देश के सबसे बड़े डिस्काउंट ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म Zerodha के सह-संस्थापक और CEO Nithin Kamath ने हाल ही में स्टॉक ब्रोकिंग इंडस्ट्री से जुड़ा एक अहम लेकिन कम चर्चित पहलू उजागर किया है। उन्होंने बताया कि ज़्यादातर स्टॉक ब्रोकर्स अपनी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की पूरी टेक्नोलॉजी खुद नहीं बनाते और न ही उसे पूरी तरह कंट्रोल करते हैं।
- OMS और RMS: Trading की असली रीढ़
- क्यों नहीं बनाते Brokers अपनी खुद की Technology?
- Trading Volume बढ़ा, लेकिन Dependency भी बढ़ी
- Zerodha का मॉडल क्यों है अलग
- निवेशकों के लिए क्या मतलब निकलता है?
- ऐप दिखने में Simple, सिस्टम अंदर से Complex
- हर तकनीकी दिक्कत Broker की गलती नहीं
- Low Brokerage = High Tech Risk नहीं
- Stock Market में Technology क्यों है सबसे अहम?
- Kamath का इशारा: इंडस्ट्री को और पारदर्शी होने की जरूरत
- SamaypeNews View: क्यों अहम है यह खुलासा
- निष्कर्ष (Conclusion)
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले Twitter) पर किए गए एक पोस्ट में Kamath ने कहा कि आम निवेशकों को लगता है कि ब्रोकर्स अपनी ऐप और ट्रेडिंग सिस्टम को खुद ऑपरेट करते हैं, लेकिन हकीकत इससे काफी अलग है।
OMS और RMS: Trading की असली रीढ़
Nithin Kamath के अनुसार, किसी भी ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म की सबसे महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी होती है:
OMS (Order Management System)
RMS (Risk Management System)
OMS वह सिस्टम होता है जो आपके खरीद-फरोख्त के ऑर्डर को एक्सचेंज तक पहुंचाता है, जबकि RMS यह सुनिश्चित करता है कि कोई निवेशक नियमों से ज्यादा जोखिम न ले सके।
Kamath ने बताया कि ज़्यादातर ब्रोकर्स इन दोनों अहम सिस्टम्स के लिए थर्ड-पार्टी टेक्नोलॉजी वेंडर्स पर निर्भर रहते हैं।
क्यों नहीं बनाते Brokers अपनी खुद की Technology?
Nithin Kamath ने इसके पीछे कई व्यावहारिक कारण बताए:
1. बेहद जटिल और महंगी प्रक्रिया
OMS और RMS जैसे सिस्टम को बनाना और मेंटेन करना आसान नहीं होता। इसके लिए:
हाई-लेवल टेक्नोलॉजी टीम
रेगुलेटरी नॉलेज
लगातार अपग्रेड और टेस्टिंग
की जरूरत होती है, जो छोटे और मिड-साइज ब्रोकर्स के लिए बहुत महंगा साबित होता है।
2. Regulatory Risk बहुत ज्यादा
Stock market में तकनीकी गड़बड़ी सीधे:
भारी जुर्माने
ट्रेडिंग बैन
लाइसेंस रद्द होने
जैसे जोखिम ला सकती है। इसलिए ब्रोकर्स अक्सर ऐसी टेक्नोलॉजी खुद बनाने से बचते हैं।
3. Established Vendors पर भरोसा
मार्केट में पहले से मौजूद टेक्नोलॉजी वेंडर्स:
सालों से एक्सचेंज से जुड़े होते हैं
सिस्टम पहले से टेस्टेड होता है
रेगुलेटरी अप्रूवल आसान होता है
इसलिए ब्रोकर्स उन्हें चुनना ज्यादा सुरक्षित समझते हैं।
Trading Volume बढ़ा, लेकिन Dependency भी बढ़ी
पिछले कुछ वर्षों में:
रिटेल निवेशकों की संख्या
डेली ट्रेडिंग वॉल्यूम
मोबाइल ट्रेडिंग ऐप्स का इस्तेमाल
तेजी से बढ़ा है। इसके बावजूद, Kamath का कहना है कि ब्रोकर्स की टेक्नोलॉजी पर पकड़ उतनी मजबूत नहीं है जितना लोग सोचते हैं।
कई बार:
एक्सचेंज आउटेज
OMS फेल होना
ट्रेडिंग रुकना
जैसी घटनाओं के लिए निवेशक सीधे ब्रोकर्स को दोष देते हैं, जबकि असली समस्या बैक-एंड टेक्नोलॉजी में होती है।
Zerodha का मॉडल क्यों है अलग
Nithin Kamath ने इशारों-इशारों में बताया कि Zerodha ने धीरे-धीरे अपनी टेक्नोलॉजी खुद विकसित करने पर निवेश किया है, जो इसे बाकी ब्रोकर्स से अलग बनाता है।
हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि:
पूरी तरह Self-Owned Tech Stack बनाना
लगातार रेगुलेटरी बदलावों के साथ चलना
एक लंबी और चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया है।
निवेशकों के लिए क्या मतलब निकलता है?
Kamath के इस खुलासे से निवेशकों को कुछ अहम बातें समझनी चाहिए:
ऐप दिखने में Simple, सिस्टम अंदर से Complex
जो ट्रेडिंग ऐप आपको एक क्लिक में ऑर्डर प्लेस करने देता है, उसके पीछे कई लेयर की टेक्नोलॉजी होती है।
हर तकनीकी दिक्कत Broker की गलती नहीं
कई बार समस्या थर्ड-पार्टी OMS या एक्सचेंज लेवल पर होती है।
Low Brokerage = High Tech Risk नहीं
कम ब्रोकरेज चार्ज का मतलब यह नहीं कि सिस्टम कमजोर है, बल्कि टेक्नोलॉजी का मॉडल अलग होता है।
Stock Market में Technology क्यों है सबसे अहम?
आज के दौर में:
High Frequency Trading
Algo Trading
Intraday Volumes
पूरी तरह टेक्नोलॉजी पर निर्भर हैं। एक सेकंड की देरी भी:
भारी नुकसान
गलत एंट्री
ऑर्डर फेल
जैसी समस्याएं पैदा कर सकती है।
Kamath का इशारा: इंडस्ट्री को और पारदर्शी होने की जरूरत
Nithin Kamath का मानना है कि:
ब्रोकर्स को टेक्नोलॉजी को लेकर ज्यादा पारदर्शी होना चाहिए
निवेशकों को यह समझना चाहिए कि ट्रेडिंग सिस्टम कैसे काम करता है
रेगुलेटर्स को भी टेक्नोलॉजी रिस्क पर फोकस बढ़ाना चाहिए
SamaypeNews View: क्यों अहम है यह खुलासा
SamaypeNews के मुताबिक, Kamath का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि:
यह निवेशकों की गलतफहमियों को दूर करता है
ब्रोकिंग इंडस्ट्री के टेक्नोलॉजी मॉडल को समझाता है
आने वाले समय में टेक-फर्स्ट ब्रोकर्स की अहमियत दिखाता है
निष्कर्ष (Conclusion)
ज़्यादातर Stock Brokers OMS-RMS खुद नहीं बनाते
थर्ड-पार्टी टेक्नोलॉजी पर निर्भरता आम है
टेक्नोलॉजी जटिल, महंगी और रेगुलेटेड है
Zerodha जैसे प्लेटफॉर्म धीरे-धीरे खुद का सिस्टम बना रहे हैं
Nithin Kamath का यह खुलासा बताता है कि Trading App जितनी आसान दिखती है, उसके पीछे की दुनिया उतनी ही जटिल है।
