नए साल की शुरुआत के साथ ही Wall Street पर निवेशकों की नजर अब पूरी तरह से अमेरिकी कंपनियों की कमाई (Corporate Earnings) पर टिक गई है। घरेलू नीतियों से जुड़ी घोषणाएं, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और फेडरल रिज़र्व को लेकर बढ़ती चर्चाओं के बीच, बाज़ार को संभालने की जिम्मेदारी अब कंपनियों के नतीजों पर आ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कंपनियों के तिमाही नतीजे उम्मीद से बेहतर रहते हैं, तो यह अमेरिकी शेयर बाजार की मौजूदा तेजी को बनाए रखने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
2025 की मजबूती के बाद 2026 की उम्मीदें
साल 2025 में शानदार प्रदर्शन के बाद, अमेरिकी शेयर बाजारों ने नए साल की शुरुआत भी मजबूती के साथ की है। हालांकि बीते हफ्ते बाजार में हल्की गिरावट देखी गई और वोलैटिलिटी इंडेक्स में बढ़ोतरी हुई, फिर भी प्रमुख इंडेक्स अपने रिकॉर्ड स्तरों के आसपास बने हुए हैं।
S&P 500 इंडेक्स में सप्ताह के दौरान मामूली गिरावट आई, लेकिन बाजार की बुनियादी धारणा अब भी सकारात्मक बनी हुई है।
“कमाई को ही बनना होगा खबर” – मार्केट एक्सपर्ट
B Riley Wealth के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट Art Hogan का कहना है कि मौजूदा माहौल में कमाई का मजबूत होना बेहद जरूरी है।
उनके मुताबिक,
“भू-राजनीति और नीतियों को लेकर जितना ज्यादा शोर है, ऐसे में यह अनिवार्य हो गया है कि कमाई ही न्यूज़ साइकिल को आगे बढ़ाए।”
उन्होंने यह भी कहा कि जो कंपनियां न केवल इस तिमाही में बेहतर प्रदर्शन करेंगी, बल्कि 2026 के लिए मजबूत गाइडेंस देंगी, उन्हें बाजार से खास इनाम मिल सकता है।
Netflix से Intel तक, बड़े नतीजों का हफ्ता
आने वाला हफ्ता कॉर्पोरेट अर्निंग्स के लिहाज़ से काफी अहम रहने वाला है। बैंकिंग सेक्टर के बाद अब टेक, हेल्थकेयर और मीडिया से जुड़ी दिग्गज कंपनियां अपने नतीजे पेश करेंगी।
अगले हफ्ते जिन कंपनियों पर सबसे ज्यादा नजर रहेगी, उनमें शामिल हैं:
Netflix
Johnson & Johnson
Intel
खासतौर पर Netflix के नतीजों पर बाजार की नजर इसलिए भी रहेगी क्योंकि कंपनी मीडिया सेक्टर में चल रही बड़ी डील्स और प्रतिस्पर्धा का हिस्सा है, जिससे पूरे इंडस्ट्री पर असर पड़ सकता है।
बैंकिंग सेक्टर पर दबाव
हालांकि 2025 में बैंकिंग शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन किया था, लेकिन हालिया नतीजों के बाद JPMorgan और Wells Fargo जैसे बड़े बैंकों के शेयरों में हल्की गिरावट देखी गई।
इसका एक बड़ा कारण अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का प्रस्ताव माना जा रहा है, जिसमें:
क्रेडिट कार्ड ब्याज दरों पर 10% की सीमा
Wall Street कंपनियों को सिंगल-फैमिली घरों की खरीद से रोकने की योजना
इन प्रस्तावों ने बैंकिंग सेक्टर को चौंका दिया और निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।
अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर भी अनिश्चितता
अमेरिका के बाहर भी हालात निवेशकों को सतर्क कर रहे हैं। ईरान को लेकर बयानबाज़ी और संभावित हस्तक्षेप की धमकियों ने वैश्विक बाजारों में हलचल बढ़ाई है।
हालांकि बाद में अमेरिकी प्रशासन ने “wait-and-see” का रुख अपनाया, फिर भी निवेशकों की चिंता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
इस अनिश्चितता का असर:
सोने जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों में तेजी
एनर्जी सेक्टर में उतार-चढ़ाव
पर देखा गया है, हालांकि अब तक प्रमुख शेयर सूचकांकों ने इन घटनाओं को काफी हद तक नजरअंदाज किया है।
निवेशकों की सोच क्या कहती है?
D.A. Davidson के को-चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर James Ragan के अनुसार,
“बाजार ने अब तक भू-राजनीतिक और घरेलू राजनीतिक मुद्दों को काफी हद तक नजरअंदाज किया है, लेकिन चिंता की वजहें जरूर मौजूद हैं।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर प्रशासन की ओर से कोई बड़ा और आक्रामक फैसला आता है, तो बाजार को तय करना होगा कि उस पर प्रतिक्रिया देना जरूरी है या नहीं।
फेडरल रिज़र्व की स्वतंत्रता पर भी नजर
निवेशकों के लिए एक और बड़ा मुद्दा Federal Reserve की स्वतंत्रता को लेकर चल रही चर्चाएं हैं। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट जल्द ही:
वैश्विक टैरिफ्स की वैधता
फेड गवर्नर Lisa Cook को हटाने से जुड़े मामले
पर सुनवाई कर सकता है।
इसके अलावा, हाल ही में फेड चेयरमैन Jerome Powell को लेकर आई जांच की खबरों ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है।
हालांकि राष्ट्रपति Trump ने स्पष्ट किया है कि वे Powell को हटाने की योजना नहीं बना रहे हैं, लेकिन उनका कार्यकाल मई में समाप्त हो रहा है, जिससे आने वाले समय में नई नियुक्ति पर सबकी नजर रहेगी।
फेड की आज़ादी क्यों है अहम?
Wedbush के विश्लेषकों का मानना है कि फेड चेयरमैन के कार्यकाल का अंत एक “महत्वपूर्ण मोड़” साबित हो सकता है।
अगर फेड की स्वतंत्रता पर सवाल गहराते हैं, तो:
महंगाई बढ़ने की आशंका
अमेरिकी कर्ज की लागत में इजाफा
जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं, जिसका असर सीधे बाजार पर पड़ेगा।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, आने वाला हफ्ता Wall Street के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकता है। जहां एक ओर नीति, टैरिफ और भू-राजनीति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर कॉर्पोरेट कमाई बाजार को दिशा देने वाली सबसे बड़ी ताकत बन सकती है।
अगर कंपनियों के नतीजे और 2026 के आउटलुक मजबूत रहते हैं, तो बाजार मौजूदा चुनौतियों के बावजूद अपनी मजबूती बनाए रख सकता है।
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