SEBI का बड़ा कदम: Demat Mutual Funds पर SWP और STP की सुविधा बढ़ाने का प्रस्ताव
भारतीय पूंजी बाजार नियामक Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए एक बड़ा और अहम प्रस्ताव सामने रखा है। SEBI ने demat फॉर्म में रखे गए mutual fund units के लिए भी Systematic Withdrawal Plan (SWP) और Systematic Transfer Plan (STP) की standing instruction सुविधा देने को लेकर एक consultation paper जारी किया है।
- SEBI का बड़ा कदम: Demat Mutual Funds पर SWP और STP की सुविधा बढ़ाने का प्रस्ताव
- अभी क्या है नियम?
- SWP और STP क्या होते हैं?
- Demat निवेशकों को अभी किन दिक्कतों का सामना करना पड़ता है?
- वर्तमान प्रक्रिया क्यों है जटिल?
- Working Group और उसकी सिफारिशें
- SMAC की बैठक और Two-Phase Plan
- Phase I: शुरुआती बदलाव
- Phase II: एडवांस सुविधाएं
- SEBI ने किन मुद्दों पर मांगे सुझाव?
इस प्रस्ताव पर 26 फरवरी 2026 तक आम निवेशकों, मार्केट एक्सपर्ट्स और स्टेकहोल्डर्स से सुझाव मांगे गए हैं। इसके बाद SEBI इस पूरे फ्रेमवर्क पर अंतिम फैसला लेगा।
अभी क्या है नियम?
वर्तमान व्यवस्था के तहत:
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SWP और STP की standing instruction सुविधा सिर्फ SOA (Statement of Account) मोड में उपलब्ध है
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SOA मोड में म्यूचुअल फंड यूनिट्स सीधे AMC और RTA के पास दर्ज होती हैं
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Demat अकाउंट में रखे गए mutual funds के लिए निवेशकों को
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हर बार अलग-अलग redemption
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या transfer instruction
देनी पड़ती है
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यानी demat निवेशकों के लिए प्रक्रिया ज्यादा जटिल, समय लेने वाली और ऑपरेशनल रूप से भारी है।
SWP और STP क्या होते हैं?
SEBI ने अपने consultation paper में इन दोनों योजनाओं को सरल शब्दों में समझाया है:
Systematic Withdrawal Plan (SWP)
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निवेशक तय समय अंतराल पर
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निश्चित राशि या यूनिट्स
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अपने mutual fund निवेश से निकाल सकता है
यह सुविधा आमतौर पर:
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रिटायर्ड निवेशकों
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रेगुलर इनकम चाहने वालों
के लिए बेहद उपयोगी मानी जाती है।
Systematic Transfer Plan (STP)
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एक ही AMC की
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एक scheme से दूसरी scheme में
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ऑटोमैटिक ट्रांसफर की सुविधा
यह मार्केट रिस्क को मैनेज करने में मदद करता है।
Demat निवेशकों को अभी किन दिक्कतों का सामना करना पड़ता है?
SEBI के अनुसार, demat mutual fund holders को फिलहाल:
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हर SWP/STP ट्रांजैक्शन के लिए
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Delivery Instruction Slip (DIS)
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या Two-Factor Authentication
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या Power of Attorney (PoA)
का सहारा लेना पड़ता है
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SEBI का मानना है कि:
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इससे ऑपरेशनल बोझ बढ़ता है
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PoA के मामलों में निवेशक का सीधा नियंत्रण कम हो सकता है
वर्तमान प्रक्रिया क्यों है जटिल?
SEBI ने मौजूदा सिस्टम को विस्तार से समझाया:
STP के मामले में:
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निवेशक DP को एक scheme बेचने और दूसरी खरीदने का निर्देश देता है
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ऑर्डर stock broker और exchange से गुजरता है
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Clearing corporation settlement
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RTA से reconciliation
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अंत में यूनिट्स फिर से demat अकाउंट में क्रेडिट होती हैं
SWP में:
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Corporate action के जरिए यूनिट्स extinguish होती हैं
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पैसा सीधे बैंक अकाउंट में जाता है
यह पूरा प्रोसेस multi-step और समयसाध्य है।
Working Group और उसकी सिफारिशें
इस समस्या की व्यवहारिकता जांचने के लिए SEBI ने:
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Stock exchanges
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Depositories
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RTAs
के प्रतिनिधियों के साथ एक working group बनाया।
इस ग्रुप ने:
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Registration process
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Data standardisation
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Cancellation mechanism
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Information flow
जैसे पहलुओं का अध्ययन किया।
नतीजा:
Demat mutual funds के लिए भी SOA जैसी standing instruction सुविधा दी जानी चाहिए।
SMAC की बैठक और Two-Phase Plan
SEBI की Secondary Market Advisory Committee (SMAC) ने नवंबर 2025 में इस प्रस्ताव पर चर्चा की और two-phase implementation का सुझाव दिया।
Phase I: शुरुआती बदलाव
Phase I के तहत:
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निवेशक one-time standing instruction रजिस्टर कर सकेंगे
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Online और offline दोनों माध्यम उपलब्ध होंगे
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Execution होगा stock exchange order-entry platform से
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Unit-based और date-specific SWP/STP संभव होंगे
SEBI के मुताबिक:
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RTA सिस्टम में बड़े बदलाव की जरूरत नहीं
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AMCs पर कोई अतिरिक्त corporate action चार्ज नहीं पड़ेगा
Phase II: एडवांस सुविधाएं
Phase II में:
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Amount-based SWP/STP
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Appreciation-based withdrawal
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Swing STP जैसे advanced विकल्प
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Execution trigger RTA या exchange द्वारा
हालांकि निवेशक का अनुभव लगभग पहले जैसा ही रहेगा।
SEBI ने किन मुद्दों पर मांगे सुझाव?
SEBI ने consultation paper में जनता से इन बिंदुओं पर राय मांगी है:
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Demat mutual funds के लिए standing instruction बढ़ाना
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Phase I और Phase II की प्रक्रिया
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Phased rollout सही है या नहीं
Comments की आखिरी तारीख:
26 फरवरी 2026
निवेशकों के लिए क्यों अहम है यह प्रस्ताव?
अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो:
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Demat mutual fund निवेश आसान होगा
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Manual instructions की झंझट खत्म होगी
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Transparency और control बढ़ेगा
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Long-term investors को बड़ी राहत मिलेगी
यह कदम SEBI के उस विजन को दर्शाता है, जिसमें investor convenience और market efficiency को प्राथमिकता दी जा रही है।
SamaypeNews की राय
SEBI का यह प्रस्ताव demat mutual fund निवेशकों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। अगर phased implementation सफल रहता है, तो आने वाले समय में म्यूचुअल फंड निवेश पहले से कहीं ज्यादा सरल और भरोसेमंद बन जाएगा।
डिस्क्लेमर
यह खबर केवल जानकारी के उद्देश्य से है। निवेश से पहले प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर लें।
