आने वाले सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार की चाल मुख्य रूप से मैक्रोइकोनॉमिक डेटा, वैश्विक घटनाक्रम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी बढ़ती चिंताओं से प्रभावित रहने की संभावना है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि हालिया उतार-चढ़ाव के बाद निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और किसी भी बड़े दांव से पहले स्पष्ट संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, अगले सप्ताह घरेलू और वैश्विक दोनों स्तरों पर आने वाले अहम आर्थिक आंकड़े बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। इसके साथ ही विदेशी निवेशकों (FII) की ट्रेडिंग गतिविधि और रुपये की चाल भी निवेशकों की रणनीति को प्रभावित करेगी।
वैश्विक संकेतों पर रहेगी बाजार की नजर
हाल के दिनों में वैश्विक बाजारों में अस्थिरता देखने को मिली है। अमेरिका और अन्य विकसित अर्थव्यवस्थाओं से आने वाले आर्थिक आंकड़े, खासकर श्रम बाजार से जुड़ा डेटा, निवेशकों के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी लेबर डेटा और वहां की मौद्रिक नीति को लेकर बदलती उम्मीदें, उभरते बाजारों समेत भारत पर भी असर डाल सकती हैं।
Vinod Nair, हेड ऑफ रिसर्च, Geojit Investments Ltd, के अनुसार, टैरिफ से जुड़ी चिंताओं में कुछ कमी आई है और घरेलू कंपनियों का तिमाही नतीजों का सीजन भी लगभग समाप्ति की ओर है। ऐसे में बाजार का फोकस अब वैश्विक संकेतों पर अधिक रहेगा।
उनका कहना है कि AI से जुड़ी वैश्विक हलचल और भू-राजनीतिक जोखिमों के चलते समग्र धारणा फिलहाल सतर्क बनी रह सकती है, हालांकि बेहतर वैल्यूएशन और सकारात्मक GDP अनुमान विदेशी निवेशकों के भरोसे को कुछ हद तक सहारा दे सकते हैं।
बीते सप्ताह बाजार का प्रदर्शन
पिछले सप्ताह शेयर बाजार ने कमजोरी के साथ कारोबार किया। BSE Sensex में साप्ताहिक आधार पर करीब 954 अंकों की गिरावट दर्ज की गई, जबकि NSE Nifty भी लगभग 223 अंक फिसल गया। वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी शेयरों में बिकवाली और AI आधारित व्यवधानों को लेकर बढ़ती चिंताओं ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया।
विशेषज्ञों के अनुसार, रिटर्न का बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा सेक्टर्स तक सीमित रहने और IT शेयरों में दबाव बढ़ने से बाजार की चौड़ाई कमजोर हुई है। इसका असर व्यापक बाजार पर भी देखने को मिला।
AI को लेकर बढ़ती चिंता
हाल के महीनों में AI आधारित टेक्नोलॉजी ने निवेशकों के बीच भारी उत्साह पैदा किया था, लेकिन अब इसके संभावित व्यवधानों को लेकर चिंता भी बढ़ रही है। कई वैश्विक कंपनियों के वैल्यूएशन काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच चुके हैं, जिससे किसी भी नकारात्मक खबर पर तेज करेक्शन का खतरा बना हुआ है।
विश्लेषकों का मानना है कि AI से जुड़े शेयरों में जारी पुनर्मूल्यांकन (repricing) प्रक्रिया का असर आने वाले दिनों में भी देखने को मिल सकता है। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बचते नजर आ रहे हैं।
सेक्टर रोटेशन की संभावना
Vinod Nair के अनुसार, IT और मेटल्स जैसे सेक्टर्स को संरचनात्मक और बाहरी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में बाजार की अगुवाई धीरे-धीरे घरेलू मांग से जुड़े सेक्टर्स की ओर शिफ्ट हो सकती है। बैंकिंग, ऑटोमोबाइल और चुनिंदा कंजम्पशन आधारित सेक्टर्स में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि, जब तक स्पष्ट मैक्रोइकोनॉमिक और पॉलिसी संकेत नहीं मिलते, तब तक व्यापक सूचकांकों के एक सीमित दायरे (range-bound) में कारोबार करने की उम्मीद है।
आने वाले अहम आर्थिक आंकड़े
अगले सप्ताह निवेशकों की नजर कई महत्वपूर्ण घरेलू आंकड़ों पर रहेगी। थोक मूल्य सूचकांक (WPI) महंगाई और व्यापार संतुलन (Balance of Trade) से जुड़े आंकड़े कीमतों के रुझान और बाहरी क्षेत्र की स्थिति का संकेत देंगे।
इसके अलावा, मैन्युफैक्चरिंग, सर्विसेज और कंपोजिट सेक्टर के लिए HSBC फ्लैश PMI, बैंक लोन ग्रोथ और विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़े भी जारी होने हैं।
Ajit Mishra, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च), Religare Broking Ltd, का कहना है कि इन हाई-फ्रीक्वेंसी संकेतकों का आकलन वैश्विक अस्थिरता के बीच घरेलू ग्रोथ की मजबूती को परखने के लिए किया जाएगा।
रुपये और FII की भूमिका
रुपये की चाल भी बाजार की धारणा को प्रभावित करती रहेगी। पिछले सप्ताह रुपया डॉलर के मुकाबले सीमित दायरे में कारोबार करते हुए हल्की कमजोरी के साथ बंद हुआ। विदेशी निवेशकों के लिए मुद्रा में स्थिरता या मजबूती एक सकारात्मक संकेत मानी जाती है।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर FII प्रवाह बना रहता है, तो बाजार को निचले स्तरों पर कुछ सहारा मिल सकता है।
अमेरिकी फेड और वैश्विक नीति संकेत
अमेरिका से जारी मजबूत रोजगार आंकड़ों ने निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को कमजोर किया है। इसका असर वैश्विक जोखिम वाले एसेट्स पर देखने को मिला है। निवेशकों की नजर अब Federal Reserve की फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक के मिनट्स पर भी रहेगी, जो अगले सप्ताह जारी होने हैं।
इन मिनट्स से यह संकेत मिल सकता है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक आने वाले महीनों में मौद्रिक नीति को लेकर किस रुख पर कायम है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, अगले सप्ताह शेयर बाजार की चाल कई कारकों के बीच संतुलन बनाती नजर आ सकती है। मैक्रोइकोनॉमिक डेटा, वैश्विक घटनाक्रम, AI से जुड़ी चिंताएं, FII गतिविधि और रुपये की चाल—ये सभी मिलकर निवेशकों की रणनीति तय करेंगे। जब तक स्पष्ट संकेत नहीं मिलते, बाजार में उतार-चढ़ाव और सीमित दायरे में कारोबार की संभावना बनी हुई है।
