Dollar के सामने ढहता रुपया: 91.69 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद, RBI की गैर-मौजूदगी से बढ़ी चिंता

वैश्विक उथल-पुथल और विदेशी पूंजी निकासी के बीच भारतीय मुद्रा दबाव में

Dev
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डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक गिरावट दर्ज करता भारतीय रुपयारुपया रिकॉर्ड गिरावट

भारतीय मुद्रा बाजार में बुधवार को बड़ा झटका देखने को मिला, जब रुपया डॉलर के मुकाबले 91.69 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ। यह गिरावट केवल एक दिन की नहीं, बल्कि पिछले कई हफ्तों से चल रहे दबाव का नतीजा है। रुपया लगातार छठे सत्र में टूटा और निवेशकों के बीच चिंता का माहौल गहरा हो गया।

इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह बनी वैश्विक बॉन्ड बाजार में भारी बिकवाली, अमेरिका से आ रही राजनीतिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं, और सबसे अहम — भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) का बाजार में हस्तक्षेप न करना

कितना गिरा रुपया?

बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपया:

  • 91.7425 के इंट्रा-डे लो तक पहुंच गया

  • बाजार बंद होने पर 91.6950 पर क्लोज हुआ

  • पिछले सत्र में यह 90.9750 पर था

यानि एक ही दिन में रुपये में करीब 0.8% की गिरावट दर्ज की गई, जो बीते दो महीनों की सबसे बड़ी एक-दिवसीय गिरावट मानी जा रही है।

RBI की चुप्पी ने बढ़ाई गिरावट

ट्रेडर्स और फॉरेक्स विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार गिरावट इसलिए और तेज हो गई क्योंकि RBI ने डॉलर बेचकर बाजार को सपोर्ट नहीं दिया

आमतौर पर जब रुपया तेजी से गिरता है, तो RBI डॉलर सप्लाई बढ़ाकर गिरावट पर ब्रेक लगाने की कोशिश करता है। लेकिन इस बार:

  • कोई बड़ा इंटरवेंशन नहीं दिखा

  • बाजार को अपने हाल पर छोड़ दिया गया

  • जिससे रुपये पर दबाव और बढ़ गया

यही वजह है कि विदेशी निवेशकों और आयातकों ने तेजी से डॉलर खरीदना शुरू कर दिया।

वैश्विक कारण: सिर्फ भारत नहीं, पूरी दुनिया दबाव में

रुपये की कमजोरी के पीछे केवल घरेलू कारण नहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हालात काफी अस्थिर हैं:

वैश्विक बॉन्ड मार्केट में भूचाल

अमेरिका और यूरोप में बॉन्ड यील्ड तेजी से बढ़ रही है, जिससे उभरते बाजारों से पूंजी निकल रही है।

अमेरिका की आक्रामक विदेश नीति

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की धमकी जैसे बयान निवेशकों को असहज कर रहे हैं।

जोखिम से बचने की प्रवृत्ति

निवेशक अब:

  • डॉलर

  • सोना
    जैसी सुरक्षित संपत्तियों की ओर भाग रहे हैं।

इसका सीधा असर उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर पड़ रहा है, जिसमें रुपया भी शामिल है।

विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली

जनवरी 2026 में अब तक:

  • विदेशी निवेशकों ने करीब 3 अरब डॉलर भारतीय शेयर बाजार से निकाल लिए हैं

  • 2025 में कुल निकासी 19 अरब डॉलर से भी ज्यादा रही थी

इससे पहले ही:

  • भारतीय शेयर बाजार दबाव में था

  • रुपये पर डॉलर की मांग बढ़ रही थी

जब विदेशी निवेशक पैसा निकालते हैं, तो वे डॉलर में वापस ले जाते हैं — इससे रुपये की कीमत और गिर जाती है।

आयातक बनाम निर्यातक: संतुलन बिगड़ा

विश्लेषकों के मुताबिक:

  • आयातक लगातार डॉलर खरीद रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि रुपया और गिरेगा

  • निर्यातक डॉलर बेचने से बच रहे हैं

इस असंतुलन से:

  • डॉलर की मांग बढ़ गई

  • रुपये पर और दबाव आ गया

एशियाई मुद्राओं की कमजोरी भी बनी वजह

2025 में भारत को यह फायदा मिला था कि अन्य एशियाई मुद्राएं स्थिर थीं। लेकिन अब:

  • चीनी युआन

  • जापानी येन

  • कोरियाई वॉन

भी कमजोर हो रहे हैं, जिससे पूरा एशिया डॉलर के सामने फिसल रहा है।

अमेरिकी फैसलों पर टिकी निगाहें

निवेशक अब:

  • डावोस में राष्ट्रपति ट्रंप के भाषण

  • अमेरिका की ट्रेड पॉलिसी

  • और फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता से जुड़े घटनाक्रम

पर नजर रखे हुए हैं। इनसे तय होगा कि डॉलर कितना और मजबूत होगा।

एक्सपर्ट क्या कह रहे हैं?

शिनहान बैंक इंडिया के ट्रेजरी हेड कुनाल सोधनी के मुताबिक:

“USD/INR इस समय पूरी तरह फ्लो-ड्रिवन है। जब तक विदेशी पूंजी बाहर जाती रहेगी, रुपया दबाव में रहेगा। RBI केवल अत्यधिक उतार-चढ़ाव में ही हस्तक्षेप करेगा।”

India Forex Advisors का कहना है:

“रुपया अब कॉरपोरेट डिमांड और पोर्टफोलियो फ्लो पर ज्यादा निर्भर हो गया है। वैश्विक जोखिम बढ़ा तो गिरावट और गहरी हो सकती है।”

आगे क्या?

यदि:

  • विदेशी निवेश नहीं लौटता

  • अमेरिका से कोई पॉजिटिव ट्रेड डील संकेत नहीं मिलता

  • और वैश्विक अनिश्चितता बनी रहती है

तो रुपया आने वाले दिनों में और दबाव झेल सकता है।

हालांकि RBI जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप कर सकता है, लेकिन फिलहाल बाजार को अपने स्तर खुद खोजने दिया जा रहा है।

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