2025 में Sensex के मुकाबले Smallcap–Midcap शेयर पड़े फीके, लेकिन आगे का आउटलुक सतर्क आशावादी

तेज रैली के बाद ठहराव, लेकिन चुनिंदा शेयरों में अब भी उम्मीद

Dev
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तेज रैली के बाद ठहराव, लेकिन चुनिंदा शेयरों में अब भी उम्मीद2025 में Sensex के मुकाबले स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों का कमजोर प्रदर्शन

साल 2025 भारतीय शेयर बाजार के लिए मिला-जुला साबित हुआ है। जहां एक ओर ब्लू-चिप शेयरों से भरा Sensex मजबूत प्रदर्शन करता नजर आया, वहीं दूसरी ओर Smallcap और Midcap शेयर इस साल अपने बड़े साथियों से पीछे रह गए। बीते दो वर्षों की जबरदस्त तेजी के बाद इन सेगमेंट्स में मुनाफावसूली और वैल्यूएशन का दबाव साफ देखने को मिला।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट कोई अचानक आई कमजोरी नहीं, बल्कि बाजार का नेचुरल नॉर्मलाइजेशन है। हालांकि, आगे की राह को लेकर बाजार जानकार सतर्क आशावादी नजर आ रहे हैं।

2025 में कैसा रहा Smallcap, Midcap और Sensex का प्रदर्शन?

24 दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो:

  • BSE Sensex:
    7,269 अंक की तेजी
    करीब 9.30% का रिटर्न

  • BSE Midcap Index:
    सिर्फ 360 अंक की बढ़त
    महज 0.77% की तेजी

  • BSE Smallcap Index:
    3,686 अंक की गिरावट
    करीब 6.68% की कमजोरी

इन आंकड़ों से साफ है कि निवेशकों ने इस साल जोखिम से दूरी बनाते हुए बड़े और स्थिर शेयरों की ओर रुख किया।

Smallcap और Midcap क्यों रहे दबाव में?

पिछले दो साल की बेमिसाल तेजी

2023 और 2024 में स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों ने रिकॉर्ड रिटर्न दिए थे।

  • 2023 में Smallcap ने करीब 47%

  • Midcap ने लगभग 45% का उछाल दिखाया

2024 में भी यह ट्रेंड जारी रहा। इस तेज रैली ने वैल्यूएशन को काफी ऊँचा पहुंचा दिया, जो 2025 में करेक्शन का कारण बना।

वैल्यूएशन और मुनाफावसूली

विशेषज्ञों के मुताबिक, कई छोटी कंपनियों में शेयर कीमतें उनकी कमाई की तुलना में काफी आगे निकल चुकी थीं। जैसे ही बाजार में अनिश्चितता बढ़ी, निवेशकों ने मुनाफा निकालना शुरू कर दिया।

रुपये की कमजोरी और वैश्विक अनिश्चितता

अमेरिका-भारत ट्रेड डील को लेकर अनिश्चितता, डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट और वैश्विक स्तर पर सख्त वित्तीय हालात ने जोखिम से बचने की प्रवृत्ति को बढ़ाया।

एफआईआई की लगातार बिकवाली

Foreign Institutional Investors (FII) आमतौर पर बड़े और लिक्विड शेयरों को प्राथमिकता देते हैं। 2025 में उनकी बिकवाली ने खासतौर पर स्मॉल और मिडकैप सेगमेंट पर दबाव डाला।

एक्सपर्ट्स क्या कह रहे हैं?

Ponmudi R, CEO, Enrich Money के मुताबिक,

“2025 में स्मॉलकैप और मिडकैप का कमजोर प्रदर्शन बाजार के सामान्यीकरण का नतीजा है। निवेशकों ने अनिश्चित माहौल में मजबूत बैलेंस शीट वाले लार्जकैप शेयरों को चुना।”

N ArunaGiri, CEO, TrustLine Holdings का कहना है कि,

“जब बाजार टाइम करेक्शन के दौर से गुजरता है, तब स्मॉल और मिडकैप का पिछड़ना स्वाभाविक होता है। इनका बीटा ज्यादा होता है, जिससे ये ज्यादा अस्थिर रहते हैं।”

Ravi Singh, Chief Research Officer, Master Capital Services के अनुसार,

“एफआईआई बिकवाली, रुपये की कमजोरी और स्लो अर्निंग्स ने छोटे शेयरों से पूंजी को दूर रखा। लेकिन आगे चुनिंदा स्टॉक्स में मौके बन सकते हैं।”

52-Week High और Low की तस्वीर

  • BSE Midcap Index

    • 52-Week High: 47,549

    • ऑल-टाइम हाई: 49,701

  • BSE Smallcap Index

    • 52-Week High: 56,497

    • 52-Week Low: 41,013

  • Sensex

    • लाइफटाइम हाई: 86,159

यह आंकड़े दिखाते हैं कि जहां Sensex नई ऊंचाइयों पर पहुंचा, वहीं स्मॉलकैप और मिडकैप अपने पीक से काफी नीचे रहे।

आगे का आउटलुक: सतर्क आशावाद क्यों?

हालांकि 2025 स्मॉलकैप और मिडकैप निवेशकों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन आगे की तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं है।

वैल्यूएशन अब पहले के मुकाबले ज्यादा संतुलित
भारत की GDP ग्रोथ स्थिर
घरेलू निवेशकों की मजबूत लिक्विडिटी
रुपये में स्थिरता आने की उम्मीद

एक्सपर्ट्स मानते हैं कि आने वाले समय में ब्रॉड-बेस्ड रैली की बजाय स्टॉक-स्पेसिफिक मौके मिलेंगे।

निवेशकों के लिए क्या रणनीति होनी चाहिए?

  • क्वालिटी स्मॉल और मिडकैप शेयरों पर फोकस

  • मजबूत बैलेंस शीट और अर्निंग विज़िबिलिटी देखें

  • शॉर्ट-टर्म उतार-चढ़ाव से बचें

  • लार्जकैप को पोर्टफोलियो में स्थिरता के लिए रखें

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