‘यह सिर्फ साउथ सिनेमा में नहीं होता…’ Janhvi Kapoor की Peddi विवाद पर Nithya Menen का बड़ा बयान, बोलीं- ‘एक्टर्स को अपनी सीमाएं तय करनी चाहिए’

Peddi विवाद पर Nithya Menen की दो टूक- 'शोहरत से पहले आत्मसम्मान चुनना भी एक विकल्प है।'

Dev
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Peddi विवाद पर अभिनेत्री Nithya Menen ने कहा कि महिलाओं का ऑब्जेक्टिफिकेशन केवल साउथ सिनेमा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे फिल्म उद्योग की समस्या है।Nithya Menen और Janhvi Kapoor की तस्वीर, जिसमें Peddi विवाद पर अभिनेत्री का बयान सुर्खियों में है।

तेलुगु फिल्म ‘Peddi’ को लेकर छिड़ा विवाद अब एक नई बहस का रूप ले चुका है। फिल्म में अभिनेत्री Janhvi Kapoor के किरदार को लेकर सोशल मीडिया पर उठे सवालों के बीच अब राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेत्री Nithya Menen ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि महिलाओं का ऑब्जेक्टिफिकेशन केवल दक्षिण भारतीय फिल्मों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी फिल्म इंडस्ट्री में मौजूद एक प्रवृत्ति बन चुकी है।

Nithya Menen का यह बयान ऐसे समय आया है जब Peddi में Janhvi Kapoor की प्रस्तुति को लेकर इंटरनेट पर तीखी आलोचना हो रही है। कई लोगों का आरोप है कि फिल्म में अभिनेत्री के किरदार को केवल “मेल गेज” यानी पुरुष दर्शकों को आकर्षित करने के नजरिए से पेश किया गया।

क्या है पूरा विवाद?

Peddi की रिलीज के बाद सोशल मीडिया पर फिल्म के कुछ दृश्यों को लेकर बहस शुरू हो गई। दर्शकों के एक वर्ग का मानना था कि Janhvi Kapoor के किरदार को जरूरत से ज्यादा ग्लैमरस और हाइपर-सेक्सुअलाइज्ड तरीके से दिखाया गया।

आलोचकों का कहना था कि उनके किरदार में कहानी को आगे बढ़ाने वाला कोई मजबूत पक्ष नहीं दिखा और उन्हें केवल आकर्षण का केंद्र बनाने की कोशिश की गई।

देखते ही देखते यह मुद्दा केवल एक फिल्म तक सीमित नहीं रहा, बल्कि महिलाओं की प्रस्तुति और फिल्म उद्योग में उनकी भूमिका पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई।

Nithya Menen ने क्या कहा?

एक इंटरव्यू के दौरान Nithya Menen ने इस विवाद पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि इस समस्या की जड़ सिनेमा के अत्यधिक व्यावसायीकरण में छिपी हुई है।

उनके अनुसार, आज फिल्म उद्योग में अक्सर वही चीजें दोहराई जाती हैं जो व्यावसायिक रूप से सफल साबित होती हैं और दर्शकों का ध्यान आकर्षित करती हैं।

उन्होंने कहा कि जब किसी दृश्य में महिलाओं को वस्तु की तरह पेश किया जाता है, तो कलाकारों को भी अपनी सीमाएं तय करनी चाहिए।

Nithya ने कहा कि कलाकारों के पास यह अधिकार होता है कि वे किसी दृश्य को लेकर अपनी असहमति दर्ज कर सकें और स्पष्ट रूप से कह सकें कि वे किसी तरह की प्रस्तुति से सहज नहीं हैं।

‘यह केवल साउथ सिनेमा में नहीं होता’

Nithya Menen ने सबसे अहम बात यह कही कि इस मुद्दे को केवल दक्षिण भारतीय फिल्मों से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

उनका मानना है कि महिलाओं के ऑब्जेक्टिफिकेशन की प्रवृत्ति हर फिल्म उद्योग में मौजूद है।

उन्होंने कहा कि इसे केवल साउथ सिनेमा की समस्या बताना सही नहीं होगा क्योंकि यह एक व्यापक ट्रेंड बन चुका है और लगभग हर जगह इसका पालन किया जाता है।

उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और कई लोग उनकी स्पष्टवादिता की सराहना कर रहे हैं।

