Stock Market Today: सेंसेक्स 83,216 पर बंद, निफ्टी 25,492 पर – वैश्विक अनिश्चितता से बाजार में उतार-चढ़ाव जारी

भारतीय शेयर बाजार में आने वाले दिनों में रहेगा उतार-चढ़ाव, जानें कौन से सेक्टर दिखा सकते हैं मजबूती

Dev
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वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और घरेलू मुद्रास्फीति आंकड़ों के चलते भारतीय बाजारों में उतार-चढ़ाव की संभावना।भारतीय शेयर बाजार

भारतीय शेयर बाजारों में इस हफ्ते लगातार दूसरी बार गिरावट देखने को मिली। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और मिलेजुले तिमाही नतीजों के चलते निवेशकों की भावना कमजोर बनी रही। सेंसेक्स 83,216.28 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 25,492.30 के स्तर पर स्थिर रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है क्योंकि घरेलू और वैश्विक दोनों स्तरों पर कई अहम आर्थिक आंकड़े जारी होने वाले हैं।

बाजार की ओपनिंग और प्रमुख सूचकांक प्रदर्शन

सप्ताह की शुरुआत में बाजार ने कमजोर ग्लोबल संकेतों के चलते हल्की गिरावट के साथ ट्रेडिंग शुरू की। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल और यूरोप-चीन के आर्थिक आंकड़ों की कमजोरी ने निवेशकों की धारणा पर असर डाला।

सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में हफ्ते भर के दौरान लगभग 0.80% की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि घरेलू स्तर पर कुछ सकारात्मक संकेत — जैसे मजबूत GST कलेक्शन, फेस्टिव सीजन में रिटेल बिक्री में तेजी और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में प्रगति — ने बाजार को गिरावट से कुछ हद तक संभाला।

इसके बावजूद विदेशी निवेशकों (FIIs) की निरंतर बिकवाली और निर्यात में गिरावट ने बाजार को दबाव में रखा।

टॉप गेनर्स और लूज़र्स: कौन रहा आगे, कौन पीछे

इस हफ्ते के टॉप गेनर्स में ICICI Bank, Axis Bank, और HDFC Bank जैसे प्रमुख बैंकिंग स्टॉक्स शामिल रहे। विशेषज्ञों का कहना है कि ब्याज दरों में स्थिरता और बेहतर एसेट क्वालिटी की उम्मीद ने इन शेयरों को मजबूती दी।

दूसरी ओर, TCS, Infosys, और Tata Steel जैसे आईटी और मेटल सेक्टर के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। आईटी सेक्टर में अमेरिकी टेक कंपनियों के वैल्यूएशन को लेकर चिंता और यूरोपीय डिमांड में कमी के कारण दबाव देखने को मिला।

FMCG सेक्टर में भी मामूली कमजोरी आई, क्योंकि त्योहारों के बाद उपभोग में सुस्ती देखी गई।

सेक्टर परफॉर्मेंस: आईटी, मेटल कमजोर, बैंकिंग और फाइनेंशियल्स में मजबूती

सेक्टोरल मोर्चे पर अधिकांश इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। आईटी, मेटल, और FMCG सेक्टर में गिरावट देखने को मिली, जबकि फाइनेंशियल और बैंकिंग शेयरों ने बाजार को सहारा दिया।

आईटी इंडेक्स करीब 1.3% टूटा, जबकि मेटल इंडेक्स में 1.5% की गिरावट रही। दूसरी ओर, निफ्टी बैंक और फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स ने हल्की तेजी दर्ज की, जिससे बाजार में कुछ स्थिरता बनी रही।

ब्रॉडर मार्केट की बात करें तो मिडकैप इंडेक्स लगभग फ्लैट बंद हुआ, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स में 1.7% की गिरावट दर्ज की गई, जो संकेत देता है कि निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं।

विशेषज्ञों की राय: अगले हफ्ते रहेगा उतार-चढ़ाव, लेकिन लंबी अवधि के लिए मौके बरकरार

रिलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के SVP (रिसर्च) अजीत मिश्रा का कहना है,

“बाजार निकट भविष्य में वैश्विक अनिश्चितताओं और भारी आर्थिक डेटा फ्लो के कारण अस्थिर रह सकता है। हालांकि घरेलू मैक्रो संकेतकों में सुधार और कॉर्पोरेट प्रदर्शन की स्थिरता लंबे समय में समर्थन प्रदान कर सकती है।”

SBI सिक्योरिटीज के टेक्निकल हेड सुधीप शाह का मानना है कि निफ्टी के लिए 25,300–25,250 का ज़ोन महत्वपूर्ण सपोर्ट के रूप में काम कर सकता है। उनका कहना है कि जब तक यह स्तर कायम है, तब तक बाजार में कोई बड़ी गिरावट की संभावना नहीं है।

विश्लेषकों का यह भी कहना है कि आने वाले हफ्ते में CPI (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक) और WPI (थोक मूल्य सूचकांक) जैसे आंकड़े बाजार की दिशा तय करेंगे।

ग्लोबल परिदृश्य: एआई वैल्यूएशन को लेकर चिंता से दबाव, लेकिन अवसर भी बरकरार

वैश्विक स्तर पर अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों में एआई से जुड़ी कंपनियों के वैल्यूएशन को लेकर बढ़ती चिंता ने टेक सेक्टर पर दबाव बनाया है। इससे निवेशकों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति देखी जा रही है।

हालांकि, भारत के लिए सकारात्मक पहलू यह है कि घरेलू अर्थव्यवस्था अभी भी स्थिर वृद्धि के मार्ग पर है, और रिटेल डिमांड तथा सरकारी पूंजी व्यय (Capex) मजबूत बने हुए हैं।

निवेशकों के लिए संकेत: सतर्क रहें, पर अवसर न चूकें

वर्तमान परिस्थिति में विश्लेषक सलाह दे रहे हैं कि निवेशकों को गुणवत्तापूर्ण स्टॉक्स पर ध्यान देना चाहिए, खासकर बैंकिंग, कैपिटल गुड्स और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में। शॉर्ट-टर्म में अस्थिरता बनी रह सकती है, लेकिन लंबी अवधि के लिए भारतीय बाजार अभी भी आकर्षक है।

निष्कर्ष:

भारतीय शेयर बाजार आने वाले दिनों में घरेलू मुद्रास्फीति डेटा, विदेशी निवेशकों के रुख और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर निर्भर करेगा। फिलहाल, अस्थिरता का दौर जारी है, पर मजबूत बुनियादी अर्थव्यवस्था और सुधारती कॉर्पोरेट कमाई निवेशकों के लिए भरोसे का संकेत हैं।

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