Suzlon Energy Share में बड़ा अपडेट: कस्टम विभाग ने लगाया ₹9.60 करोड़ का जुर्माना, कंपनी करेगी अपील

जुर्माना, 52-वीक लो और Q3 रिजल्ट—Suzlon Energy के लिए मिला-जुला संकेत

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Suzlon Energy पर कस्टम ड्यूटी से जुड़ा ₹9.60 करोड़ का जुर्माना, शेयर दबाव में।Stock Market News Hindi

रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की प्रमुख कंपनी Suzlon Energy Ltd को लेकर एक अहम अपडेट सामने आया है। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में बताया है कि चेन्नई-III के प्रिंसिपल कमिश्नर ऑफ कस्टम्स ने ₹9.60 करोड़ की कुल पेनल्टी लगाई है।

यह पेनल्टी Suzlon Global Services Ltd पर लगाई गई थी, जो अब Suzlon Energy में मर्ज हो चुकी है। मामला इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (IGST) के तहत कस्टम ड्यूटी की कथित शॉर्ट पेमेंट से जुड़ा है।

क्या है पूरा मामला?

19 फरवरी 2026 की एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, यह आदेश चेन्नई-III कमिश्नरेट के प्रिंसिपल कमिश्नर ऑफ कस्टम्स द्वारा पारित किया गया है।

कुल पेनल्टी राशि ₹9,60,45,306 बताई गई है। हालांकि कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह देनदारी अंतिम नहीं है और आगे की कानूनी कार्यवाही के परिणाम पर निर्भर करेगी।

कंपनी ने अपने बयान में कहा है:

“हम इस आदेश के खिलाफ उचित प्राधिकरण के समक्ष अपील दायर करेंगे।”

इससे संकेत मिलता है कि मामला अभी कानूनी समीक्षा के दायरे में रहेगा।

शेयर पर दबाव जारी

शुक्रवार के सत्र में Suzlon Energy के शेयर लगभग ₹44.95 पर कारोबार करते दिखे, जो करीब 0.66% की गिरावट को दर्शाता है।

  • ओपनिंग: ₹45.20

  • इंट्रा-डे लो: ₹44.71

  • 52-वीक लो: ₹44.71

  • 52-वीक हाई: ₹74.30

स्पष्ट है कि शेयर अपने उच्चतम स्तर से काफी नीचे ट्रेड कर रहा है। कंपनी का मार्केट कैप लगभग ₹62,070 करोड़ रहा।

हाल के महीनों में शेयर में कमजोरी बनी हुई है, हालांकि लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए रिन्यूएबल सेक्टर की ग्रोथ कहानी अभी भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

Q3 FY26 रिजल्ट: आय बढ़ी, लेकिन मुनाफे में गिरावट

कंपनी के तिमाही नतीजों पर नजर डालें तो तस्वीर थोड़ी मिश्रित दिखती है।

कुल आय (Total Income)

Q3 FY26 में कंपनी की कुल आय ₹4,258.61 करोड़ रही, जो पिछली तिमाही ₹3,897.33 करोड़ से 9.3% अधिक है।

प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT)

PBT मामूली बढ़कर ₹566.75 करोड़ हो गया, जो Q2 FY26 में ₹562.50 करोड़ था।

नेट प्रॉफिट (Net Profit)

यहां सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिला।
नेट प्रॉफिट ₹1,279.44 करोड़ से घटकर ₹445.28 करोड़ रह गया।

गिरावट का मुख्य कारण ₹119.17 करोड़ का डिफर्ड टैक्स चार्ज रहा। पिछली तिमाही में कंपनी को ₹718.18 करोड़ का डिफर्ड टैक्स क्रेडिट मिला था, जिससे मुनाफा असाधारण रूप से अधिक दिखा था।

साल-दर-साल प्रदर्शन मजबूत

हालांकि तिमाही आधार पर गिरावट दिखी, लेकिन साल-दर-साल (YoY) आधार पर कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहा।

  • कुल आय में 41.9% की वृद्धि

  • PBT में 44.8% की बढ़ोतरी

  • नेट प्रॉफिट में 14.8% की वृद्धि

FY26 के पहले नौ महीनों में कुल आय 57.9% बढ़कर ₹11,321.13 करोड़ हो गई।

नेट प्रॉफिट ₹2,049.04 करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष के समान अवधि के ₹890.65 करोड़ से दोगुना से भी अधिक है।

यह दर्शाता है कि कंपनी की ऑपरेशनल परफॉर्मेंस स्थिर बनी हुई है और तिमाही गिरावट मुख्य रूप से टैक्स एडजस्टमेंट से जुड़ी है।

पहले भी हट चुका है एक जुर्माना

इससे पहले एक अलग मामले में अहमदाबाद के डिप्टी कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स द्वारा ₹1.02 करोड़ का जुर्माना लगाया गया था, जो FY17 में पीएफ और ESI भुगतान में देरी से जुड़ा था।

बाद में ताजा कार्यवाही के बाद वह पेनल्टी पूरी तरह हटा दी गई थी। इससे यह संकेत मिलता है कि कंपनी कानूनी मोर्चे पर सक्रिय रणनीति अपनाती रही है।

निवेशकों के लिए क्या संकेत?

  1. रेगुलेटरी जोखिम बना रहेगा – जब तक अपील का फैसला नहीं आता, अनिश्चितता बनी रह सकती है।

  2. ऑपरेशनल मजबूती सकारात्मक संकेत – टैक्स प्रभाव को छोड़ दें तो कंपनी का बिजनेस स्थिर दिखता है।

  3. शेयर वैल्यूएशन आकर्षक हो सकता है – 52-वीक लो के करीब ट्रेडिंग लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए अवसर बन सकती है, लेकिन जोखिम का आकलन जरूरी है।

रिन्यूएबल सेक्टर का व्यापक परिदृश्य

भारत में ग्रीन एनर्जी और विंड पावर सेक्टर को सरकार का मजबूत समर्थन मिल रहा है। ऐसे में Suzlon जैसी कंपनियों के लिए दीर्घकालिक ग्रोथ की संभावनाएं बनी हुई हैं।

हालांकि, रेगुलेटरी और टैक्स से जुड़े मामलों का अल्पकालिक असर शेयर प्राइस पर दिख सकता है।

निष्कर्ष

Suzlon Energy के लिए यह अपडेट अल्पकालिक दबाव जरूर ला सकता है, लेकिन कंपनी ने साफ किया है कि वह आदेश के खिलाफ अपील करेगी।

Q3 के आंकड़े बताते हैं कि ऑपरेशनल स्तर पर प्रदर्शन स्थिर है और वार्षिक आधार पर मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है।

निवेशकों के लिए यह समय सतर्क विश्लेषण का है—जहां कानूनी जोखिम और लंबी अवधि की ग्रोथ संभावनाओं दोनों को संतुलित नजर से देखना जरूरी है।

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