शेयर बाजार में लगातार तीसरे हफ्ते तेजी, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और विदेशी निवेश से सेंसेक्स-निफ्टी को मिला सहारा

कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, विदेशी निवेश और RBI के फैसलों ने शेयर बाजार को लगातार तीसरे सप्ताह भी दी मजबूती।

Dev
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लगातार तीसरे सप्ताह बढ़त के साथ बंद हुआ भारतीय शेयर बाजार, सेंसेक्स और निफ्टी में निवेशकों का भरोसा बरकरार।Sensex Nifty gain for third consecutive week due to crude oil price fall and RBI support Hindi News

भारतीय शेयर बाजार ने एक बार फिर अपनी मजबूती दिखाई है। सेंसेक्स और निफ्टी लगातार तीसरे सप्ताह बढ़त के साथ बंद हुए, जो वर्ष 2026 का अब तक का सबसे लंबा साप्ताहिक विनिंग स्ट्रीक माना जा रहा है। वैश्विक स्तर पर कई चुनौतियों के बावजूद घरेलू बाजार में निवेशकों का भरोसा कायम रहा। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सकारात्मक कदम और विदेशी निवेशकों की सक्रियता ने बाजार को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई।

हालांकि सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन बाजार ने शुरुआती बढ़त का बड़ा हिस्सा गंवा दिया, लेकिन फिर भी प्रमुख सूचकांक हरे निशान में बंद होने में सफल रहे। निवेशकों के लिए यह सप्ताह कई सकारात्मक संकेत छोड़ गया, वहीं कुछ चुनौतियां भी सामने आईं, जिन पर आने वाले दिनों में बाजार की नजर रहेगी।

सेंसेक्स और निफ्टी ने दर्ज की लगातार तीसरे सप्ताह बढ़त

सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन सेंसेक्स 109 अंकों की बढ़त के साथ 77,101 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 34 अंक चढ़कर 24,056 के स्तर पर पहुंच गया।

साप्ताहिक आधार पर सेंसेक्स में लगभग 0.4 प्रतिशत और निफ्टी में 0.2 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। यह लगातार तीसरा सप्ताह है जब दोनों प्रमुख सूचकांक सकारात्मक रिटर्न देने में सफल रहे हैं। इससे पहले दिसंबर 2025 में बाजार ने इतनी लंबी साप्ताहिक तेजी देखी थी।

हालांकि बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन घटकर करीब 475 लाख करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले कारोबारी दिन की तुलना में लगभग 1.3 लाख करोड़ रुपये कम है।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट बनी सबसे बड़ा सहारा

इस सप्ताह बाजार की मजबूती का सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट रही।

ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत घटकर लगभग 73.5 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई, जो ईरान-इजरायल तनाव से पहले के स्तर के करीब है।

विशेषज्ञों का मानना है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल टैंकरों की आवाजाही सामान्य होने लगी है। इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे बढ़ने से वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट की आशंकाएं कम हुई हैं।

भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट हमेशा सकारात्मक मानी जाती है क्योंकि इससे आयात बिल कम होता है और महंगाई पर भी नियंत्रण रखने में मदद मिलती है।

RBI के फैसलों ने बढ़ाया निवेशकों का भरोसा

भारतीय रिजर्व बैंक के हालिया कदमों ने भी बाजार को मजबूती दी।

आरबीआई गवर्नर की ओर से ब्याज दरों को लेकर दिए गए संतुलित संकेतों ने निवेशकों की चिंताओं को कम किया। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने विदेशी मुद्रा जमा (Foreign Currency Deposits) के खिलाफ बैंकों को ऋण देने को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया, जिससे बैंकिंग सेक्टर में सकारात्मक माहौल बना।

विशेषज्ञों का कहना है कि इन कदमों से विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ने की संभावना है, जिसका असर आने वाले महीनों में रुपये और बाजार दोनों पर सकारात्मक दिख सकता है।

विदेशी निवेशकों की वापसी से मिला समर्थन

हाल के दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की भारतीय बाजार में वापसी भी बाजार के लिए अच्छी खबर रही।

विदेशी निवेशकों की खरीदारी से खासकर बैंकिंग और ऑटो सेक्टर को मजबूती मिली। घरेलू निवेशकों ने भी इस तेजी में सक्रिय भागीदारी दिखाई, जिससे बाजार में स्थिरता बनी रही।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां सामान्य रहती हैं तो विदेशी निवेश का प्रवाह आगे भी जारी रह सकता है।

