2026 में जब वैश्विक शेयर बाजार, खासतौर पर US मार्केट्स, ऊँचे वैल्यूएशन और टेक्नोलॉजी आधारित उम्मीदों के दौर से गुजर रहे हैं, ऐसे समय में दिग्गज निवेशक Howard Marks की निवेश फिलॉसफी पहले से कहीं ज़्यादा प्रासंगिक हो जाती है। Howard Marks लंबे समय से इस बात पर ज़ोर देते आए हैं कि निवेश की सफलता का रास्ता भविष्य की सटीक भविष्यवाणी करने से नहीं, बल्कि यह समझने से निकलता है कि बाजार इस समय अपने मार्केट साइकिल के किस चरण में खड़ा है।
Howard Marks की प्रसिद्ध किताब Mastering the Market Cycle का मूल विचार यही है कि बाजार हमेशा एक सीधी रेखा में नहीं चलता। कभी उम्मीदें हावी होती हैं, तो कभी डर। निवेशक अगर इन उतार-चढ़ावों को पहचानना सीख जाए, तो वह जोखिम को बेहतर ढंग से मैनेज कर सकता है।
ऊँचे वैल्यूएशन और टेक्नोलॉजी का उत्साह
मौजूदा दौर में US इक्विटी मार्केट्स, खासकर AI और चुनिंदा टेक्नोलॉजी कंपनियों के कारण, रिकॉर्ड वैल्यूएशन के करीब कारोबार कर रहे हैं। निवेशक भविष्य की ग्रोथ को लेकर इतने आशावादी हैं कि वे लंबे समय की कहानियों के लिए आज ही भारी कीमत चुकाने को तैयार हैं। हालांकि यह स्थिति अभी पूरी तरह “बबल” नहीं कही जा सकती, लेकिन Howard Marks मानते हैं कि ऐसे माहौल में निराशा की थोड़ी सी भी वजह बाजार को झटका दे सकती है।
AI, ऑटोमेशन और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसे थीम्स ने बाजार में एकतरफा तेजी पैदा की है। लेकिन इतिहास गवाह है कि जब रिटर्न्स कुछ ही शेयरों तक सिमट जाते हैं, तो यह अक्सर साइकिल के उस चरण की ओर इशारा करता है जहाँ आशावाद वास्तविकता से आगे निकलने लगता है।
ब्याज दरें, सेंट्रल बैंक और वैश्विक जोखिम
दुनिया भर के सेंट्रल बैंक फिलहाल सख्त मौद्रिक नीति के अंतिम चरण में हैं। ब्याज दरों में तेजी से बढ़ोतरी के बाद अब बाजार इस उम्मीद में है कि आगे राहत मिल सकती है। लेकिन भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक आर्थिक सुस्ती और लिक्विडिटी में उतार-चढ़ाव अभी भी बड़े जोखिम बने हुए हैं।
Howard Marks के अनुसार, ऐसे समय में बाइनरी सोच—यानी पूरी तरह बुलिश या पूरी तरह बेयरिश होना—निवेशकों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इसकी बजाय वह “रिस्क कैलिब्रेशन” पर ज़ोर देते हैं, जहाँ पोर्टफोलियो को धीरे-धीरे बाजार संकेतों के अनुसार एडजस्ट किया जाता है।
जोखिम को समझना, न कि उससे भागना
Marks की सबसे अहम सीख यही है कि जोखिम तब सबसे कम नहीं होता जब सब कुछ सुरक्षित लगता है, बल्कि तब होता है जब निवेशक डर के कारण बाजार से दूर भागते हैं। इसके उलट, जब हर कोई आत्मविश्वास से भरा होता है और जोखिम को नज़रअंदाज़ करने लगता है, तब असली खतरा पैदा होता है।
मार्केट साइकिल का यह मनोवैज्ञानिक पहलू निवेशकों को अक्सर गुमराह करता है। लगातार तेजी से लोगों को लगता है कि गिरावट अब आएगी ही नहीं, जबकि हकीकत में वही समय सबसे ज़्यादा सतर्क रहने का होता है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या सीख?
भारतीय शेयर बाजार अभी भी मजबूत स्ट्रक्चरल ग्रोथ स्टोरी पर टिका है। कैपेक्स, मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और कंजम्पशन जैसे सेक्टर्स लंबी अवधि में अवसर प्रदान करते हैं। लेकिन Howard Marks की फिलॉसफी भारतीय निवेशकों को यह सिखाती है कि अब ब्रॉड-बेस्ड आसान रिटर्न्स का दौर खत्म हो रहा है।
आज के बाजार में सही स्टॉक चुनना और वैल्यूएशन को समझना पहले से कहीं ज़्यादा ज़रूरी हो गया है। हर अच्छी कंपनी अच्छा निवेश नहीं होती, अगर उसकी कीमत बहुत ज़्यादा हो।
साइकिल कभी खत्म नहीं होती
Howard Marks बार-बार यह दोहराते हैं कि मार्केट साइकिल कोई थ्योरी नहीं, बल्कि एक वास्तविकता है। यह साइकिल इंसानी व्यवहार, लालच और डर से बनती है। जो निवेशक इसे पहचान लेते हैं, वे न सिर्फ नुकसान से बचते हैं, बल्कि गिरावट के समय बेहतर मौके भी खोज पाते हैं।
उनका मानना है कि जब बाजार में अत्यधिक उत्साह हो, तो जोखिम कम करना समझदारी है, और जब डर हावी हो, तो धैर्य के साथ अवसर तलाशने चाहिए।
निष्कर्ष
AI आधारित उम्मीदें, वैश्विक लिक्विडिटी में बदलाव और ऊँचे वैल्यूएशन के इस दौर में Howard Marks की निवेश सोच एक मजबूत मार्गदर्शन देती है। 2026 में सफल निवेश का मंत्र किसी बड़े अनुमान में नहीं, बल्कि धैर्य, संतुलन और जोखिम के प्रति सम्मान में छिपा है।
