Nifty Metal में अचानक गिरावट, निवेशक क्यों हुए सतर्क?
शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी के बाद अब Nifty Metal Index में आई तेज गिरावट ने निवेशकों को असमंजस में डाल दिया है। बीते कुछ हफ्तों तक शानदार प्रदर्शन करने वाले मेटल शेयरों में अचानक बिकवाली देखने को मिली, जिससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या यह सिर्फ एक तकनीकी करेक्शन है या फिर गहरी गिरावट की शुरुआत?
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस गिरावट के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं, जिनमें मुनाफावसूली, ग्लोबल कमोडिटी इंडेक्स का रीबैलेंसिंग, और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता प्रमुख हैं।
ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में उथल-पुथल
कमोडिटी मार्केट्स में इस समय जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। Mirae Asset Sharekhan के कमोडिटी एनालिस्ट मोहम्मद इमरान के अनुसार, सालाना आधार पर होने वाली कमोडिटी इंडेक्स रीबैलेंसिंग के कारण बड़े फंड्स अलग-अलग सेक्टर्स में अपनी हिस्सेदारी बदल रहे हैं।
उन्होंने बताया कि:
कीमती धातुओं (Gold और Silver) में पहले ही करेक्शन शुरू हो चुका है
इंडेक्स वेटेज में असंतुलन के चलते बिकवाली का दबाव बढ़ा
गोल्ड-सिल्वर में दबाव, मेटल शेयरों पर असर
इमरान के मुताबिक, 2025 की शुरुआत में Bloomberg Commodity Index में गोल्ड और सिल्वर का कुल वेट करीब 18.8% था, जो साल के अंत तक बढ़कर लगभग 30% हो गया।
इतना ज्यादा वेट बढ़ने के बाद अब Mean Reversion की प्रक्रिया शुरू हो गई है, यानी:
कीमती धातुओं में मुनाफावसूली
फंड्स का पैसा अन्य सेक्टर्स की ओर शिफ्ट होना
इसका सीधा असर स्टील, एल्यूमिनियम, कॉपर और अन्य बेस मेटल स्टॉक्स पर भी पड़ा।
ब्रेंट क्रूड की ओर फंड्स का झुकाव?
एक दिलचस्प ट्रेंड यह भी देखने को मिल रहा है कि कुछ ग्लोबल फंड्स अब ब्रेंट क्रूड की ओर रुख कर सकते हैं।
कारण:
एनर्जी सेक्टर में अपेक्षाकृत कम वेट
भू-राजनीतिक तनाव
सप्लाई साइड रिस्क
यदि क्रूड में इनफ्लो बढ़ता है, तो मेटल सेक्टर से निकासी और तेज हो सकती है।
Nifty Metal: करेक्शन या ट्रेंड रिवर्सल?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि मौजूदा गिरावट को पूरी तरह नेगेटिव संकेत मानना जल्दबाजी होगी।
तकनीकी नजरिया
तेज रैली के बाद 8–12% का करेक्शन सामान्य माना जाता है
RSI और अन्य इंडिकेटर्स ओवरबॉट ज़ोन में थे
सपोर्ट लेवल्स के पास खरीदारी लौट सकती है
फंडामेंटल स्थिति
भारत और चीन में इंफ्रास्ट्रक्चर डिमांड बनी हुई है
EV, रिन्यूएबल एनर्जी और कंस्ट्रक्शन से मेटल डिमांड मजबूत
सप्लाई साइड पर अभी भी कई ग्लोबल चुनौतियां
लॉन्ग टर्म में मेटल सेक्टर क्यों मजबूत?
विशेषज्ञों के अनुसार, शॉर्ट टर्म वोलैटिलिटी के बावजूद लॉन्ग टर्म सप्लाई-डिमांड समीकरण मेटल सेक्टर के पक्ष में हैं।
मुख्य कारण:
भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर पुश
ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन
EV बैटरी और चार्जिंग नेटवर्क
डिफेंस और रेलवे में निवेश
इन सभी से स्टील, कॉपर और एल्यूमिनियम की मांग बनी रहेगी।
निवेशकों के लिए जोखिम क्या हैं?
हालांकि तस्वीर पूरी तरह नेगेटिव नहीं है, लेकिन कुछ जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता:
ग्लोबल मंदी की आशंका
डॉलर में मजबूती
चीन की मांग में अचानक गिरावट
फंड फ्लो में अस्थिरता
इसी वजह से एक्सपर्ट्स “Buy on Dips” की सलाह दे रहे हैं, न कि आक्रामक खरीदारी की।
निवेश रणनीति क्या हो?
शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स के लिए सावधानी जरूरी
लॉन्ग टर्म निवेशक क्वालिटी मेटल स्टॉक्स पर नजर रखें
एकमुश्त निवेश के बजाय स्टैगरड एंट्री बेहतर
सपोर्ट लेवल टूटने पर स्टॉप लॉस जरूरी
निष्कर्ष
Nifty Metal में आई मौजूदा गिरावट को फिलहाल तकनीकी करेक्शन माना जा रहा है, न कि किसी बड़े क्रैश की शुरुआत। ग्लोबल कमोडिटी इंडेक्स रीबैलेंसिंग और मुनाफावसूली ने अस्थायी दबाव बनाया है।
हालांकि, लॉन्ग टर्म फंडामेंटल्स अब भी मजबूत हैं। निवेशकों के लिए यह समय घबराने का नहीं, बल्कि समझदारी से रणनीति बनाने का है।


