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भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक बड़ी हलचल देखने को मिली है। होम इंटीरियर यूनिकॉर्न Livspace ने पिछले छह महीनों में लगभग 1,000 कर्मचारियों को निकाल दिया है, जो उसके कुल वर्कफोर्स का करीब 12% बताया जा रहा है। कंपनी का कहना है कि यह कदम लागत कटौती नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित भविष्य की रणनीति का हिस्सा है।
छंटनी की खबर के साथ ही एक और अहम घटनाक्रम सामने आया—कंपनी के को-फाउंडर और इंडिया CEO Saurabh Jain ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने इसे “नए अध्याय की शुरुआत” बताते हुए व्यक्तिगत कारणों से लिया गया निर्णय कहा।
AI ऑटोमेशन बना छंटनी की वजह?
कंपनी के प्रवक्ता के अनुसार, सेल्स, ऑपरेशंस, डिजाइन और मार्केटिंग जैसे प्रमुख विभागों में एडवांस AI एजेंट्स और ऑटोमेशन को लागू किया गया। इन तकनीकी बदलावों के चलते कई मैनुअल भूमिकाएँ अप्रासंगिक हो गईं।
Livspace का दावा है कि यह कदम “रिएक्टिव कॉस्ट-कटिंग” नहीं, बल्कि संसाधनों के दीर्घकालिक पुनर्विन्यास का हिस्सा है। कंपनी का कहना है कि AI में भारी निवेश से ग्राहक अनुभव को अधिक सटीक और कुशल बनाया जा सकेगा।
हालाँकि, कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि छंटनी का दायरा 25% तक हो सकता है, लेकिन कंपनी ने आधिकारिक तौर पर 12% का ही आंकड़ा साझा किया है।
सौरभ जैन का इस्तीफा: संयोग या रणनीति?
AI आधारित पुनर्गठन के बीच Saurabh Jain का इस्तीफा कई सवाल खड़े करता है। LinkedIn पोस्ट में उन्होंने लिखा,
“कभी-कभी एक अध्याय को बंद करना पड़ता है, इसलिए नहीं कि कहानी खत्म हो गई, बल्कि इसलिए कि एक बड़ा अध्याय शुरू होने वाला है।”
कंपनी के अनुसार, Livspace के AI अवतार की नींव रखने में जैन की अहम भूमिका रही। ऐसे में उनका जाना एक ट्रांजिशन पीरियड का संकेत भी माना जा सकता है।
2014 से यूनिकॉर्न तक का सफर
2014 में स्थापित Livspace एक ओम्नीचैनल होम इंटीरियर और रेनोवेशन प्लेटफॉर्म है, जो घर मालिकों को प्रोफेशनल डिजाइनर्स, कॉन्ट्रैक्टर्स और वेंडर्स से जोड़ता है।
कंपनी अब तक 450 मिलियन डॉलर से अधिक की फंडिंग जुटा चुकी है। इसके प्रमुख निवेशकों में KKR, Ingka Group, TPG Growth, Goldman Sachs, Bessemer Venture Partners और Jungle Ventures शामिल हैं।
AI और बढ़ती छंटनियाँ: क्या यह नया सामान्य है?
AI के तेजी से बढ़ते उपयोग ने कई कंपनियों को अपनी वर्कफोर्स स्ट्रक्चर पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है। Amazon, TCS और Microsoft जैसी बड़ी टेक कंपनियाँ भी ऑटोमेशन और AI के चलते जॉब कट की राह पर चल चुकी हैं।
स्टार्टअप जगत में भी यह ट्रेंड साफ दिख रहा है। सवाल यह है कि क्या AI वास्तव में नौकरियाँ खत्म कर रहा है या कंपनियाँ इसे लागत कटौती के लिए एक सुविधाजनक कारण बना रही हैं?
हाल ही में भारत दौरे पर आए Sam Altman ने भी माना कि AI से वास्तविक जॉब डिस्प्लेसमेंट हो रहा है, लेकिन कुछ मामलों में कंपनियाँ नियमित छंटनी को “AI प्रभाव” बताकर पेश करती हैं।
आर्थिक सर्वेक्षण की चेतावनी
Economic Survey 2025-26 में भी इस बात पर चिंता जताई गई है कि AI उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ सेवा-आधारित IT और BPO सेक्टर में रोजगार के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
भारत जैसे देश में, जहाँ बड़ी आबादी सर्विस सेक्टर पर निर्भर है, AI आधारित बदलाव का असर व्यापक हो सकता है।
क्या समाधान है?
विशेषज्ञों का मानना है कि समाधान “अपस्किलिंग” और “री-स्किलिंग” में है। AI को खतरे के रूप में देखने के बजाय, इसे “को-वर्कर” के रूप में अपनाने की जरूरत है।
Cornerstone Ventures के मैनेजिंग पार्टनर अभिषेक प्रसाद के अनुसार, कंपनियों को अपने ऑपरेटिंग प्रोटोकॉल, प्रोजेक्ट प्लानिंग, टैलेंट सोर्सिंग और परफॉर्मेंस असेसमेंट सिस्टम को पूरी तरह बदलना होगा।
आने वाले समय में केवल वही कर्मचारी सुरक्षित रह पाएंगे जो AI टूल्स के साथ काम करने में दक्ष होंगे।
Livspace का कदम: साहसिक या जोखिम भरा?
Livspace का यह निर्णय दो तरह से देखा जा सकता है—
साहसिक बदलाव: भविष्य की तैयारी, तकनीकी दक्षता और लागत अनुकूलन
जोखिम भरा प्रयोग: कर्मचारियों में असुरक्षा और ब्रांड छवि पर प्रभाव
स्टार्टअप इकोसिस्टम में यह एक संकेत है कि AI केवल एक ट्रेंड नहीं, बल्कि बिजनेस मॉडल का केंद्रीय हिस्सा बन चुका है।
निष्कर्ष
Livspace की 1,000 कर्मचारियों की छंटनी और को-फाउंडर का इस्तीफा भारत में AI युग की शुरुआत का एक प्रतीकात्मक उदाहरण है। टेक्नोलॉजी बदलाव ला रही है—तेजी से और गहराई से।
आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या AI वास्तव में नई नौकरियाँ पैदा करता है या पारंपरिक भूमिकाओं को स्थायी रूप से खत्म कर देता है। फिलहाल इतना तय है कि कॉरपोरेट भारत एक बड़े ट्रांजिशन फेज से गुजर रहा है।
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