FY26 में प्रॉप ट्रेडर्स की बड़ी छलांग: इंडेक्स ऑप्शंस में बाजार हिस्सेदारी 50% के करीब

सख्त नियमों से पहले प्रॉप ट्रेडर्स की तेज़ रफ्तार, अब आगे क्या?

Dev
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इंडेक्स ऑप्शंस में प्रॉप ट्रेडर्स की बढ़ती पकड़Prop Traders Index Options

भारतीय डेरिवेटिव बाजार में वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के दौरान एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। इंडेक्स ऑप्शंस सेगमेंट में प्रोप्राइटरी ट्रेडर्स (Prop Traders) की बाजार हिस्सेदारी में तेज़ उछाल दर्ज किया गया है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, ये ट्रेडर्स अब इस सेगमेंट में कुल ग्रॉस टर्नओवर का लगभग आधा हिस्सा नियंत्रित कर रहे हैं।

देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज National Stock Exchange of India Ltd (NSE) से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच इंडेक्स ऑप्शंस में प्रॉप ट्रेडर्स की हिस्सेदारी सालाना आधार पर 230 बेसिस पॉइंट बढ़कर 49.5% तक पहुंच गई है।

प्रॉप ट्रेडर्स की हिस्सेदारी में क्यों आई तेजी?

प्रॉप ट्रेडर्स वे संस्थाएं या ट्रेडिंग डेस्क होती हैं, जो अपने ही पूंजी से ट्रेड करती हैं। बीते कुछ वर्षों में टेक्नोलॉजी, एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग और हाई-फ्रीक्वेंसी स्ट्रैटेजीज के चलते इनकी मौजूदगी इंडेक्स ऑप्शंस में लगातार बढ़ी है।

FY26 के शुरुआती नौ महीनों में, जब रिटेल और कुछ संस्थागत निवेशक सतर्क नजर आए, तब प्रॉप ट्रेडर्स ने आक्रामक रूप से पोजिशन बनाईं। इसका नतीजा यह रहा कि उनका ग्रॉस प्रीमियम टर्नओवर में हिस्सा तेज़ी से बढ़ा।

1 अप्रैल से बदलने वाले नियम

हालांकि, बाजार के इस ट्रेंड के बीच एक अहम मोड़ आने वाला है। 1 अप्रैल से कैपिटल मार्केट से जुड़े फंडिंग नियमों में सख्ती लागू होने जा रही है।
इन नए नियमों के तहत:

  • 100% कोलैटरल अनिवार्यता

  • सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी

  • बैंकों द्वारा कैपिटल मार्केट एक्सपोजर पर सख्त निगरानी

इन बदलावों से प्रॉप ट्रेडर्स की कॉस्ट ऑफ कैपिटल में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की संभावना है।

बढ़ती लागत का असर क्या होगा?

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि नए नियम लागू होने के बाद प्रॉप ट्रेडर्स के लिए ट्रेडिंग उतनी आसान नहीं रहेगी।
जहां पहले अपेक्षाकृत कम मार्जिन और तेज़ टर्नओवर के दम पर बड़े वॉल्यूम बनाए जाते थे, वहीं अब:

  • अधिक पूंजी ब्लॉक होगी

  • लीवरेज सीमित होगा

  • ट्रेडिंग स्ट्रैटेजीज में सतर्कता बढ़ेगी

इसका सीधा असर इंडेक्स ऑप्शंस मार्केट की लिक्विडिटी और वॉल्यूम पर पड़ सकता है।

क्या घट सकती है बाजार की रफ्तार?

एनालिस्ट्स का कहना है कि FY26 की पहली तिमाही में डेरिवेटिव्स बाजार में कुछ हद तक दबाव देखने को मिल सकता है।
प्रॉप ट्रेडर्स की भागीदारी अगर घटती है, तो:

  • बिड-आस्क स्प्रेड बढ़ सकता है

  • इंट्राडे वॉल्यूम में गिरावट आ सकती है

  • वोलैटिलिटी में अस्थायी बदलाव संभव है

हालांकि, लंबी अवधि में बाजार खुद को नए नियमों के अनुसार ढाल सकता है।

रिटेल निवेशकों के लिए क्या मायने?

इंडेक्स ऑप्शंस में प्रॉप ट्रेडर्स की मजबूत मौजूदगी अब तक रिटेल निवेशकों के लिए दोधारी तलवार रही है।
एक तरफ:

  • बेहतर लिक्विडिटी

  • टाइट स्प्रेड

  • तेज़ प्राइस डिस्कवरी

तो दूसरी ओर:

  • हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग से अचानक मूवमेंट

  • अनुभवहीन निवेशकों के लिए जोखिम

अगर नए नियमों से प्रॉप ट्रेडर्स की सक्रियता कुछ कम होती है, तो रिटेल निवेशकों को अधिक सोच-समझकर ट्रेडिंग करनी होगी।

संस्थागत निवेशकों की भूमिका

दिलचस्प बात यह है कि जहां प्रॉप ट्रेडर्स का दबदबा बढ़ा है, वहीं कुछ पारंपरिक संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी स्थिर या सीमित रही।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, म्यूचुअल फंड और इंश्योरेंस कंपनियां अब भी डेरिवेटिव्स में हेजिंग तक सीमित हैं, जबकि प्रॉप ट्रेडर्स शुद्ध ट्रेडिंग रणनीतियों पर ज्यादा फोकस करते हैं।

आगे का रास्ता

FY26 के बाकी महीनों में इंडेक्स ऑप्शंस बाजार की दिशा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रॉप ट्रेडर्स नए नियमों के साथ खुद को कितनी जल्दी एडजस्ट कर पाते हैं।
संभावना है कि:

  • कुछ छोटे प्रॉप डेस्क बाजार से बाहर हों

  • बड़े और कैपिटल-स्ट्रॉन्ग प्लेयर्स अपनी पकड़ बनाए रखें

  • ट्रेडिंग वॉल्यूम में अल्पकालिक गिरावट के बाद स्थिरता आए

निष्कर्ष

FY26 में इंडेक्स ऑप्शंस बाजार में प्रॉप ट्रेडर्स की बढ़ती हिस्सेदारी यह दिखाती है कि डेरिवेटिव्स सेगमेंट में उनका प्रभाव कितना गहरा हो चुका है। लेकिन 1 अप्रैल से लागू होने वाले सख्त नियम इस ट्रेंड की परीक्षा लेने वाले हैं।
आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या प्रॉप ट्रेडर्स अपनी लगभग 50% हिस्सेदारी बरकरार रख पाते हैं या बाजार में एक नया संतुलन बनता है।

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