PMI के कमजोर आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

जहां एक ओर बाजार को कई सकारात्मक संकेत मिले, वहीं आर्थिक गतिविधियों से जुड़े कुछ आंकड़ों ने चिंता भी बढ़ाई।

HSBC और S&P Global द्वारा जारी फ्लैश इंडिया कंपोजिट PMI जून में घटकर 57.4 रह गया, जो मई में 59.3 था।

  • सर्विस सेक्टर PMI घटकर 17 महीनों के निचले स्तर 57.3 पर पहुंच गया।
  • मैन्युफैक्चरिंग PMI भी 55 से घटकर 54.5 रह गया।

इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार थोड़ी धीमी हुई है। यही वजह रही कि बाजार में आईटी और मेटल शेयरों में बिकवाली देखने को मिली।

आईटी और मेटल शेयरों में दबाव

इस सप्ताह आईटी और मेटल सेक्टर के शेयरों पर दबाव बना रहा।

वैश्विक स्तर पर टेक कंपनियों की कमजोर स्थिति और आर्थिक सुस्ती की आशंकाओं का असर भारतीय आईटी कंपनियों पर भी दिखाई दिया।

मेटल सेक्टर में भी मांग को लेकर चिंता बनी रही, जिसके चलते निवेशकों ने मुनाफावसूली करना बेहतर समझा।

इसके बावजूद बैंकिंग, ऑटो और एविएशन सेक्टर ने बाजार को संतुलित बनाए रखा।

इंडिगो और महिंद्रा एंड महिंद्रा रहे टॉप गेनर

सेंसेक्स की कंपनियों में इस सप्ताह सबसे बेहतर प्रदर्शन इंडिगो का रहा।

इंडिगो के शेयर लगभग 4.73 प्रतिशत चढ़े। वहीं महिंद्रा एंड महिंद्रा में भी करीब 3.82 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली।

ऑटो सेक्टर में मजबूत बिक्री और एविएशन सेक्टर में बढ़ती मांग के कारण इन कंपनियों के शेयरों में अच्छी खरीदारी हुई।

सोने की कीमतों में भी आई तेजी

दो दिनों की गिरावट के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में फिर तेजी दर्ज की गई।

सोना लगभग 0.4 प्रतिशत बढ़कर 4,015 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में सोने की ओर भी रुख कर रहे हैं।

आगे किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर?

विश्लेषकों के अनुसार अगले सप्ताह बाजार की दिशा कई महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करेगी।

इनमें सबसे प्रमुख हैं—

  • मानसून की प्रगति
  • महंगाई के आंकड़े
  • विदेशी निवेशकों की गतिविधियां
  • कच्चे तेल की कीमतें
  • भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से जुड़े संकेत
  • वैश्विक ब्याज दरों पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व का रुख

यदि मानसून सामान्य रहता है और कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं तो भारतीय शेयर बाजार में तेजी का सिलसिला जारी रह सकता है।

विशेषज्ञों की राय

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिलहाल भारतीय शेयर बाजार मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहा है, लेकिन निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।

तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी के लिए 24,200 का स्तर बेहद महत्वपूर्ण है। यदि सूचकांक इस स्तर के ऊपर मजबूती से बंद होता है तो बाजार में नई तेजी देखने को मिल सकती है।

हालांकि वर्तमान समय में सेक्टर आधारित निवेश के बजाय अच्छे फंडामेंटल वाले शेयरों का चयन अधिक फायदेमंद माना जा रहा है।

SamayPeNews निष्कर्ष

लगातार तीसरे सप्ताह तेजी के साथ बंद हुआ भारतीय शेयर बाजार यह संकेत देता है कि निवेशकों का भरोसा अभी भी मजबूत बना हुआ है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, RBI के सकारात्मक कदम और विदेशी निवेशकों की वापसी ने बाजार को मजबूती दी है। हालांकि कमजोर PMI आंकड़े और आईटी सेक्टर में बिकवाली जैसी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।

आने वाले दिनों में यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं और घरेलू आर्थिक संकेतक मजबूत बने रहते हैं, तो सेंसेक्स और निफ्टी नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ सकते हैं। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय मजबूत कंपनियों और लंबी अवधि की रणनीति पर ध्यान देना चाहिए।

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