Nasdaq की 24×7 ट्रेडिंग योजना क्या है?
अमेरिकी शेयर बाजार Nasdaq अब एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Nasdaq जल्द ही 24 घंटे के करीब ट्रेडिंग (23/5 मॉडल) शुरू करने की तैयारी में है। इसके लिए वह अमेरिकी रेगुलेटर US Securities and Exchange Commission (SEC) के पास जरूरी दस्तावेज जमा करने की योजना बना रहा है।
- Nasdaq की 24×7 ट्रेडिंग योजना क्या है?
- कैसे बदलेगा Nasdaq का ट्रेडिंग स्ट्रक्चर?
- क्यों अहम है Nasdaq का यह फैसला?
- भारतीय शेयर बाजार पर तुरंत क्या असर पड़ेगा?
- ओपनिंग गैप और वोलैटिलिटी बढ़ने की आशंका
- कौन-से सेक्टर होंगे ज्यादा संवेदनशील?
- क्या भारतीय बाजार की मूल प्रकृति बदलेगी?
- क्या आर्बिट्राज के मौके बनेंगे?
फिलहाल Nasdaq में:
प्री-मार्केट
रेगुलर मार्केट
पोस्ट-मार्केट
मिलाकर करीब 16 घंटे ट्रेडिंग होती है। लेकिन नए प्रस्ताव के तहत ट्रेडिंग समय को बढ़ाकर 23 घंटे, हफ्ते में 5 दिन किया जाएगा।
कैसे बदलेगा Nasdaq का ट्रेडिंग स्ट्रक्चर?
रिपोर्ट के अनुसार, नए सिस्टम में Nasdaq दो सत्रों में काम करेगा:
डे सेशन: सुबह 4 बजे से रात 8 बजे तक (US समय)
मेंटेनेंस ब्रेक: 1 घंटा
नाइट सेशन: रात 9 बजे से अगले दिन सुबह 4 बजे तक
इस बदलाव का मकसद दुनियाभर के निवेशकों को अमेरिकी शेयरों में लगातार एक्सेस देना है।
क्यों अहम है Nasdaq का यह फैसला?
अमेरिकी शेयर बाजार का ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम में दबदबा है।
दुनिया के कुल लिस्टेड मार्केट वैल्यू का करीब दो-तिहाई हिस्सा US मार्केट के पास है
विदेशी निवेशकों की US इक्विटी में होल्डिंग करीब $17 ट्रिलियन तक पहुंच चुकी है
ऐसे में Nasdaq की 24 घंटे ट्रेडिंग ग्लोबल मार्केट की दिशा और गति दोनों बदल सकती है।
भारतीय शेयर बाजार पर तुरंत क्या असर पड़ेगा?
विशेषज्ञों के अनुसार, इस फैसले का असर भारतीय बाजारों की संरचना पर नहीं, बल्कि सूचना और सेंटिमेंट के समय पर पड़ेगा।
अभी तक:
US बाजार की चाल
भारतीय बाजार के अगले दिन ओपनिंग में दिखती है
लेकिन 24 घंटे ट्रेडिंग के बाद:
प्राइस डिस्कवरी लगातार होती रहेगी
भारतीय निवेशक US बाजार की हलचल को लाइव फॉलो कर पाएंगे
इससे बाजार की प्रतिक्रिया ज्यादा तेज हो सकती है।
ओपनिंग गैप और वोलैटिलिटी बढ़ने की आशंका
VT Markets के ग्लोबल स्ट्रैटेजी एक्सपर्ट Ross Maxwell के मुताबिक, 24×7 ट्रेडिंग से भारतीय बाजारों में:
ओपनिंग गैप ज्यादा देखने को मिल सकते हैं
शॉर्ट-टर्म वोलैटिलिटी बढ़ सकती है
खासतौर पर वे सेक्टर्स जो ग्लोबल संकेतों पर निर्भर हैं, ज्यादा प्रभावित होंगे।
कौन-से सेक्टर होंगे ज्यादा संवेदनशील?
विशेषज्ञों का मानना है कि:
IT सेक्टर
फार्मा सेक्टर
मेटल स्टॉक्स
सबसे ज्यादा असर में रहेंगे, क्योंकि इन कंपनियों की:
कमाई
ऑर्डर बुक
कच्चे माल की कीमतें
सीधे US और ग्लोबल मार्केट से जुड़ी होती हैं।
क्या भारतीय बाजार की मूल प्रकृति बदलेगी?
विशेषज्ञों का साफ कहना है कि:
भारत के शेयर बाजार की लॉन्ग-टर्म दिशा
अब भी घरेलू फैक्टर्स से तय होगी
जैसे:
भारत की आर्थिक ग्रोथ
कंपनियों की कमाई
सरकार और RBI की नीतियां
इसलिए Nasdaq की 24 घंटे ट्रेडिंग भारतीय बाजार को अस्थिर जरूर बना सकती है, लेकिन उसकी बुनियाद नहीं बदलेगी।
क्या आर्बिट्राज के मौके बनेंगे?
US और भारत के ट्रेडिंग समय में ओवरलैप बढ़ने से:
US-लिस्टेड ADR
और भारत में लिस्टेड स्टॉक्स
के बीच अस्थायी प्राइस डिफरेंस बन सकता है।
हालांकि:
ट्रांजैक्शन कॉस्ट
कैपिटल कंट्रोल
टेक्निकल लिमिटेशन
के कारण यह मौका ज्यादातर संस्थागत और प्रोफेशनल निवेशकों तक ही सीमित रहेगा।
रिटेल निवेशकों के लिए क्या मायने?
रिटेल निवेशकों के लिए:
सबसे बड़ा फायदा होगा बेहतर और स्पष्ट ग्लोबल क्यूज़
लेकिन साथ ही तेज उतार-चढ़ाव का जोखिम भी बढ़ेगा
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रिटेल निवेशक:
ओपनिंग के समय जल्दबाजी में ट्रेड न करें
लॉन्ग-टर्म निवेश रणनीति पर फोकस बनाए रखें
रुपया और करेंसी मार्केट पर असर
विदेशी मुद्रा बाजार पहले से ही 24 घंटे चलता है, इसलिए:
USD-INR पर कोई बड़ा संरचनात्मक बदलाव नहीं होगा
लेकिन:
US शेयरों में तेज मूवमेंट
विदेशी निवेश के फ्लो को प्रभावित कर सकता है
जिससे:
रुपये में इंट्राडे वोलैटिलिटी बढ़ सकती है।
SamaypeNews का विश्लेषण
Nasdaq की 24 घंटे ट्रेडिंग:
भारतीय बाजारों के लिए नई चुनौती है
लेकिन साथ ही बेहतर सूचना और तेज संकेत भी देगी
यह बदलाव शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स के लिए ज्यादा असरदार होगा, जबकि लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए घरेलू फैक्टर्स ही निर्णायक रहेंगे।
निष्कर्ष
Nasdaq का 24×7 ट्रेडिंग मॉडल:
ग्लोबल मार्केट को और ज्यादा कनेक्टेड बनाएगा
भारतीय शेयर बाजार में ओपनिंग गैप और वोलैटिलिटी बढ़ा सकता है
लेकिन भारत की मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था और ग्रोथ स्टोरी के चलते, यह असर सीमित और अस्थायी रहने की उम्मीद है।
