI और निवेश सहयोग भी मजबूत
ओमान ने कई प्रमुख सर्विस सेक्टर्स में भारतीय कंपनियों को 100% FDI की अनुमति दी है। दोनों देश:
इंफ्रास्ट्रक्चर
लॉजिस्टिक्स
ग्रीन हाइड्रोजन
रिन्यूएबल एनर्जी
मैन्युफैक्चरिंग
जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने पर सहमत हुए हैं।
रणनीतिक महत्व क्यों है खास?
विशेषज्ञों के मुताबिक यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है।
ओमान, खाड़ी का रणनीतिक समुद्री द्वार
भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती
अफ्रीका और यूरोप तक लॉजिस्टिक ब्रिज
भारत-ओमान व्यापार 2024-25 में $10.6 बिलियन रहा, जिसे अगले 3-5 वर्षों में $15 बिलियन तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
इंडस्ट्री का रिएक्शन
FIEO, CII और PHDCCI जैसे संगठनों ने इस समझौते का स्वागत किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह CEPA भारत के MSME और फार्म सेक्टर को ग्लोबल सप्लाई चेन से जोड़ेगा।
NDA सरकार का छठा बड़ा ट्रेड पैक्ट
ओमान CEPA, मोदी सरकार के तहत छठा बड़ा व्यापार समझौता है। इससे पहले:
मॉरीशस
UAE
ऑस्ट्रेलिया
EFTA
UK
भारत अब EU और US के साथ भी ट्रेड डील की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
SamaypeNews की राय
भारत-ओमान CEPA ऐसे समय आया है जब दुनिया भर में संरक्षणवाद बढ़ रहा है। यह समझौता भारत के लिए निर्यात जोखिम कम करने, नए बाजार खोलने और खाड़ी क्षेत्र में रणनीतिक प्रभाव बढ़ाने का मजबूत जरिया साबित हो सकता है।
लॉन्ग टर्म में यह डील भारत की ट्रेड डिप्लोमेसी की बड़ी जीत मानी जा रही है।
डिस्क्लेमर:
यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है।