‘बेबस होना समाधान नहीं’

Nithya Menen ने अपने बयान में महिला कलाकारों की व्यक्तिगत पसंद और जिम्मेदारी का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि कलाकार पूरी तरह बेबस नहीं होते। वे अपनी शर्तों पर काम करने का फैसला कर सकते हैं।

अभिनेत्री के मुताबिक, उन्होंने अपने करियर में कई ऐसे प्रोजेक्ट्स छोड़े हैं जिनमें उन्हें कुछ तरह के दृश्य करने पड़ते, जिनसे वह सहज नहीं थीं।

उन्होंने माना कि ऐसे फैसलों की वजह से उन्हें कुछ बड़े अवसर और लोकप्रियता भी गंवानी पड़ी, लेकिन उन्होंने शोहरत से ज्यादा अपने सिद्धांतों को महत्व दिया।

उनका कहना था कि अगर कोई कलाकार केवल शीर्ष स्टार बनना चाहता है और उस मुकाम तक पहुंचने के लिए हर तरह का समझौता करने को तैयार है, तो वह उसका व्यक्तिगत निर्णय होता है।

Buchi Babu Sana ने मांगी थी माफी

Peddi विवाद बढ़ने के बाद फिल्म के निर्देशक Buchi Babu Sana ने भी सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी थी।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक बयान जारी करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य कभी भी किसी महिला किरदार का अपमान करना नहीं था।

निर्देशक ने स्वीकार किया कि यदि दर्शकों को फिल्म का कोई हिस्सा आपत्तिजनक लगा है, तो वे उनकी भावनाओं का सम्मान करते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि दर्शकों से मिले फीडबैक की समीक्षा करने के बाद फिल्म के संबंधित हिस्सों में बदलाव करने का फैसला लिया गया है।

महिलाओं की गरिमा पर दिया जोर

अपने बयान में Buchi Babu Sana ने कहा कि हर महिला सम्मान और गरिमा की हकदार है।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह भविष्य में भी ऐसे किरदारों को प्राथमिकता देंगे जो मजबूत हों और महिलाओं को सम्मानजनक तरीके से प्रस्तुत करें।

निर्देशक का यह कदम कई लोगों को सकारात्मक लगा क्योंकि अक्सर फिल्म निर्माता आलोचनाओं को स्वीकार करने से बचते हैं।

विवाद के बावजूद बॉक्स ऑफिस पर मजबूत प्रदर्शन

दिलचस्प बात यह है कि सोशल मीडिया पर आलोचनाओं के बावजूद Peddi का बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन प्रभावित होता नहीं दिख रहा है।

फिल्म को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है और कमाई के आंकड़े भी मजबूत बताए जा रहे हैं।

इससे यह सवाल भी उठता है कि क्या दर्शकों का एक बड़ा वर्ग अब भी ऐसी प्रस्तुतियों को स्वीकार करता है या फिर विवाद खुद फिल्म के लिए प्रचार का माध्यम बन जाते हैं।

बदलती सोच और नई बहस

पिछले कुछ वर्षों में दर्शकों की सोच में बड़ा बदलाव आया है। अब केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि फिल्मों के सामाजिक प्रभाव पर भी चर्चा होने लगी है।

महिला किरदारों की प्रस्तुति, उनकी भूमिका और उन्हें दिए जाने वाले महत्व को लेकर दर्शक पहले से अधिक जागरूक हुए हैं।

ऐसे में Peddi विवाद और Nithya Menen जैसे कलाकारों के बयान फिल्म उद्योग के लिए आत्ममंथन का अवसर भी बन सकते हैं।

निष्कर्ष

Peddi विवाद ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि सिनेमा में महिलाओं को किस नजरिए से प्रस्तुत किया जाना चाहिए। Nithya Menen का बयान इस चर्चा को एक नया आयाम देता है।

उन्होंने साफ कहा कि यह समस्या केवल दक्षिण भारतीय फिल्मों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी इंडस्ट्री की चुनौती है। साथ ही उन्होंने कलाकारों को अपनी सीमाएं तय करने और आत्मसम्मान के साथ फैसले लेने की सलाह भी दी।

अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह बहस भविष्य में फिल्मों की कहानी और महिला किरदारों की प्रस्तुति में कोई सकारात्मक बदलाव ला पाती है या नहीं।

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