NSE Q3 Results: मुनाफे में 37% की गिरावट, IPO से पहले कमजोर नतीजे
देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (Q3) के नतीजे जारी कर दिए हैं। नतीजों के मुताबिक, NSE का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 37% गिरकर ₹2,408 करोड़ रह गया है। वहीं, कंपनी की कुल आय (Total Income) में भी 9% की गिरावट दर्ज की गई है और यह घटकर ₹4,395 करोड़ पर आ गई।
खास बात यह है कि यह NSE के वे पहले नतीजे हैं, जो कंपनी को SEBI से IPO के लिए नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) मिलने के बाद आए हैं। ऐसे में IPO से पहले कमजोर वित्तीय आंकड़ों ने बाजार की नजरें NSE पर टिका दी हैं।
तिमाही आधार पर दिखी थोड़ी राहत
हालांकि, सालाना आधार पर आंकड़े कमजोर रहे, लेकिन क्रमिक (Quarter-on-Quarter) आधार पर NSE के प्रदर्शन में कुछ सुधार जरूर देखने को मिला।
Profit After Tax (PAT) में तिमाही आधार पर 15% की बढ़त
Total Income में 6% की वृद्धि
इससे संकेत मिलता है कि बाजार गतिविधियों में धीरे-धीरे रिकवरी देखने को मिल रही है, खासकर इक्विटी और डेरिवेटिव सेगमेंट में।
EBITDA और मार्जिन में भी गिरावट
NSE का Operating EBITDA भी Q3 में दबाव में रहा।
EBITDA: ₹2,851 करोड़
सालाना आधार पर 16% की गिरावट
EBITDA Margin घटकर 73% पर आ गया
विशेषज्ञों के मुताबिक, बढ़ती नियामकीय सख्ती और ट्रांजैक्शन चार्ज में कमी ने मार्जिन पर असर डाला है।
Transaction Charges में बड़ी गिरावट बनी वजह
NSE की कमाई का सबसे बड़ा स्रोत transaction charges होते हैं। Q3 में यहीं सबसे बड़ा झटका लगा।
Transaction charges से रेवेन्यू 12% YoY गिरकर ₹3,033 करोड़
हालांकि, तिमाही आधार पर इसमें 9% की बढ़त दर्ज की गई
इसका मुख्य कारण:
इक्विटी कैश मार्केट में वॉल्यूम का बढ़ना
डेरिवेटिव सेगमेंट में रिकवरी
डेटा और लिस्टिंग सेगमेंट ने संभाला मोर्चा
जहां ट्रांजैक्शन चार्ज से आय घटी, वहीं कुछ अन्य सेगमेंट्स ने NSE को सहारा दिया।
Data Feed और Terminal Services
रेवेन्यू में 17% YoY की बढ़ोतरी
कुल आय: ₹121 करोड़
Listing Services
11% की सालाना बढ़त
कुल रेवेन्यू: ₹111 करोड़
यह दिखाता है कि NSE धीरे-धीरे डाइवर्सिफाइड रेवेन्यू मॉडल की ओर बढ़ रहा है।
IPO को लेकर बड़ा अपडेट
NSE को हाल ही में SEBI से IPO के लिए मंजूरी (NOC) मिल चुकी है, जिससे लगभग एक दशक लंबा इंतजार खत्म हो गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक:
IPO पूरी तरह से Offer For Sale (OFS) हो सकता है
अगले 7–8 महीनों में लॉन्च होने की संभावना
IPO की तैयारी के तहत:
NSE बोर्ड एक स्पेशल कमेटी बनाएगा
यही कमेटी:
लिस्टिंग प्रोसेस तय करेगी
Merchant Bankers और Legal Advisors की नियुक्ति करेगी
DRHP (Draft Red Herring Prospectus) तैयार करवाएगी
ग्रे मार्केट में NSE की जबरदस्त वैल्यूएशन
भले ही Q3 के नतीजे कमजोर रहे हों, लेकिन ग्रे मार्केट में NSE की वैल्यू काफी मजबूत बनी हुई है।
अनुमानित वैल्यूएशन: ₹5 लाख करोड़ से ज्यादा
कुल शेयरहोल्डर्स: लगभग 1.77 लाख
अगर यह IPO लॉन्च होता है, तो यह भारत के सबसे बड़े IPOs में से एक हो सकता है।
मैनेजमेंट का बयान
NSE के MD और CEO आशीष चौहान पहले ही इस मंजूरी को लेकर सकारात्मक संकेत दे चुके हैं।
वहीं, NSE के चेयरपर्सन श्रीनिवास इनजेती ने कहा था:
“SEBI की मंजूरी के साथ हम वैल्यू क्रिएशन के एक नए अध्याय में प्रवेश कर रहे हैं। यह मंजूरी भारतीय अर्थव्यवस्था और कैपिटल मार्केट्स में NSE की अहम भूमिका को और मजबूत करती है।”
निवेशकों के लिए क्या मायने रखते हैं ये नतीजे?
शॉर्ट टर्म में NSE के नतीजे दबाव में
लेकिन लॉन्ग टर्म में:
IPO
बढ़ता निवेशक आधार
टेक्नोलॉजी और डेटा सर्विसेज से रेवेन्यू
NSE को एक मजबूत दीर्घकालिक खिलाड़ी बनाते हैं।
SamaypeNews की राय
NSE के Q3 नतीजे यह साफ करते हैं कि बाजार में रेगुलेटरी बदलाव और ट्रांजैक्शन चार्ज कटौती का असर एक्सचेंज की कमाई पर पड़ा है। हालांकि, IPO की मंजूरी और भविष्य की ग्रोथ स्ट्रैटेजी NSE के लिए एक नई शुरुआत साबित हो सकती है।
डिस्क्लेमर
यह खबर केवल सूचना के उद्देश्य से है। निवेश से पहले प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से सलाह अवश्य लें।
