भारतीय वित्तीय बाजार को नियंत्रित करने वाली प्रमुख संस्था Securities and Exchange Board of India यानी SEBI ने हाल ही में Commodity Derivatives सेक्टर से जुड़े नियमों में अहम बदलाव किए हैं।
सोमवार को जारी किए गए एक सर्कुलर में SEBI ने Settlement Guarantee Fund (SGF) से जुड़े नियमों को आसान बनाने का फैसला किया है। इस फैसले से Commodity Derivatives से जुड़े Clearing Corporations को कुछ हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।
नए नियमों का उद्देश्य बाजार में जोखिम प्रबंधन बनाए रखते हुए कारोबार को आसान बनाना बताया जा रहा है।
क्या होता है Settlement Guarantee Fund
Settlement Guarantee Fund एक ऐसा फंड होता है जिसे क्लियरिंग कॉरपोरेशन्स द्वारा बनाए रखा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि अगर किसी सदस्य द्वारा लेन-देन में डिफॉल्ट होता है तो बाजार में सेटलमेंट प्रक्रिया प्रभावित न हो।
यह फंड बाजार की स्थिरता बनाए रखने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
Commodity Derivatives मार्केट में क्लियरिंग कॉरपोरेशन्स को इस फंड का एक निश्चित स्तर बनाए रखना होता है ताकि किसी संभावित वित्तीय जोखिम से निपटा जा सके।
पुराने नियम क्या थे
SEBI के पुराने नियमों के तहत क्लियरिंग कॉरपोरेशन्स को स्ट्रेस टेस्टिंग के दौरान दो संभावित स्थितियों को ध्यान में रखना पड़ता था।
इनमें शामिल था:
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कम से कम दो क्लियरिंग सदस्यों के एक साथ डिफॉल्ट होने की स्थिति में क्रेडिट एक्सपोजर को कवर करना
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सभी क्लियरिंग सदस्यों के डिफॉल्ट की स्थिति में कुल क्रेडिट एक्सपोजर के कम से कम 50 प्रतिशत हिस्से को कवर करना
इन नियमों के कारण क्लियरिंग कॉरपोरेशन्स को काफी बड़े आकार का Settlement Guarantee Fund बनाए रखना पड़ता था।
नए नियमों में क्या बदलाव हुआ
SEBI ने नए सर्कुलर में इन नियमों को संशोधित किया है।
अब क्लियरिंग कॉरपोरेशन्स को स्ट्रेस टेस्टिंग के दौरान यह मानना होगा कि कम से कम तीन क्लियरिंग सदस्य और उनके सहयोगी एक साथ डिफॉल्ट कर सकते हैं, जिससे सबसे अधिक क्रेडिट एक्सपोजर पैदा होगा।
इसके साथ ही एक बड़ा बदलाव यह है कि सभी क्लियरिंग सदस्यों के डिफॉल्ट की स्थिति में 50 प्रतिशत क्रेडिट एक्सपोजर कवर करने की आवश्यकता को हटा दिया गया है।
इस बदलाव से Settlement Guarantee Fund के आकार में कमी आने की संभावना है।
बाजार प्रतिभागियों की मांग के बाद फैसला
SEBI ने अपने सर्कुलर में बताया कि यह बदलाव बाजार के प्रतिभागियों की ओर से की गई मांगों और सुझावों के आधार पर किया गया है।
इसके अलावा Risk Management Review Committee की सिफारिशों को भी ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
नियामक संस्था का कहना है कि यह कदम बाजार में Ease of Doing Business को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है।
क्लियरिंग सदस्यों पर पड़ेगा असर
इस नए नियम का सबसे बड़ा प्रभाव उन क्लियरिंग सदस्यों पर पड़ सकता है जो Settlement Guarantee Fund में योगदान करते हैं।
पहले बड़े फंड की आवश्यकता के कारण इन सदस्यों पर पूंजी का अधिक बोझ पड़ता था।
अब नए नियमों के तहत:
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फंड का आकार कम हो सकता है
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पूंजी का दबाव कम होगा
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बाजार में भागीदारी बढ़ सकती है
इससे Commodity Derivatives मार्केट में कारोबार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
SEBI को मिलेगी विशेष छूट देने की शक्ति
SEBI ने अपने नए सर्कुलर में एक और महत्वपूर्ण प्रावधान जोड़ा है।
इसके तहत SEBI को यह अधिकार दिया गया है कि वह विशेष परिस्थितियों में Settlement Guarantee Fund के नियमों में छूट या राहत दे सके।
यह छूट निम्न बातों को ध्यान में रखते हुए दी जा सकती है:
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बाजार की मौजूदा स्थिति
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जोखिम प्रबंधन प्रणाली की मजबूती
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वित्तीय स्थिरता से जुड़े पहलू
इससे भविष्य में बाजार की परिस्थितियों के अनुसार नियमों को लचीला बनाया जा सकेगा।
Commodity Derivatives बाजार के लिए महत्व
भारत में Commodity Derivatives मार्केट कृषि उत्पादों, धातुओं और ऊर्जा से जुड़े उत्पादों के व्यापार के लिए महत्वपूर्ण मंच है।
इस बाजार में पारदर्शिता और जोखिम प्रबंधन बनाए रखना बेहद जरूरी होता है।
SEBI का यह कदम बाजार के प्रतिभागियों को राहत देते हुए जोखिम प्रबंधन की प्रणाली को भी बनाए रखने की कोशिश माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे:
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बाजार में तरलता बढ़ सकती है
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नए प्रतिभागियों को आकर्षित किया जा सकता है
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ट्रेडिंग गतिविधियों में वृद्धि हो सकती है
बाजार विशेषज्ञों की राय
कई बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि SEBI का यह कदम संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है।
एक तरफ यह नियमों को आसान बनाता है, वहीं दूसरी तरफ जोखिम नियंत्रण की प्रणाली को पूरी तरह खत्म भी नहीं करता।
इससे निवेशकों और बाजार प्रतिभागियों का विश्वास बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
निष्कर्ष
SEBI द्वारा Settlement Guarantee Fund के नियमों में किया गया यह बदलाव Commodity Derivatives बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
नए नियमों से क्लियरिंग कॉरपोरेशन्स और क्लियरिंग सदस्यों पर पूंजी का दबाव कम हो सकता है और बाजार में कारोबार को बढ़ावा मिल सकता है।
हालांकि जोखिम प्रबंधन के पहलुओं को भी ध्यान में रखा गया है, जिससे बाजार की स्थिरता बनी रह सके।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि SEBI के इस फैसले का भारतीय Commodity Derivatives बाजार पर कितना सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
